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अमन और भाईचारे का पैगाम देता है इस्लाम - ओबैदुल्लाह खान
Updated Tue, 20 Mar 2018 10:52 PM IST
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सिपाह इब्राहिमाबाद। कस्बे में सोमवार की रात एक जलसे का आयोजन किया गया। जिसमें उलेमाओं ने अपनी तकरीरों से अमन, भाईचारे एवं शांति का पैगाम दिया। मुख्य वक्ता के रूप में पूर्व राज्य सभा सदस्य मौलाना ओबैदुल्लाह खान आजमी ने कहा कि इस्लाम हमेशा अमन, भाईचारा और शांति का पैगाम देता रहा है। जो मुसलमान इस्लाम एवं रसूल के बताए रास्ते का पालन नहीं करता है, वही व्यक्ति परेशान रहता है।
मुख्य वक्ता ने अपने संबोधन में कहा कि कुरान शरीफ में साफ लिखा है कि अगर तुम्हारा पड़ोसी भूखा है तो तुम्हारा खाना हराम है, जो भाईचारे की एक मिसाल पेश करता है। वर्तमान में जो मुसलमान परेशान हाल हैं उनकी परेशानियों का कारण इस्लाम व रसूल के बताए गए रास्तों से भटकना ही है। मौलाना आजमी ने मुसलमानों से नमाज की पाबंदी बनाने की अपील करते हुए कहा कि नमाज इस्लाम की बुनियाद है, लेकिन आज का नौजवान इस बुनियाद को नहीं समझ पा रहा है। इसलिए इस बुनियाद को मजबूत करने की सख़्त जरूरत है। जलसे की शुरुआत हाफिज हैदर अली ने कुरान-ए- पाक की तिलावत से की, जबकि नातखां शोएब रजा(भदोही) और हाफिज अनवार अहमद (पूरा बंधुमल्ल) ने अपनी दिलकश आवाजों में नात पेश कर महफ़िल में चार चांद लगाया। मौलाना मुमताज अहमद की सरपरस्ती में हुए इस जलसे की सदारत मौलाना गुलाम रब्बानी व निजामत अमजद अली(देवरिया) ने की। जलसे में सफीउल्लाह अंसारी, मौलाना हिसामुद्दीन, रियाजुद्दीन, इम्तेयाज भारती, आफताब आलम सहित अन्य मौजूद रहे।
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मुख्य वक्ता ने अपने संबोधन में कहा कि कुरान शरीफ में साफ लिखा है कि अगर तुम्हारा पड़ोसी भूखा है तो तुम्हारा खाना हराम है, जो भाईचारे की एक मिसाल पेश करता है। वर्तमान में जो मुसलमान परेशान हाल हैं उनकी परेशानियों का कारण इस्लाम व रसूल के बताए गए रास्तों से भटकना ही है। मौलाना आजमी ने मुसलमानों से नमाज की पाबंदी बनाने की अपील करते हुए कहा कि नमाज इस्लाम की बुनियाद है, लेकिन आज का नौजवान इस बुनियाद को नहीं समझ पा रहा है। इसलिए इस बुनियाद को मजबूत करने की सख़्त जरूरत है। जलसे की शुरुआत हाफिज हैदर अली ने कुरान-ए- पाक की तिलावत से की, जबकि नातखां शोएब रजा(भदोही) और हाफिज अनवार अहमद (पूरा बंधुमल्ल) ने अपनी दिलकश आवाजों में नात पेश कर महफ़िल में चार चांद लगाया। मौलाना मुमताज अहमद की सरपरस्ती में हुए इस जलसे की सदारत मौलाना गुलाम रब्बानी व निजामत अमजद अली(देवरिया) ने की। जलसे में सफीउल्लाह अंसारी, मौलाना हिसामुद्दीन, रियाजुद्दीन, इम्तेयाज भारती, आफताब आलम सहित अन्य मौजूद रहे।
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