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हत्यारोपी पिता की जमानत अर्जी खारिज
Updated Sun, 27 Aug 2017 12:36 AM IST
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मऊ। जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेंद्र कुमार ने पुत्र की हत्या के मामले में आरोपी बने पिता की जमानत अर्जी को सुनवाई के बाद खारिज कर दिया। जिला जज ने मामले के विवेचनाधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाया है। मामला रानीपुर थाना क्षेत्र का है।
मामले के अनुसार रानीपुर थाना क्षेत्र के टड़वा पलिया गांव निवासी रामनाथ सिंह पुत्र रमाशंकर सिंह की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज हुई। वादी का आरोप है कि उसके लड़के तेजबहादुर सिंह की हत्या कर दी गई। उसने और उसकी मां ने घटना को देखा है। मामले में अखिलेश उर्फ बिहारी और दो अन्य को नामजद किया गया। पुलिस ने विवेचना शुरु किया। विवेचना के दौरान पुलिस ने आरोपी अखिलेश को बरी करते हुए वादी मुकदमा रामनाथ सिंह को अपने लड़के की हत्या करने का आरोप लगाते हुए गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। मामले में आरोपी बने रामनाथ सिंह की ओर से जमानत के लिए अर्जी दी गई। अर्जी पर बचाव पक्ष से कहा गया कि उसे झूठे फसाया गया है। चश्मदीद गवाहों के बयान तक केस डायरी विवेचक ने अंकित नहीं किया है। नामजद आरोपी से मिलकर लड़की हत्या के मामले में उसे फंसाया गया है। बचाव पक्ष और डीजीसी फौजदारी के तर्को को सुनने तथा केस डायरी का अवलोकन करने के बाद रामनाथ सिंह की जमानत अर्जी खारिज कर दिया। साथ ही मामले के विवेचको की भूमिका संदिग्ध पाते हुए उनके विरुद्व प्रकीर्ण वाद दर्ज करने का आदेश दिया।
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मामले के अनुसार रानीपुर थाना क्षेत्र के टड़वा पलिया गांव निवासी रामनाथ सिंह पुत्र रमाशंकर सिंह की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज हुई। वादी का आरोप है कि उसके लड़के तेजबहादुर सिंह की हत्या कर दी गई। उसने और उसकी मां ने घटना को देखा है। मामले में अखिलेश उर्फ बिहारी और दो अन्य को नामजद किया गया। पुलिस ने विवेचना शुरु किया। विवेचना के दौरान पुलिस ने आरोपी अखिलेश को बरी करते हुए वादी मुकदमा रामनाथ सिंह को अपने लड़के की हत्या करने का आरोप लगाते हुए गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। मामले में आरोपी बने रामनाथ सिंह की ओर से जमानत के लिए अर्जी दी गई। अर्जी पर बचाव पक्ष से कहा गया कि उसे झूठे फसाया गया है। चश्मदीद गवाहों के बयान तक केस डायरी विवेचक ने अंकित नहीं किया है। नामजद आरोपी से मिलकर लड़की हत्या के मामले में उसे फंसाया गया है। बचाव पक्ष और डीजीसी फौजदारी के तर्को को सुनने तथा केस डायरी का अवलोकन करने के बाद रामनाथ सिंह की जमानत अर्जी खारिज कर दिया। साथ ही मामले के विवेचको की भूमिका संदिग्ध पाते हुए उनके विरुद्व प्रकीर्ण वाद दर्ज करने का आदेश दिया।
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