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234 परिवारों को नहीं मिला पारिवारिक योजना का लाभ
mau news
Updated Fri, 02 Feb 2018 11:11 PM IST
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मऊ। प्रदेश सरकार ने पारिवारिक लाभ योजना का संचालन ऑनलाइन कर दिया है। इसका उद्देश्य है कि योजना के संचालन में पारदर्शिता बनी रहे और लाथार्थियों को योजना का लाभ त्वरित रूप से मिल सके। लेकिन इनमें छोटी मोटी त्रुटियां लाभार्थियों को भारी पड़ रही हैं। जनपद स्तर पर इनमें सुधार कर पाना संभव नहीं हो पा रहा है।इसलिए योजना का लाभ पाने में परेशानियों का सामाना करना पड़ रहा है। जिले में ऐसे 234 लाभार्थियों को सिस्टम की गड़बड़ियों के चलते लाभ से वंचित होना पड़ रहा है।
सरकार की इस योजना के तहत घर के मुखिया अथवा किसी कमाऊ सदस्य की असामयिक मौत पर सरकार मृतकों के उत्तराधिकारी को 30 हजार रुपये की मदद देती है। नई व्यवस्था के तहत मृतक के वारिस की तरफ से इस आशय का ऑनलाइन आवेदन देना होता है। संबंधित क्षेत्र के सेक्रेटरी और लेखपाल के सत्यापन के बाद उसे उपजिलाधिकारी की लॉग इन से अपनी संस्तुति के साथ समाज कल्याण विभाग को भेजा जाता है। इसके बाद पीड़ित परिवार के सदस्य के बैंक खाते में 30 हजार रुपये भेज दिए जाते हैं। जिले में इस वित्तीय वर्ष में कुल 684 व्यक्तियों की असामयिक मौतें हुईं। इनके लिए आवेदन किए गए। विभागीय सत्यापन के बाद ये पात्र पाए गए और उपजिलाधिकारियों की संस्तुति के बाद सारी प्रकिया पूर्ण कर ली गई। इस योजना के तहत 450 पीडित परिवारों को तो योजना का लाभ मिल गया। लेकिन 234 ऐसे परिवार हैं जिन्हें इस योजना का लाभ पाने का इंतजार है। इनके मामलों में प्रदेश मुख्यालय से केवल इतना ही संदेश आया है कि धन का अंतरण फेल हो गया। किन कारणों से ऐसा हुआ , यह नहीं पता चल पाता है। इनमें कुछ के बैंक एकाउंट गलत अंकित किया हुआ बताया गया है। जबकि पीड़ित लोगों का कहना है कि ऑनलाइन करते समय वे अपने बैंक पास बुक की छाया प्रति भी हार्ड कापी के साथ लगाए थे। लाभार्थी समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय का चक्कर लगाते हैं लेकिन इस विभाग को भी कुछ पता नहीं चल पाता है।
कोट
कंप्यूटर से ऑनलाइन आवेदन करते समय आई माइनर त्रुटियों जैसे कि बैंक एकाउंट या आधार नंबर आदि में मामूूली त्रुटियों के चलते प्रदेश मुख्यालय से धनराशि का अंतरण नहीं हो पाया है। सारा सिस्टम ऑनलाइन होने के चलते हम अपनी तरफ से उसमें कोई संशोधन नहीं कर सकते अथवा न ही हम उसके कारणों को ही जान सकते। यह प्रकिया पूरी तरह ऑनलाइन है और सभी अफसरों के अपने आईडीमेल और कोड हैं। मुख्यालय को मेल करके इस समस्या से अवगत करा दिए हैं ।234 लाभार्थियों के बैंक खातों में योजना की राशि भेजी नहीं जा सकी है।
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-मुक्तेश्वर चौबे जिला समाज कल्याण अधिकारी, मऊ
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सरकार की इस योजना के तहत घर के मुखिया अथवा किसी कमाऊ सदस्य की असामयिक मौत पर सरकार मृतकों के उत्तराधिकारी को 30 हजार रुपये की मदद देती है। नई व्यवस्था के तहत मृतक के वारिस की तरफ से इस आशय का ऑनलाइन आवेदन देना होता है। संबंधित क्षेत्र के सेक्रेटरी और लेखपाल के सत्यापन के बाद उसे उपजिलाधिकारी की लॉग इन से अपनी संस्तुति के साथ समाज कल्याण विभाग को भेजा जाता है। इसके बाद पीड़ित परिवार के सदस्य के बैंक खाते में 30 हजार रुपये भेज दिए जाते हैं। जिले में इस वित्तीय वर्ष में कुल 684 व्यक्तियों की असामयिक मौतें हुईं। इनके लिए आवेदन किए गए। विभागीय सत्यापन के बाद ये पात्र पाए गए और उपजिलाधिकारियों की संस्तुति के बाद सारी प्रकिया पूर्ण कर ली गई। इस योजना के तहत 450 पीडित परिवारों को तो योजना का लाभ मिल गया। लेकिन 234 ऐसे परिवार हैं जिन्हें इस योजना का लाभ पाने का इंतजार है। इनके मामलों में प्रदेश मुख्यालय से केवल इतना ही संदेश आया है कि धन का अंतरण फेल हो गया। किन कारणों से ऐसा हुआ , यह नहीं पता चल पाता है। इनमें कुछ के बैंक एकाउंट गलत अंकित किया हुआ बताया गया है। जबकि पीड़ित लोगों का कहना है कि ऑनलाइन करते समय वे अपने बैंक पास बुक की छाया प्रति भी हार्ड कापी के साथ लगाए थे। लाभार्थी समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय का चक्कर लगाते हैं लेकिन इस विभाग को भी कुछ पता नहीं चल पाता है।
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कंप्यूटर से ऑनलाइन आवेदन करते समय आई माइनर त्रुटियों जैसे कि बैंक एकाउंट या आधार नंबर आदि में मामूूली त्रुटियों के चलते प्रदेश मुख्यालय से धनराशि का अंतरण नहीं हो पाया है। सारा सिस्टम ऑनलाइन होने के चलते हम अपनी तरफ से उसमें कोई संशोधन नहीं कर सकते अथवा न ही हम उसके कारणों को ही जान सकते। यह प्रकिया पूरी तरह ऑनलाइन है और सभी अफसरों के अपने आईडीमेल और कोड हैं। मुख्यालय को मेल करके इस समस्या से अवगत करा दिए हैं ।234 लाभार्थियों के बैंक खातों में योजना की राशि भेजी नहीं जा सकी है।
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-मुक्तेश्वर चौबे जिला समाज कल्याण अधिकारी, मऊ