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कलाकारों ने नृत्य के माध्यम से राधा कृष्ण की लीलाओं की प्रस्तुति
Updated Sat, 21 Apr 2018 11:52 PM IST
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मऊ। नगर के अलीनगर स्थित सनबीम स्कूल मेें स्पीक मैकै संस्था द्वारा शनिवार को मणिपुरी नृत्य का आयोजन किया गया। कलाकारों ने विभिन्न मुद्राओं भावों तथा राधा कृष्ण की लीलाओं का नृत्य के माध्यम से प्रस्तुति देकर भाव विभोर कर दिया।
स्पिक मैके में मणिपुर की प्रसिद्ध लोक नृत्य कला पुंग चोलम का आयोजन किया गया । कार्यक्रम में मणिपुर से आए कलाकार के रोमेंद्र सिंह और उनकी टीम ने विभिन्न मुद्राओं भावों तथा राधा कृष्ण की लीलाओं का नृत्य के माध्यम से प्रस्तुति देकर भाव विभोर कर दिया। के रोमेंद्र सिंह ने बताया पुंग चोलम मणिपुर नृत्य की ऐसी विधा है जिसमें सभी पुरूष कलाकार एक विशेष प्रकार की धोती, पीला गमछा और वाद्य यंत्र के सहारे नृत्य करते हैं। जिसमें संगीत नहीं होती। आपसी ताल लय का समिश्रण प्रस्तुति को शानदार बना देती है। उनके वाद्य यंत्र को पुंग और चोलम का तात्पर्य भाव भंगिमा होता है। इस लोक नृत्य में शामिल कलाकारों ने कहा कि वे अपनी शिक्षा के साथ ही इस लुप्त हो रही कला को बचाने के लिए प्रतिदिन घंटो अभ्यास करतें हैं।विभिन्न अवसरों पर प्रस्तुत कर इस कला को अक्षुण बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं। छात्रों ने कलाकारों से इस लोक नृत्य से जुड़े विभिन्न प्रश्न किए, जिसका कलाकारों ने सहजता से जवाब दिया। विद्यालय के निदेशक राकेश गर्ग ने सभी कलाकारों का स्वागत अभिनन्दन किया। कहा कि मणिपुर आज विभिन्न क्षेत्रों में जाना जाता है। जिसमें शिक्षा, स्वास्थ, खेलकूद लेकिन यह कला मणिपुर को और समृद्ध बनाती है। उन्होने बच्चों को स्पिक मैके द्वारा चलाए जा रहे प्रयासों से अपनी कला को सीखने को प्रेरित किया।
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स्पिक मैके में मणिपुर की प्रसिद्ध लोक नृत्य कला पुंग चोलम का आयोजन किया गया । कार्यक्रम में मणिपुर से आए कलाकार के रोमेंद्र सिंह और उनकी टीम ने विभिन्न मुद्राओं भावों तथा राधा कृष्ण की लीलाओं का नृत्य के माध्यम से प्रस्तुति देकर भाव विभोर कर दिया। के रोमेंद्र सिंह ने बताया पुंग चोलम मणिपुर नृत्य की ऐसी विधा है जिसमें सभी पुरूष कलाकार एक विशेष प्रकार की धोती, पीला गमछा और वाद्य यंत्र के सहारे नृत्य करते हैं। जिसमें संगीत नहीं होती। आपसी ताल लय का समिश्रण प्रस्तुति को शानदार बना देती है। उनके वाद्य यंत्र को पुंग और चोलम का तात्पर्य भाव भंगिमा होता है। इस लोक नृत्य में शामिल कलाकारों ने कहा कि वे अपनी शिक्षा के साथ ही इस लुप्त हो रही कला को बचाने के लिए प्रतिदिन घंटो अभ्यास करतें हैं।विभिन्न अवसरों पर प्रस्तुत कर इस कला को अक्षुण बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं। छात्रों ने कलाकारों से इस लोक नृत्य से जुड़े विभिन्न प्रश्न किए, जिसका कलाकारों ने सहजता से जवाब दिया। विद्यालय के निदेशक राकेश गर्ग ने सभी कलाकारों का स्वागत अभिनन्दन किया। कहा कि मणिपुर आज विभिन्न क्षेत्रों में जाना जाता है। जिसमें शिक्षा, स्वास्थ, खेलकूद लेकिन यह कला मणिपुर को और समृद्ध बनाती है। उन्होने बच्चों को स्पिक मैके द्वारा चलाए जा रहे प्रयासों से अपनी कला को सीखने को प्रेरित किया।
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