{"_id":"5c6eea06bdec2273ab607bac","slug":"171550772742-mau-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"साहित्यकारों ने डॉ. नामवर को किया याद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
साहित्यकारों ने डॉ. नामवर को किया याद
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राहुल सांकृत्यायन सृजन के तत्वावधान में शहर के निजामुद्दीनपुरा मुहल्ला में डॉ. जयप्रकाश धूमकेतु के अवास पर बुधवार की शाम को साहित्यकारों की ओर से श्रद्धांजलि गोष्ठी हुई। गोष्ठी में साहित्यकारों, समाजसेवियों, बुद्धिजीवियों और चिंतकों ने प्रख्यात समालोचक प्रो. नामवर सिंह के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धा सुमन अर्पित किया। युवा आलोचक डॉ. संजय राय ने कहा कि अब आलोचना के क्षेत्र में नामवर सिंह
की कमी खटकती रहेगी। डॉ. संतोष कुमार सिंह ने कहा कि नामवर जी की सोच मेहनतकश और संघर्षशील लोगों के पक्ष में थी। वीरेंद्र कुमार ने कहा कि नामवर जी नयी पीढ़ी के लिये प्रेरणादायी थे। अरविंद मूर्ति ने नामवर जी के साथ अपने निजी अनुभवों को बांटते हुये कई प्रसंग सुनाया। सत्यप्रकाश सिंह एडवोकेट और कवि राघवेन्द्र सिंह ने कहा कि नामवर जी व्यक्तित्व में राहुल सांस्कृत्यायन की तो कृतित्व में कबीर की याद दिलाते हैं। संचालक डॉ. जयप्रकाश धूमकेतु ने कहा कि नामवर जी हिंदी समालोचना के सशक्त स्तंभ थे। 14 अप्रैल 2013 को मऊ में आए डॉ. नामवर सिंह ने राहुल सांकृत्यायन सृजन पीठ भवन के शिलान्यास करते हुए कहा था कि शिलान्यास बहुत होते हैं, पर इमारतें कम बन पाती हैं लेकिन मरी इच्छा है कि राहुल सांकृत्यायन सृजन पीठ पुस्तकालय भवन के लोकार्पण में भी मैं मऊ आ सकूं। अब यह भवन तो तैयार हो गया है लेकिन इसका लोकार्पण करने से पहले ही डॉ. नामवर इस संसार को अलविदा कह गए। इस अवसर पर रामअवतार सिंह, रेहान, अजीम खां, बृजेश गिरि, हबीबुर्रहमान, का. जलीस, का. शमसुल हक चौधरी, गिरीश चंद मासूम, जितेन्द्र मिश्र ‘काका’, जितेन्द्र मालवीय, नागेन्द्र सिंह बागी आदि ने अपने विचार व्यक्त किए।
विज्ञापन
की कमी खटकती रहेगी। डॉ. संतोष कुमार सिंह ने कहा कि नामवर जी की सोच मेहनतकश और संघर्षशील लोगों के पक्ष में थी। वीरेंद्र कुमार ने कहा कि नामवर जी नयी पीढ़ी के लिये प्रेरणादायी थे। अरविंद मूर्ति ने नामवर जी के साथ अपने निजी अनुभवों को बांटते हुये कई प्रसंग सुनाया। सत्यप्रकाश सिंह एडवोकेट और कवि राघवेन्द्र सिंह ने कहा कि नामवर जी व्यक्तित्व में राहुल सांस्कृत्यायन की तो कृतित्व में कबीर की याद दिलाते हैं। संचालक डॉ. जयप्रकाश धूमकेतु ने कहा कि नामवर जी हिंदी समालोचना के सशक्त स्तंभ थे। 14 अप्रैल 2013 को मऊ में आए डॉ. नामवर सिंह ने राहुल सांकृत्यायन सृजन पीठ भवन के शिलान्यास करते हुए कहा था कि शिलान्यास बहुत होते हैं, पर इमारतें कम बन पाती हैं लेकिन मरी इच्छा है कि राहुल सांकृत्यायन सृजन पीठ पुस्तकालय भवन के लोकार्पण में भी मैं मऊ आ सकूं। अब यह भवन तो तैयार हो गया है लेकिन इसका लोकार्पण करने से पहले ही डॉ. नामवर इस संसार को अलविदा कह गए। इस अवसर पर रामअवतार सिंह, रेहान, अजीम खां, बृजेश गिरि, हबीबुर्रहमान, का. जलीस, का. शमसुल हक चौधरी, गिरीश चंद मासूम, जितेन्द्र मिश्र ‘काका’, जितेन्द्र मालवीय, नागेन्द्र सिंह बागी आदि ने अपने विचार व्यक्त किए।
विज्ञापन