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शिकस्ता मां का जनाजा है सामने ...
Updated Tue, 20 Feb 2018 11:12 PM IST
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घोसी। नगर के बड़ागांव शिया मोहल्ला स्थित मदरसा हुसैनिया से मंगलवार को जुलूसे अजाए फतमियां निकाला गया। जुलूस परंपरागत रास्तो से होता हुआ राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित सदर इमाम बारगाह पर दफन हुआ।
इस अवसर पर मौलाना फ़जले मुमताज खान साहब कहा कि यह जुलूस पैगंबरे इस्लाम की बेटी और हजरत अली की पत्नी हजरत फ़ातिमा जहरा की शहादत की याद में निकला जाता है। कहा कि पैग़ंबरे इस्लाम की वफात के बाद हजरत फ़ातिमा जहरा 95 दिनों तक जीवित रहीं। जब तक बीबी जिंदा रहीं जिबरईले अमीन रोज आके बीबी को तसल्ली दिया करते थे। बीबी जिस दरख़्त के नीचे बैठ कर अपने बाबा को याद करके रोया करती थी, जालिमों ने वह दरख़्त काट दिया। इस अवसर पर अंजुमन इमामिया, अंजुमन सज्जादिया, अंजुमन मसूमिया, अंजुमन तंजीमुल हुसैनी, अंजुमन मसूमिया क़दीम, अंजुमन हुसैनी मिशन, अंजुमन मसूमिया, दस्ता मसूमिया, एवं अंजुमन गुलाजरे हुसैनी पुरामारूफ़, अंजुमन जाफ़रिया कोपागंज ने नौहा पढ़ा पहलू शिकस्ता मां का जनाजा है सामने
उजड़ा हुआ फिर आज मदीना है सामने जिसे सुनकर लोगों की आंखें नम हो गईं । इस अवसर पर मौलना शफ़क़त तक़ी, मौलाना नसीमुल हसन, मौलाना मसूदुल हसन, मौलाना मोहम्मद कामिल, अलमदार हुसैन, काजिम नासरी , मजहर हुसैन, शमीम हैदर, वसीउल हसन, आसिफ अली, मजाहिर हुसैन, शहादत हुसैन, जाफर हुसैन नजफी, ग़ुलाम अली, नूर मोहम्मद मोबारक हुसैन, फैजान सरवर, तफहीम हैदर, अहमद औन, अली रजा आदि मौजूद रहे।
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इस अवसर पर मौलाना फ़जले मुमताज खान साहब कहा कि यह जुलूस पैगंबरे इस्लाम की बेटी और हजरत अली की पत्नी हजरत फ़ातिमा जहरा की शहादत की याद में निकला जाता है। कहा कि पैग़ंबरे इस्लाम की वफात के बाद हजरत फ़ातिमा जहरा 95 दिनों तक जीवित रहीं। जब तक बीबी जिंदा रहीं जिबरईले अमीन रोज आके बीबी को तसल्ली दिया करते थे। बीबी जिस दरख़्त के नीचे बैठ कर अपने बाबा को याद करके रोया करती थी, जालिमों ने वह दरख़्त काट दिया। इस अवसर पर अंजुमन इमामिया, अंजुमन सज्जादिया, अंजुमन मसूमिया, अंजुमन तंजीमुल हुसैनी, अंजुमन मसूमिया क़दीम, अंजुमन हुसैनी मिशन, अंजुमन मसूमिया, दस्ता मसूमिया, एवं अंजुमन गुलाजरे हुसैनी पुरामारूफ़, अंजुमन जाफ़रिया कोपागंज ने नौहा पढ़ा पहलू शिकस्ता मां का जनाजा है सामने
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उजड़ा हुआ फिर आज मदीना है सामने जिसे सुनकर लोगों की आंखें नम हो गईं । इस अवसर पर मौलना शफ़क़त तक़ी, मौलाना नसीमुल हसन, मौलाना मसूदुल हसन, मौलाना मोहम्मद कामिल, अलमदार हुसैन, काजिम नासरी , मजहर हुसैन, शमीम हैदर, वसीउल हसन, आसिफ अली, मजाहिर हुसैन, शहादत हुसैन, जाफर हुसैन नजफी, ग़ुलाम अली, नूर मोहम्मद मोबारक हुसैन, फैजान सरवर, तफहीम हैदर, अहमद औन, अली रजा आदि मौजूद रहे।
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