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बड़रांव ब्लाक में गहराया पेयजल संकट
Updated Tue, 22 May 2018 11:08 PM IST
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बड़रांव ब्लाक क्षेत्र में पेयजल संकट गहरा गया है। लाखों की लागत से खोदे गए पोखरे शो पीस बने हैं। जबकि 150 हैंडपंप मामूली रूप से खराब पड़े हैं। गर्मी के चलते ब्लॉक में भूजल स्तर नीचे चला गया है। ऐसे में पानी के लिए हाहाकार मचा है। लोग पानी के लिए इधर से उधर भटक रहे हैं। हद यह है कि इंडिया मार्का हैंडपंपों से जहां पानी कम निकल रहा है तो वहीं कई गांवों में इंडिया मार्का हैंडपंप लगाए ही नहीं गए। इन्हें ठीक कराने के जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी सही तरीके से नहीं निभा रहे।
बड़रावं ब्लाक क्षेत्र में 72 ग्राम पंचायतें हैं। ब्लाक की जनसंख्या 1,89,920 है। पेयजल व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जल निगम की तरफ से 2673 हैंडपंप लगाए गए हैं। भूगर्भ जलस्तर नीचे खिसकने के चलते हैंडपंपों से नाम मात्र पानी निकल रहा है। प्रत्येक गांव में दो से तीन हैंडपंप मामूली रुप से खराब पड़े हैं। गांवों में खराब पड़े हैंडपंपों पर नजर डाला जाए तो चकभगवानदास, सुल्तानपुर, हनुमान नगर, भटमीला, मांदी सिपाह, चंद्रापार सहित विभिन्न गांवों में कुल 150 हैंडपंप मामूली रुप से खराब पड़े हैं। जबकि विभागीय अभिलेखों में मात्र 12 इंडिया मार्क हैंडपंपों को रिबोर कराने योग्य दिखाया गया है। जल संचयन के लिए मनरेगा से प्रत्येक गांवों में लाखों की लागत से पोखरों की खुदाई कराई गई है। लेकिन इनमें भी पानी नहीं है।
शासन की तरफ से खराब पड़े इंडिया मार्क टू हैंडपंपों को मरम्मत कराने तथा रिबोर कराने की जिम्मेदारी ग्रामसभाओं को सौंप दिया गया है। भीषण गर्मी के मौसम में भी संबंधित विभाग की तरफ से ठोस कार्ययोजना तैयार नहीं की जा सकी है। परेशान लोग ब्लाक से जिला मुख्यालय तक चक्कर लगाने को विवश हैं। क्षेत्र के रमेश राय, संजय सिंह, ज्ञानेश शुक्ल, अमरनाथ, विदेशी यादव का कहना है कि खंड विकास अधिकारी सहित प्रशासनिक अधिकारियों को हैंडपंपों की मरम्मत तथा रिबोर करने के लिए ज्ञापन सौंपा गया। इसके बावजूद पेयजल समस्या का समाधान नहीं किया जा सका है। समस्या का अविलंब समाधान नहीं किया गया तो वह आंदोलन को बाध्य हो जाएंगे।
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इस बाबत बड़रांव ब्लाक के एडीओ पंचायत अखिलेश मल्ल का कहना है कि हैंडपंपों के रिबोर का कार्य प्रारंभ हो चुका है। खराब पड़े हैंडपंपों को मरम्मत कराने के लिए निर्देश दिया गया है।
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बड़रावं ब्लाक क्षेत्र में 72 ग्राम पंचायतें हैं। ब्लाक की जनसंख्या 1,89,920 है। पेयजल व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जल निगम की तरफ से 2673 हैंडपंप लगाए गए हैं। भूगर्भ जलस्तर नीचे खिसकने के चलते हैंडपंपों से नाम मात्र पानी निकल रहा है। प्रत्येक गांव में दो से तीन हैंडपंप मामूली रुप से खराब पड़े हैं। गांवों में खराब पड़े हैंडपंपों पर नजर डाला जाए तो चकभगवानदास, सुल्तानपुर, हनुमान नगर, भटमीला, मांदी सिपाह, चंद्रापार सहित विभिन्न गांवों में कुल 150 हैंडपंप मामूली रुप से खराब पड़े हैं। जबकि विभागीय अभिलेखों में मात्र 12 इंडिया मार्क हैंडपंपों को रिबोर कराने योग्य दिखाया गया है। जल संचयन के लिए मनरेगा से प्रत्येक गांवों में लाखों की लागत से पोखरों की खुदाई कराई गई है। लेकिन इनमें भी पानी नहीं है।
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शासन की तरफ से खराब पड़े इंडिया मार्क टू हैंडपंपों को मरम्मत कराने तथा रिबोर कराने की जिम्मेदारी ग्रामसभाओं को सौंप दिया गया है। भीषण गर्मी के मौसम में भी संबंधित विभाग की तरफ से ठोस कार्ययोजना तैयार नहीं की जा सकी है। परेशान लोग ब्लाक से जिला मुख्यालय तक चक्कर लगाने को विवश हैं। क्षेत्र के रमेश राय, संजय सिंह, ज्ञानेश शुक्ल, अमरनाथ, विदेशी यादव का कहना है कि खंड विकास अधिकारी सहित प्रशासनिक अधिकारियों को हैंडपंपों की मरम्मत तथा रिबोर करने के लिए ज्ञापन सौंपा गया। इसके बावजूद पेयजल समस्या का समाधान नहीं किया जा सका है। समस्या का अविलंब समाधान नहीं किया गया तो वह आंदोलन को बाध्य हो जाएंगे।
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इस बाबत बड़रांव ब्लाक के एडीओ पंचायत अखिलेश मल्ल का कहना है कि हैंडपंपों के रिबोर का कार्य प्रारंभ हो चुका है। खराब पड़े हैंडपंपों को मरम्मत कराने के लिए निर्देश दिया गया है।