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साइनबोर्ड लगाने में खेल, अधिकांश गांवों में नहीं लग रहा साइनबोर्ड
Updated Wed, 07 Feb 2018 11:32 PM IST
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मऊ। जिले के विभिन्न गांवों में जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत लाखों की लागत से विकास कार्य कराए जा रहे हैं। लेकिन साइनबोर्ड न लगाए जाने से लोगों को लागत की जानकारी नहीं मिल पा रही है। जबकि साइनबोर्ड के नाम पर लगभग चार हजार रुपया का भुगतान भी करा लिया जा रहा है। ग्रामीणों ने विभागीय अधिकारियों को शिकायती पत्र भी दिया बावजूद मामले को गंभीरता से नहीं लिया जा सका है।
जिले में 684 ग्राम पंचायतें हैं। मनरेगा, चौदहवां राज्य वित्त सहित विभिन्न योजनाओं के तहत गांवों में लाखों की लागत से इंटरलाकिंग, खड़ंजा, मिट्टी कार्य, सड़क आदि कार्य कार्य कराया जाना है। निर्माण कार्य के पूर्व साइनबोर्ड लगाया जाने का प्रावधान किया गया है। लेकिन विभागीय अधिकारियों तथा ग्राम प्रधानों की मिलीभगत के चलते अधिकांश गांवों में निर्माण कार्य पूरा कराकर भुगतान भी करा लिया जा रहा है, लेकिन साइनबोर्ड कहीं नहीं दिख रहा है। जबकि प्रति साइनबोर्ड के नाम पर 3500 रुपये का भुगतान भी करा लिया गया है। ग्रामीणों की मानें तो साइनबोर्ड के लगने से विकास कार्यो की लागत, दूरी आदि का पता नहीं चल पा रहा है। महीनों पूर्व रतनपुरा ब्लाक क्षेत्र के नगवां गांव में लगभग लाखों की लागत से दर्जनों विकास कार्य कराए गए थे। कहीं पर साइनबोर्ड नहीं लगाए गए थे। जबकि 30 लाख साइनबार्ड के नाम पर भुगतान करा लिया गया था। खंड विकास अधिकारी रतनपुरा की तरफ से लोहे के साइनबोर्ड के स्थान पर सीमेंटेड साइनबोर्ड लगाने का फरमान जारी किया गया। इसके बाद भी गांवों में साइनबोर्ड नहीं लग रहा है। कोपागंज संवाददाता के अनुसार ब्लाक क्षेत्र के अधिकांश गांवों में लाखों की लागत से खड़ंजा, इंटरलाकिंग, सड्क आदि कार्य कराए जा रहे हैं, लेकिन साइनबोर्ड नहीं लगाए जा रहे हैं। जबकि साइनबोर्ड के नाम पर भुगतान करा लिया जा रहा है। इस संबंध में रामकुमार सिंह, शिवबचन यादव, जर्नादन प्रसाद का कहना है कि गांवों में लाखों की लागत से विकास कार्य कराया जा रहा है, लेकिन साइनबोर्ड न लगने से गोलमाल कर दिया जा रहा है। साइनबोर्ड लगाए जाने के लिए आला अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा गया बावजूद जांच तक नहीं की जा सकी है। मधुबन संवाददाता के अनुसार फतहपुर मंडाव ब्लाक क्षेत्र में 82 ग्राम पंचायत हैं। गांवों में लाखों की लागत से विकास कार्य कराए जा रहे हैं, लेकिन साइनबोर्ड कहीं नहीं दिख रहे हैं। इस बाबत परियोजना निदेशक वीवी सिंह का कहना है कि मामला संज्ञान में नहीं आया है। शिकायत मिलने पर जांच कराई जाएगी। जांच में दोषी पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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जिले में 684 ग्राम पंचायतें हैं। मनरेगा, चौदहवां राज्य वित्त सहित विभिन्न योजनाओं के तहत गांवों में लाखों की लागत से इंटरलाकिंग, खड़ंजा, मिट्टी कार्य, सड़क आदि कार्य कार्य कराया जाना है। निर्माण कार्य के पूर्व साइनबोर्ड लगाया जाने का प्रावधान किया गया है। लेकिन विभागीय अधिकारियों तथा ग्राम प्रधानों की मिलीभगत के चलते अधिकांश गांवों में निर्माण कार्य पूरा कराकर भुगतान भी करा लिया जा रहा है, लेकिन साइनबोर्ड कहीं नहीं दिख रहा है। जबकि प्रति साइनबोर्ड के नाम पर 3500 रुपये का भुगतान भी करा लिया गया है। ग्रामीणों की मानें तो साइनबोर्ड के लगने से विकास कार्यो की लागत, दूरी आदि का पता नहीं चल पा रहा है। महीनों पूर्व रतनपुरा ब्लाक क्षेत्र के नगवां गांव में लगभग लाखों की लागत से दर्जनों विकास कार्य कराए गए थे। कहीं पर साइनबोर्ड नहीं लगाए गए थे। जबकि 30 लाख साइनबार्ड के नाम पर भुगतान करा लिया गया था। खंड विकास अधिकारी रतनपुरा की तरफ से लोहे के साइनबोर्ड के स्थान पर सीमेंटेड साइनबोर्ड लगाने का फरमान जारी किया गया। इसके बाद भी गांवों में साइनबोर्ड नहीं लग रहा है। कोपागंज संवाददाता के अनुसार ब्लाक क्षेत्र के अधिकांश गांवों में लाखों की लागत से खड़ंजा, इंटरलाकिंग, सड्क आदि कार्य कराए जा रहे हैं, लेकिन साइनबोर्ड नहीं लगाए जा रहे हैं। जबकि साइनबोर्ड के नाम पर भुगतान करा लिया जा रहा है। इस संबंध में रामकुमार सिंह, शिवबचन यादव, जर्नादन प्रसाद का कहना है कि गांवों में लाखों की लागत से विकास कार्य कराया जा रहा है, लेकिन साइनबोर्ड न लगने से गोलमाल कर दिया जा रहा है। साइनबोर्ड लगाए जाने के लिए आला अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा गया बावजूद जांच तक नहीं की जा सकी है। मधुबन संवाददाता के अनुसार फतहपुर मंडाव ब्लाक क्षेत्र में 82 ग्राम पंचायत हैं। गांवों में लाखों की लागत से विकास कार्य कराए जा रहे हैं, लेकिन साइनबोर्ड कहीं नहीं दिख रहे हैं। इस बाबत परियोजना निदेशक वीवी सिंह का कहना है कि मामला संज्ञान में नहीं आया है। शिकायत मिलने पर जांच कराई जाएगी। जांच में दोषी पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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