{"_id":"5a3ff2b74f1c1b0e788b4c34","slug":"41514140343-mau-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"लागू की जाए एक देश, एक शिक्षा समान नीति: अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लागू की जाए एक देश, एक शिक्षा समान नीति: अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति
Updated Mon, 25 Dec 2017 12:02 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मऊ। नगर के पालिका कम्युनिटी हाल में रविवार को सामाजिक न्याय सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें सामाजिक आर्थिक न्याय दलितों तथा पिछड़ों का आरक्षण आदि मुद्दा छाया रहा।
इस मौके पर मुख्य अतिथि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति सभाजीत यादव ने कहा कि आजादी के 70 वर्ष बाद भी देश की आजादी के आंदोलन का उद्देश्य अभी भी पूरा नहीं हो पाया है। आजादी आकाश से गिरकर खजूर पर लटक गई है। आम आदमी तक नहीं पहुंच पाई है। देश में गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वालों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। आज भी देश मेें लगभग 38 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। गरीबों और बेरोजगारों के प्रति केंद्र व प्रदेश सरकारें विल्कुल संवेदनहीन हो चुकी हैं। देश की 95 प्रतिशत चल और अचल संपत्ति पर देश के मात्र 10 प्रतिशत लोगों का कब्जा हो गया है। कृषि से संबंधित स्वामीनाथन आयोग की संस्तुतियों को अभी तक लागू नहीं किया जा सका है। आयोग की रिपोर्ट लागू न होने का परिणाम है कि किसानों की आर्थिक स्थिति दयनीय होती जा रही है। स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू किया जाए, तभी किसानों की समस्याओं का समाधान काफी हद तक हो सकता है। मंडल कमीशन की संस्तुतियों को लागू किया जाए। जातिगत जनगणना को सार्वजनिक किया जाए। न्यायालयों व उप्र लोक सेवा आयोग में चरणबद्ध तरीके से आरक्षण लागू किया जाए। एक देश, एक शिक्षा समान नीति लागू की जाए। दलितों तथा पिछड़ों को प्रमोशन में आरक्षण पुन: लागू किया जाए। सम्मेलन को पूर्व एमएलसी दयाराम पाल, पूर्व सांसद बलिहारी बाबू, पूर्व सांसद बालकृष्ण चौहान, रामनरायन कुशवाहा पूर्व विधायक, रामकुमार भारती, सुबाष चंद, एकबाल अहमद, प्रेमप्रकाश यादव, हिसामुद्दीन, प्रशांत, सुमित्रा यादव, राना खातून, त्रिलोकी सोनकर आदि ने संबोधित किया। आयोजक रामकुमार भारती तथा संयोजक मनोज यादव ने आगत अतिथियों के प्रति आभार प्रकट किया। संचालन केके यादव एडवोकेट ने किया।
विज्ञापन
इस मौके पर मुख्य अतिथि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति सभाजीत यादव ने कहा कि आजादी के 70 वर्ष बाद भी देश की आजादी के आंदोलन का उद्देश्य अभी भी पूरा नहीं हो पाया है। आजादी आकाश से गिरकर खजूर पर लटक गई है। आम आदमी तक नहीं पहुंच पाई है। देश में गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वालों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। आज भी देश मेें लगभग 38 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। गरीबों और बेरोजगारों के प्रति केंद्र व प्रदेश सरकारें विल्कुल संवेदनहीन हो चुकी हैं। देश की 95 प्रतिशत चल और अचल संपत्ति पर देश के मात्र 10 प्रतिशत लोगों का कब्जा हो गया है। कृषि से संबंधित स्वामीनाथन आयोग की संस्तुतियों को अभी तक लागू नहीं किया जा सका है। आयोग की रिपोर्ट लागू न होने का परिणाम है कि किसानों की आर्थिक स्थिति दयनीय होती जा रही है। स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू किया जाए, तभी किसानों की समस्याओं का समाधान काफी हद तक हो सकता है। मंडल कमीशन की संस्तुतियों को लागू किया जाए। जातिगत जनगणना को सार्वजनिक किया जाए। न्यायालयों व उप्र लोक सेवा आयोग में चरणबद्ध तरीके से आरक्षण लागू किया जाए। एक देश, एक शिक्षा समान नीति लागू की जाए। दलितों तथा पिछड़ों को प्रमोशन में आरक्षण पुन: लागू किया जाए। सम्मेलन को पूर्व एमएलसी दयाराम पाल, पूर्व सांसद बलिहारी बाबू, पूर्व सांसद बालकृष्ण चौहान, रामनरायन कुशवाहा पूर्व विधायक, रामकुमार भारती, सुबाष चंद, एकबाल अहमद, प्रेमप्रकाश यादव, हिसामुद्दीन, प्रशांत, सुमित्रा यादव, राना खातून, त्रिलोकी सोनकर आदि ने संबोधित किया। आयोजक रामकुमार भारती तथा संयोजक मनोज यादव ने आगत अतिथियों के प्रति आभार प्रकट किया। संचालन केके यादव एडवोकेट ने किया।
विज्ञापन