{"_id":"5b1ac58e4f1c1bf76e8b700f","slug":"161528481166-mau-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"औरतें भी बैठती हैं एतेकाफ में","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
औरतें भी बैठती हैं एतेकाफ में
Updated Fri, 08 Jun 2018 11:36 PM IST
विज्ञापन
रमजान के आखिरी अशरे में किसी एक जगह एकांत में बैठ कर खुदा की इबादत करने को एतिकाफ कहा जाता है। एतिकाफ पर मर्द और औरत दोनों बैठ सकते हैं। मर्द मस्जिद में एतिकाफ अदा करते हैं जबकि औरतों को घर में एकांत जगह पर इबादत करने का हुक्म है। यानी घर का वो हिस्सा जिसे पांच वक्त की नमाज के लिए मुकर्रर कर रखा हो।
मौलवी फरीदुलहक ने बताया कि यदि घर में नमाज के लिए कोई खास जगह मुकर्रर न हो तो जिन औरतों को एतिकाफ करना हो तो वह घर में कोई जगह खास करके उसको मस्जिद मानकर एतिकाफ कर सकती हैं। वो जगह उनके लिए मस्जिद के हुक्म में होगी। बिना जरूरत के उस जगह को न छोड़ा जाए। औरतों को भी एतिकाफ का एहतेमाम करना चाहिए। क्योंकि पैगंबरे इस्लाम हजरत मुहम्मद की वफात के बाद आपकी बीबीयों ने अपने कमरों में एतिकाफ किया था।
बताया कि एतिकाफ का सबसे बड़ा मकसद, शबेकद्र की तलाश है। इस लिए इसकी खास जगह आखिरी अशरे को बनाया गया है। क्योंकि इसी अशरे में (21, 23, 25, 29) में शबे कदर का पाया जाना मुमकिन है। एतिकाफ करने वाला गोया अल्लाह से एतेजाज कर रहा है कि जब तक मेरी मांग पूरी नहीं होगी, मै एतिकाफ पर रहूंगा। ऐसे में वह बंदा अल्लाह के नजदीक बेहद महबूब हो जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
मौलवी फरीदुलहक ने बताया कि यदि घर में नमाज के लिए कोई खास जगह मुकर्रर न हो तो जिन औरतों को एतिकाफ करना हो तो वह घर में कोई जगह खास करके उसको मस्जिद मानकर एतिकाफ कर सकती हैं। वो जगह उनके लिए मस्जिद के हुक्म में होगी। बिना जरूरत के उस जगह को न छोड़ा जाए। औरतों को भी एतिकाफ का एहतेमाम करना चाहिए। क्योंकि पैगंबरे इस्लाम हजरत मुहम्मद की वफात के बाद आपकी बीबीयों ने अपने कमरों में एतिकाफ किया था।
विज्ञापन
बताया कि एतिकाफ का सबसे बड़ा मकसद, शबेकद्र की तलाश है। इस लिए इसकी खास जगह आखिरी अशरे को बनाया गया है। क्योंकि इसी अशरे में (21, 23, 25, 29) में शबे कदर का पाया जाना मुमकिन है। एतिकाफ करने वाला गोया अल्लाह से एतेजाज कर रहा है कि जब तक मेरी मांग पूरी नहीं होगी, मै एतिकाफ पर रहूंगा। ऐसे में वह बंदा अल्लाह के नजदीक बेहद महबूब हो जाता है।
विज्ञापन