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चंद्रग्रहण पर तमसा और सरयू तट पर लगेगा श्रद्धालुओं का जमघट
Updated Mon, 29 Jan 2018 12:09 AM IST
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दोहरीघाट(मऊ)। आगामी बुधवार को लगने वाले चंद्रग्रहण के दिन दोहरीघाट के घाघरा में श्रद्घालु डुबकी लगाएंगे। आमतौर पर ग्रहण लगने के बाद श्रद्घालु सरयू नदी में डुबकी लगाकर मंदिरों में मत्था टेकते हैं। हालांकि चंद्रग्रहण के मद्देनजर घाटों पर सफाई नहीं कराई जा सकी है।
मर्यादा पुरुषोत्तम राम से जुड़े होने के कारण हिंदू जनमानस में सरयू नदी को अत्यंत महत्व प्रदान किया गया है। नदी तट पर श्रद्घालुओं के पहुंचने की उम्मीद से नगर पंचायत की तरफ से सुरक्षा व्यवस्था करने के लिए पुलिस प्रशासन को पत्र भेजा गया है। मान्यता है कि पवित्र नदी और पोखरों में स्नान करने से सभी पाप कट जाते हैं। लेकिन अभी तक नदी तट पर साफ सफाई शुरू नहीं की जा सकी है। माघ शुक्ल पक्ष पूर्णिमा यानि 31 जनवरी को चंद्रग्रहण बुधवार की शाम 05.18 से रात 08.41 तक रहेगा। ग्रहण समाप्त होने के बाद श्रद्घालुओं के स्नान के लिए सरयू के नागा बाबा की कुटी, राम और जनकी घाट सहित अन्य स्थानों पर डुबकी लगाने की व्यवस्था नगर पंचायत की तरफ से की जाएगी। इस संबंध में रतनपुरा ब्लाक क्षेत्र के पं. जयगोविंद मिश्र ने बताया कि ग्रहण के समय दान और जापादि का महत्व माना गया है। पवित्र नदियों अथवा तालाबों में स्नान किया जाता है। मंत्र जाप किया जाता है। इस दौरान मंत्र सिद्धि का भी महत्व है। धर्म-कर्म से जुड़े लोगों को अपनी राशि के अनुसार दान करना चाहिए।
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मर्यादा पुरुषोत्तम राम से जुड़े होने के कारण हिंदू जनमानस में सरयू नदी को अत्यंत महत्व प्रदान किया गया है। नदी तट पर श्रद्घालुओं के पहुंचने की उम्मीद से नगर पंचायत की तरफ से सुरक्षा व्यवस्था करने के लिए पुलिस प्रशासन को पत्र भेजा गया है। मान्यता है कि पवित्र नदी और पोखरों में स्नान करने से सभी पाप कट जाते हैं। लेकिन अभी तक नदी तट पर साफ सफाई शुरू नहीं की जा सकी है। माघ शुक्ल पक्ष पूर्णिमा यानि 31 जनवरी को चंद्रग्रहण बुधवार की शाम 05.18 से रात 08.41 तक रहेगा। ग्रहण समाप्त होने के बाद श्रद्घालुओं के स्नान के लिए सरयू के नागा बाबा की कुटी, राम और जनकी घाट सहित अन्य स्थानों पर डुबकी लगाने की व्यवस्था नगर पंचायत की तरफ से की जाएगी। इस संबंध में रतनपुरा ब्लाक क्षेत्र के पं. जयगोविंद मिश्र ने बताया कि ग्रहण के समय दान और जापादि का महत्व माना गया है। पवित्र नदियों अथवा तालाबों में स्नान किया जाता है। मंत्र जाप किया जाता है। इस दौरान मंत्र सिद्धि का भी महत्व है। धर्म-कर्म से जुड़े लोगों को अपनी राशि के अनुसार दान करना चाहिए।
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