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सभी दुखों की एक ही औषधि है भागवत कथा
Updated Thu, 28 Dec 2017 11:41 PM IST
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भगवान का दूसरा नाम ही सत्य है। सत्यनिष्ठ प्रेम के पुजारी भक्त भगवान के अति प्रिय होते हैं। कलियुग में कथा का आश्रय ही सच्चा सुख प्रदान करता है। कथा श्रवण करने से दुख और पाप मिट जाते हैं। सभी प्रकार के सुख एवं शांति की प्राप्ति होती है। भागवत कलयुग का अमृत है और सभी दुखों की एक ही औषधि भागवत कथा है। उक्त बाते कस्बा के प्राचीन शिवमंदिर में बुधवार को आयोजित साप्ताहिक संगीतमय श्री भागवत कथा के दूसरे दिन वृंदावन से पधारे कथा वाचक अनुपानंद जी महराज श्रद्धालुओं के बीच बोल रहे थे।
भागवत अवरोध मिटाने वाली उत्तम अवसाद है। भागवत का आश्रय करने वाला कोई भी दुखी नहीं होता है। भगवान शिव ने सुखदेव बनकर सारे संसार को भागवत सुनाई है। कहा कि अच्छे और बुरे कर्मो का फल भुगतना ही पड़ता है। उन्होंने भीष्म पितामह का उदाहरण देते हुए कहा कि भीष्म पितामह छह महीने तक वाणों की शैय्या पर लेटे थे। जब भीष्म पितामह वाणों की शैय्या पर लेटे थे तब वे सोच रहे थे कि मैंने कौन सा पाप किया है जो मुझे इतने कष्ट सहन करना पड़ रहे हैं। उसी वक्त भगवान कृष्ण भीष्म पितामह के पास आते हैं। तब भीष्म पितामह कृष्ण से पूछते हैं कि मैंने ऐसे कौन से पाप किए हैं कि बाणों की शैय्या पर लेटा हूं पर प्राण नहीं निकल रहे हैं। तब भगवान कृष्ण ने भीष्म पितामह से कहा कि आप अपने पुराने जन्मों को याद करो और सोचो कि आपने कौन सा पाप किया है। भीष्म पितामह बहुत ज्ञानी थे। उन्होंने कृष्ण से कहा कि मैंने अपने पिछले जन्म में रत्तीभर भी पाप नहीं किया है। इस पर कृष्ण ने उन्हें बताते हुए कहा कि पिछले जन्म में जब आप राजकुमार थे और घोड़े पर सवार होकर कहीं जा रहे थे। उसी दौरान आपने एक नाग को जमीन से उठाकर फेंक दिया तो कांटों पर लेट गया था पर छह माह तक उसके प्राण नहीं निकले थे। उसी कर्म का फल है जो आप छह महीने तक बाणों की शैय्या पर लेटे हैं।
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भागवत अवरोध मिटाने वाली उत्तम अवसाद है। भागवत का आश्रय करने वाला कोई भी दुखी नहीं होता है। भगवान शिव ने सुखदेव बनकर सारे संसार को भागवत सुनाई है। कहा कि अच्छे और बुरे कर्मो का फल भुगतना ही पड़ता है। उन्होंने भीष्म पितामह का उदाहरण देते हुए कहा कि भीष्म पितामह छह महीने तक वाणों की शैय्या पर लेटे थे। जब भीष्म पितामह वाणों की शैय्या पर लेटे थे तब वे सोच रहे थे कि मैंने कौन सा पाप किया है जो मुझे इतने कष्ट सहन करना पड़ रहे हैं। उसी वक्त भगवान कृष्ण भीष्म पितामह के पास आते हैं। तब भीष्म पितामह कृष्ण से पूछते हैं कि मैंने ऐसे कौन से पाप किए हैं कि बाणों की शैय्या पर लेटा हूं पर प्राण नहीं निकल रहे हैं। तब भगवान कृष्ण ने भीष्म पितामह से कहा कि आप अपने पुराने जन्मों को याद करो और सोचो कि आपने कौन सा पाप किया है। भीष्म पितामह बहुत ज्ञानी थे। उन्होंने कृष्ण से कहा कि मैंने अपने पिछले जन्म में रत्तीभर भी पाप नहीं किया है। इस पर कृष्ण ने उन्हें बताते हुए कहा कि पिछले जन्म में जब आप राजकुमार थे और घोड़े पर सवार होकर कहीं जा रहे थे। उसी दौरान आपने एक नाग को जमीन से उठाकर फेंक दिया तो कांटों पर लेट गया था पर छह माह तक उसके प्राण नहीं निकले थे। उसी कर्म का फल है जो आप छह महीने तक बाणों की शैय्या पर लेटे हैं।
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