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जिले में 163 औद्योगिक इकाइयां ठप, नए उद्यमियों को नहीं रहे प्लाट

Mon, 08 Feb 2021 11:02 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 08 Feb 2021 11:02 PM IST
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163 industrial units in the district stalled, new entrepreneurs no longer plot
गर के सहादतपुरा में बंद पड़ी स्वदेशी काटन मिल। - फोटो : MAU
मऊ। जिले के चार औद्योगिक आस्थानों में स्थापित 291 औद्योगिक इकाइयों में 128 ही चल रही हैं और 163 बंद हैं। वहीं नए उद्यमियों को यूनिट स्थापित करने के लिए प्लाट नहीं मिल पा रहे हैं। स्थिति यह है कि बंद पड़ी ईकाइयां न तो चालू हो पा रही हैं और न ही इसका कोई समाधान हो रहा है। बंद पड़ी इकाइयां अगर चालू या नए उद्यम स्थापित हो तो रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और काम के लिए युवाओं को गैर प्रांतों की तरफ रुख नहीं करना पड़ेगा।
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सरकार बीमार तथा बंद औद्योगिक इकाइयों को चलाने की कवायद कर रही है। जिले में ताजोपुर, सहादतपुरा, घोसी और गरथौली औद्योगिक क्षेत्र में कुल 291 औद्योगिक इकाइयां स्थापित हैं। वर्तमान में 128 यूनिटें संचालित हैं जबकि 163 इकाइयां बंद चल रही हैं। दशकों से परदहां काटन मिल तथा स्वदेशी काटन मिल बंद चल रही है। परदहां काटन मिल की स्थापना 1976 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने की थी। उस जमाने में इस मिल की लागत छह करोड़ आई थी। इस मिल में स्थायी और अस्थायी पांच हजार मजदूर कार्य करते थे। इसी प्रकार जयपुरिया के हाथों स्थापित स्वदेशी काटन मिल को वर्ष 1977 में केंद्र सरकार ने अधिगृहित किया था। इसमें भी लगभग 500 मजदूर काम करते थे। दोनों मिलों से बनने वाले धागों की खरीदारी भी यहीं के बुनकर करते थेे। दोनों मिलों के बंद होने से अब बुनकर दूसरे मिलों से धागे मंगाते है। यदि दोनों मिलें चालू हो जाएं तो युवाओं को रोजगार मिलेगा और बुनकरों को सस्ते दर पर धागे उपलब्ध होंगे। इन मिलों को चालू कराने के लिए कई बार जिला प्रशासन की तरफ से संपत्ति का आकलन किया जा चुका है लेकिन मामला शासन स्तर पर लंबित है।
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कोट
बंद चल रही परदहां स्पीनिंग मिल तथा स्वदेशी काटन मिल का मामला शासन स्तर पर लंबित है। औद्योगिक आस्थान में बंद पड़ी इकाइयों को चलाने की जिम्मेदारी उद्यमियों की है। जल्द ही उद्योग बंधुओं की बैठक बुलाई जाएगी।- सगीर अहमद, सहायक आयुक्त, जिला उद्योग केंद्र
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बंद यूनिटें आवास और गोदाम में तब्दील
मऊ। जिले के ताजोपुर, सहादतपुरा, घोसी और गरथौली औद्योगिक क्षेत्र में 291 यूनिटें लगी हैं। वर्तमान में 128 यूनिटें संचालित हैं। बंद पड़ी 163 यूनिटों के भवन आवास और गोदाम में तब्दील हो गए हैं जो कि नियम के विपरीत है। इसकी जानकारी होने के बाद भी संबंधित अधिकारियों की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जा रही है। बंद पड़ी यूनिटों के उद्यमियों को कई बार नोटिस जारी किया गया लेकिन न तो उद्योग शुरू हुए और न ही दूसरे को भूखंड आवंटित किया जा सका।
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