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Mau News: 2713 किसान 1050 हेक्टेयर में करेंगे प्राकृतिक खेती

Thu, 28 Aug 2025 11:40 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 28 Aug 2025 11:40 PM IST
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2713 farmers will do natural farming in 1050 hectares
मऊ। जिले के पांच ब्लॉक क्षेत्रों के किसान प्राकृतिक तरीके से खेती कर कम लागत में फसल उत्पादन कर सकेंगे। इससे पर्यावरण संरक्षित होगा। खेती और मनुष्य का स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। जिले में कृषि विभाग से चयनित 42 कृषि सखियां 1050 हेक्टेयर प्राकृतिक खेती को नया आयाम देंगी। कृषि सखियां गांव-गांव जाकर 2713 किसानों को प्राकृतिक खेती करने के लिए जागरूक करेंगी।
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जनपद के फतेहपुरमंडाव, दोहरीघाट, बड़रांव, घोसी, परदहां सहित पांच ब्लॉक क्षेत्र के विभिन्न गांवों में 1050 हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती होगी। कृषि विभाग की ओर से चयनित 42 कृषि सखियों को प्रशिक्षण दे दिया गया है। वर्तमान में किसानों को प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया चल रही है। प्राकृतिक खेती के लिए 2713 किसानों का चयन किया गया है। चयनित किसान रासायनिक उर्वरकों की जगह पर प्राकृतिक तरीके से खेती करेंगे। प्राकृतिक खेती के लिए किसानों को जागरूक करने वाली कृषि सखियों को पांच हजार रुपये प्रति महीने मानदेय दिया जाएगा। वहीं, खेतों में रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल से मिट्टी के जीवांश, केचुआ, अन्य कीट मित्रों को नुकसान पहुंचता है। जबकि प्राकृतिक खेती से इनका संरक्षण होता है। प्राकृतिक खेती के लिए देसी गाय जरूरी है। गोबर, गोमूत्र, गुड़, पानी आदि मिलाकर घोल तैयार किया जाता है। इसके बाद इसका खेत में छिड़काव किया जाता है। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है। इस बाबत कृषि उपनिदेशक सत्येंद्र सिंह चौहान का कहना है कि मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने और लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए प्राकृतिक खेती पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए कृषि सखियों की सहायता ली जाएगी। अधिक से अधिक से दायरे में प्राकृतिक खेती किसान कर सकें, इसके लिए किसानों को चार हजार रुपये प्रति एकड़ अनुदान दिया जाएगा। प्राकृतिक खेती को लेकर कृषि सखियां किसानों को जागरूक करेंगी।
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यह है प्राकृतिक खेती
प्राकृतिक खेती रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के बिना, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और कीटों को नियंत्रित करने के लिए प्राकृतिक तत्वों जैसे गोबर, गोमूत्र, नीम और गुड़ के उपयोग से होती है। यह कृषि-पारिस्थितिकी पर आधारित एक विविध प्रणाली है, जो फसल, पेड़ों और पशुधन को एकीकृत करती है। प्राकृतिक खेती से मिट्टी का स्वास्थ्य सुधरता है, पानी का संरक्षण होता है, लागत कम आती है और किसानों की आय बढ़ सकती है।
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