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ताड़क वध होते ही दर्शकों ने लगाया जयकारा
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बढुआगोदाम। परदहां ब्लाक के बहरीपुर गांव स्थित सिंधी बाबा की कुटी परिसर में चल रही पांच दिवसीय रामलीला के दूसरे दिन ताड़का वध, सुबाहु वध सहित विभिन्न लीला का मंचन किया गया। ताड़क वध होते ही दर्शकों के जयश्रीराम के उद्घोष से पंडाल गूंज उठा।
रामलीला मंचन में विश्वामित्र के साथ राम के वन में पहुंचने पर ऋषि की आज्ञा पर भगवान रा ताड़का का वध करते हैं। ताड़का वध के बाद राक्षस सुबाहु और मारीच युुद्ध के लिए आते हैं। युद्ध के दौरान श्रीराम मारीच को बाण चलाकर सौ योजन दूर लंका में फेंक देते हैं। सुबाहु श्रीराम के हाथों युद्ध में मारा जाता है। उधर, ऋषि विश्वामित्र को राजा जनक के यहां से सीता स्वयंवर में शामिल होने का निमंत्रण मिलता है। वह श्रीराम लक्ष्मण को लेकर जनक के यहां रवाना होते हैं। रास्ते में एक पत्थर की शिला दिखाई देती है, जिसके संबंध में विश्वामित्र बताते हैं कि वह गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या हैं, जो पति के श्राप से पत्थर बन गई हैं। श्रीराम के चरणों से पत्थर की अहिल्या महिला रूप में प्रकट होती है। वह श्रीराम को प्रणाम करके देव लोक चली जाती हैं। इस दौरान दुर्गा पांडेय, विक्की सिंह, कक्कू पांडेय, मनोज सिंह, डब्बू सिंह, विवेक सिंह आदि शामिल रहे।
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रामलीला मंचन में विश्वामित्र के साथ राम के वन में पहुंचने पर ऋषि की आज्ञा पर भगवान रा ताड़का का वध करते हैं। ताड़का वध के बाद राक्षस सुबाहु और मारीच युुद्ध के लिए आते हैं। युद्ध के दौरान श्रीराम मारीच को बाण चलाकर सौ योजन दूर लंका में फेंक देते हैं। सुबाहु श्रीराम के हाथों युद्ध में मारा जाता है। उधर, ऋषि विश्वामित्र को राजा जनक के यहां से सीता स्वयंवर में शामिल होने का निमंत्रण मिलता है। वह श्रीराम लक्ष्मण को लेकर जनक के यहां रवाना होते हैं। रास्ते में एक पत्थर की शिला दिखाई देती है, जिसके संबंध में विश्वामित्र बताते हैं कि वह गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या हैं, जो पति के श्राप से पत्थर बन गई हैं। श्रीराम के चरणों से पत्थर की अहिल्या महिला रूप में प्रकट होती है। वह श्रीराम को प्रणाम करके देव लोक चली जाती हैं। इस दौरान दुर्गा पांडेय, विक्की सिंह, कक्कू पांडेय, मनोज सिंह, डब्बू सिंह, विवेक सिंह आदि शामिल रहे।
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