{"_id":"5c6c4532bdec22108404cd77","slug":"181550599474-mau-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सार्वजनिक पोखरियों को संरक्षित करने की नहीं हो रही कवायद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सार्वजनिक पोखरियों को संरक्षित करने की नहीं हो रही कवायद
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी नगर सहित जिले के विभिन्न ग्रामीण इलाकों की सार्वजनिक पोखरियों को संरक्षित करने की कोई कवायद नहीं की जा सकी है। अधिकांश पोखरे अभी तक अतिक्रमण की जद में हैं। तमसा नदी जोन, घोसी तहसील का सीता कुंड पोखरा, चेरु वंश का किला, ऐतिहासिक स्थल गढ़वा कोट अभी तक अतिक्रमणमुुक्त नहीं हो सके। केवल नोटिस जारी कर इतिश्री कर ली गई है।
जिले के राजस्व विभाग के अभिलेखों में जिले में 5846 सार्वजनिक तालाब, झील, बहानाला आदि दर्ज हैं। कोर्ट के आदेेश के बाद भी सार्वजनिक पोखरियों को संरक्षित करना तो दूर अभी तक अतिक्रमण तक नहीं हटवाया जा सका है। हालत यह है कि नगर के तमसा तट, जिला अस्पताल के सामने सार्वजनिक पोखरा, घोसी तहसील मुख्यालय स्थित सीता कुंड पोखरा, मधुबन, मुहम्मदाबाद गोहना तहसील स्थित ऐतिहासिक स्थल गढ़वा कोट, तमसा नदी आदि महत्वपूर्ण सार्वजनिक पोखरों का अस्तित्व खत्म होने के कगार है। ग्रामीणों की मानें तो अधिकांश अतिक्रमण की जद में हैं। शासन की तरफ से अतिक्रमण हटवाने के लिए फरमान जारी किया गया है, लेकिन संबंधित विभाग की तरफ से अभी तक तमसा नदी जोन सहित बड़े अतिक्रमण को हटाने के लिए ठोस कदम तक नहीं उठाया जा सका है। केवल कुछ ही जगहों की सार्वजनिक पोखरियों से अतिक्रमण हटवाकर इतिश्री कर लिया।मुहम्मदाबाद गोहना ब्लाक के भतड़ी चक भतड़ी गांव में ऐतिहासिक स्थल गढ़वा कोट 66 बीघा क्षेत्रफल के सापेक्ष लगभग 15 बीघा तक आ गया है। सार्वजनिक पोखरों से अतिक्रमण हटवाने के लिए गांव बचाओ मोर्चा के पदाधिकारियों ने एक महीना तक आंदोलन भी किया, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।इस संबंध में नगरपालिका के पूर्व सभासद छोटेलाल गांधी का कहना है कि प्रशासनिक उदासीनता के चलते सरकारी अभिलेेेखों में दर्ज सार्वजनिक पोखरों, तमसा नदी जोन में अतिक्रमण तेजी से हो रहा है। नगर की 100 से अधिक पोखरियों का अस्तित्व ही मिट गया है। इसके चलते भूगर्भजलस्तर तेजी से नीचे खिसक रहा है। शिकायत के बाद भी अतिक्रमण को हटवाया नहीं जा सका है। इस बाबत अपर जिलाधिकारी डीपी पाल का कहना है कि नदी, सार्वजनिक पोखरों पर किए गए अतिक्रमण को हटवाने के लिए सभी उपजिलाधिकारी को निर्देश दे दिया गया है।
विज्ञापन
जिले के राजस्व विभाग के अभिलेखों में जिले में 5846 सार्वजनिक तालाब, झील, बहानाला आदि दर्ज हैं। कोर्ट के आदेेश के बाद भी सार्वजनिक पोखरियों को संरक्षित करना तो दूर अभी तक अतिक्रमण तक नहीं हटवाया जा सका है। हालत यह है कि नगर के तमसा तट, जिला अस्पताल के सामने सार्वजनिक पोखरा, घोसी तहसील मुख्यालय स्थित सीता कुंड पोखरा, मधुबन, मुहम्मदाबाद गोहना तहसील स्थित ऐतिहासिक स्थल गढ़वा कोट, तमसा नदी आदि महत्वपूर्ण सार्वजनिक पोखरों का अस्तित्व खत्म होने के कगार है। ग्रामीणों की मानें तो अधिकांश अतिक्रमण की जद में हैं। शासन की तरफ से अतिक्रमण हटवाने के लिए फरमान जारी किया गया है, लेकिन संबंधित विभाग की तरफ से अभी तक तमसा नदी जोन सहित बड़े अतिक्रमण को हटाने के लिए ठोस कदम तक नहीं उठाया जा सका है। केवल कुछ ही जगहों की सार्वजनिक पोखरियों से अतिक्रमण हटवाकर इतिश्री कर लिया।मुहम्मदाबाद गोहना ब्लाक के भतड़ी चक भतड़ी गांव में ऐतिहासिक स्थल गढ़वा कोट 66 बीघा क्षेत्रफल के सापेक्ष लगभग 15 बीघा तक आ गया है। सार्वजनिक पोखरों से अतिक्रमण हटवाने के लिए गांव बचाओ मोर्चा के पदाधिकारियों ने एक महीना तक आंदोलन भी किया, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।इस संबंध में नगरपालिका के पूर्व सभासद छोटेलाल गांधी का कहना है कि प्रशासनिक उदासीनता के चलते सरकारी अभिलेेेखों में दर्ज सार्वजनिक पोखरों, तमसा नदी जोन में अतिक्रमण तेजी से हो रहा है। नगर की 100 से अधिक पोखरियों का अस्तित्व ही मिट गया है। इसके चलते भूगर्भजलस्तर तेजी से नीचे खिसक रहा है। शिकायत के बाद भी अतिक्रमण को हटवाया नहीं जा सका है। इस बाबत अपर जिलाधिकारी डीपी पाल का कहना है कि नदी, सार्वजनिक पोखरों पर किए गए अतिक्रमण को हटवाने के लिए सभी उपजिलाधिकारी को निर्देश दे दिया गया है।
विज्ञापन