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मिटने के कगार पर है छोटी सरयू नदी का अस्तित्व
Updated Tue, 05 Jun 2018 12:20 AM IST
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कोपागंज। स्थानीय ब्लाक क्षेत्र से गुजर रही छोटी सरयू नदी का क्षेत्रफल लगातार सिमटता जा रहा है। सफाई न होने से नदी का प्रवाह थम सा गया है। आजमगढ़ के लाटघाट से शुरू हुआ 59 किमी का सफर तय करते करते नगर की तलहटी में प्रवाहित तमसा तक आते-आते नदी का पानी काला पड़ जाता है। नदी का अस्तित्व मिटने के कगार पर पहुंच गया है। सब कुछ जानकर विभागीय अधिकारी मौन हैं।
अंबेडकर नगर जिले से निकली छोटी सरयू नदी आजमगढ के विभिन्न इलाकों से होते हुए बड़गांव ब्लाक क्षेत्र से होते हुए कोपागंज ब्लाक के सहरोज गांव के पास टौंस नदी में मिल गई है। एक जमाना था कोपागंज ब्लाक क्षेत्र के सिंचाई का एकमात्र साधन छोटी सरयू नदी थी। सैकड़ों गांव के लोग पेयजल के लिए भी इसी पर निर्भर थे। यहीं, नहीं हजारों वन्यजीवों की प्यास बुझाने का एक मात्र साधन थी। कहीं-कहीं नदी का पानी इतना प्रदूषित तथा जहरीला हो गया है कि पशु भी इसका पानी पीने से कतराते हैं। क्षेत्र के सुरेश, दुर्गेश, राजू, नंदलाल, सुखिया का कहना है कि छोटी सरयू नदी का अस्तित्व मिटने की कगार पर है, लेकिन प्रशासन की ओर से नदी को बचाने की दिशा में ठोस कार्य योजना तक नहीं बनाई जा सकी है। नदी में पानी न आने से लोगों को दुश्वारियां झेलनी पड़ रही है। आजमगढ़ जिले के महुआ गढ़वल रेगुलेटर से समय-समय पर पानी छोड़ा जाता, तो नदी का अस्तित्व बचा रहता। नदी अतिक्रमण के जद में आ रही है। ऐसे में नदी की खुदाई कराकर पानी छोड़ा जाना चाहिए।
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अंबेडकर नगर जिले से निकली छोटी सरयू नदी आजमगढ के विभिन्न इलाकों से होते हुए बड़गांव ब्लाक क्षेत्र से होते हुए कोपागंज ब्लाक के सहरोज गांव के पास टौंस नदी में मिल गई है। एक जमाना था कोपागंज ब्लाक क्षेत्र के सिंचाई का एकमात्र साधन छोटी सरयू नदी थी। सैकड़ों गांव के लोग पेयजल के लिए भी इसी पर निर्भर थे। यहीं, नहीं हजारों वन्यजीवों की प्यास बुझाने का एक मात्र साधन थी। कहीं-कहीं नदी का पानी इतना प्रदूषित तथा जहरीला हो गया है कि पशु भी इसका पानी पीने से कतराते हैं। क्षेत्र के सुरेश, दुर्गेश, राजू, नंदलाल, सुखिया का कहना है कि छोटी सरयू नदी का अस्तित्व मिटने की कगार पर है, लेकिन प्रशासन की ओर से नदी को बचाने की दिशा में ठोस कार्य योजना तक नहीं बनाई जा सकी है। नदी में पानी न आने से लोगों को दुश्वारियां झेलनी पड़ रही है। आजमगढ़ जिले के महुआ गढ़वल रेगुलेटर से समय-समय पर पानी छोड़ा जाता, तो नदी का अस्तित्व बचा रहता। नदी अतिक्रमण के जद में आ रही है। ऐसे में नदी की खुदाई कराकर पानी छोड़ा जाना चाहिए।
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