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बायो मेडिकल वेस्ट

Mon, 07 Aug 2017 11:03 PM IST
Updated Mon, 07 Aug 2017 11:03 PM IST
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बायो मेडिकल वेस्ट
मऊ। जिले में सिर्फ दो निजी अस्पतालों को छोड़ दिया जाय तो किसी भी अस्पताल में बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम नहीं लगाया गया है। इस सुविधा से जिला अस्पताल के साथ सभी सरकारी अस्पताल भी इस सुविधा से कोसों दूर हैं। इसका परिणाम है कि अस्पतालों का कचरा सड़क पर ऐसी ही फेंक दिया जाता है। यह कचरा मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करता है। पूरे प्रदेश में सिर्फ 17 मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम प्लांट ही हैं। हाईकोर्ट ने इस पर गंभीर रुख अपनाया है। अस्पतालों से निकलने वाले कचरे को निस्तारित करने के लिए बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बलाने का नियम है। अस्पतालों को मेडिकल कचरे को आस पास न फेंक कर उस प्लांट में निस्तारित करना होता है। जिला मुख्यालय पर फातिमा अस्पताल के साथ शारदा नारायण अस्पताल पर यह सिस्टम लगा है। इसके बाद अन्य किसी अस्पताल ने वैस्टज मैनेजमेंट सिस्टम नहीं लगाया है। जिला अस्पताल से निकलने वाला सारा कचरा कालोनी में जाने वाली सड़क के दक्षिण तरफ फेंक दिया जाता है। अधिक मात्रा में एकत्र हुए कचरे को वहीं पर खुले में जला दिया जाता है। इससे भीषण दुर्गंध अस्पताल और आस पास घंटों फैलती रहती हैं। भारी दुर्गंध सहित यह धुंआं इसान के स्वास्थ्य को अहुत अधिक नुकसान पहुंचाता है। इसी प्रकार महिला अस्पताल का कचरा पीपी सेंटर के पीछे फेंक दिया जाता है। उसके बगल में एक जूनियर हाई स्कूल संचालित होता है। इसकी दुर्गंध से नौनिहालों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। शहर के सहादतपुरा मुहल्ला में गाजीपुर तिराहे के पास संचालित एक हड्डी अस्पताल का चारा कचरा आम रास्ते के किनारे फेंका जाता है। इससे बगलसे गुजरने वाले राहगीरों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। यह कुछ बानगियां हैं। जिले के सारे छोटे बड़े नर्सिंग होम और सरकारी अस्पतालों में कचरा प्रबंधन का केेई इंतजाम नहीं हैं।इस बारे में हाई कोर्ट ने गंभीर रूख अपनाते हुए सरकार से जवाब तलब कियाहै। पूरे प्रदेश में केवल 17 काम नबायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम हैं। इस बाबत सीएमओ डा. एससी सिंह का कहना है कि सरकारी अस्पतालों से कचरा उठाने के लिए जिम्मेदार संस्था को नोटिस देकर सक्रिय किया जाएगा। नीजी अस्पतालों को भी बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम अपनाने को कहा जाएगा।
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