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24 घंटे में घाघरा का जलस्तर 26 सेमी घटा
Updated Thu, 07 Sep 2017 11:15 PM IST
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दोहरीघाट। दोहरीघाट में घाघरा का जलस्तर तेजी से घटने लगा है।गुरुवार को नदी के जलस्तर में 26 सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई।घाघरा के उफान में कमी होने के कारण लोगों ने राहत की सांस ली है। हालांकि नदी के घटने के बावजूद कटान का खतरा अभी बरकरार है। गुरुवार को घाघरा खतरे के निशान से 53 सेमी नीचे बह रही है।
जानकारों का मानना है कि नदी जिस तरह से घट रही है इससे लगता है कि दो एक दिन में नदी का जलस्तर काफी नीचे चला जायेगा। हालांकि इससे पूर्व भी नदी का जलस्तर दो बार घट चुका है। जलस्तर घटने के बाद फिर से नदी में दो बार उफान आ चुका है। नदी के जलस्तर ने वर्ष1998 के रेकार्ड को भी पीछे छोड़ दिया। नदी के पिछले रिकार्ड को देखते हुए निश्चित रूप से कुछ भी नहीं कहा जा सकता है।
दोहरीघाट के गौरीशंकर घाट पर घाघरा का जलस्तर गुरुवार को 69.37 मीटर रहा। जबकि 24 घंटे पूर्व बुधवार को जलस्तर 69.63 मीटर था।इस तरह 24 घंटे में जलस्तर 26 सेमी घट गया ।यहां पर खतरे का निशान 69.90 मीटर है। हालांकि अभी भी नगर की ऐतिहासिक धरोहरें खतरे की जद में है। नदी का स्तर घटने के साथ ही किनारों पर सड़ांध और दुर्गंध का आलम है।तटवर्ती गांवों में इन दिनों तेजी से वायरल फीवर , सर्दी बुखार और पेट संबंधी बीमारियों की चपेट में लोग आ रहे हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की टीमों को इन गांवों के दौरे कर क्लोरीन सहित आवश्यक दवाओं के वितरण के लिए लगाया गया है। लेकिन गांववासियों की शिकायत है कि स्वास्थ्य टीमें सभी गांवों में पहुंच नहीं पा रही हैं।
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जानकारों का मानना है कि नदी जिस तरह से घट रही है इससे लगता है कि दो एक दिन में नदी का जलस्तर काफी नीचे चला जायेगा। हालांकि इससे पूर्व भी नदी का जलस्तर दो बार घट चुका है। जलस्तर घटने के बाद फिर से नदी में दो बार उफान आ चुका है। नदी के जलस्तर ने वर्ष1998 के रेकार्ड को भी पीछे छोड़ दिया। नदी के पिछले रिकार्ड को देखते हुए निश्चित रूप से कुछ भी नहीं कहा जा सकता है।
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दोहरीघाट के गौरीशंकर घाट पर घाघरा का जलस्तर गुरुवार को 69.37 मीटर रहा। जबकि 24 घंटे पूर्व बुधवार को जलस्तर 69.63 मीटर था।इस तरह 24 घंटे में जलस्तर 26 सेमी घट गया ।यहां पर खतरे का निशान 69.90 मीटर है। हालांकि अभी भी नगर की ऐतिहासिक धरोहरें खतरे की जद में है। नदी का स्तर घटने के साथ ही किनारों पर सड़ांध और दुर्गंध का आलम है।तटवर्ती गांवों में इन दिनों तेजी से वायरल फीवर , सर्दी बुखार और पेट संबंधी बीमारियों की चपेट में लोग आ रहे हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की टीमों को इन गांवों के दौरे कर क्लोरीन सहित आवश्यक दवाओं के वितरण के लिए लगाया गया है। लेकिन गांववासियों की शिकायत है कि स्वास्थ्य टीमें सभी गांवों में पहुंच नहीं पा रही हैं।
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