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जांच में सहयोग न करने पर डीएम ने डीपीआरओ को किया कार्यमुक्त
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मऊ। स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण कार्याक्रम में हुए गोलमाल की जांच के लिए गठित की गई जांच टीम का सहयोग न करने पर डीएम ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी ने गुरुवार को जिला पंचायती राज अधिकारी एचपी सिंह को कार्यमुक्त कर दिया। इस दौरान उन्हे मुख्यालय जाकर रिपोर्ट करने का आदेश दिया। साथ ही खंड विकास अधिकारी बड़राव को डीपीआरओ का कार्यभार सौंपा गया।
बताते चले केंद्र और प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण में लगे स्वच्छता ग्राहियों के मानदेय भुगतान में कुछ गोलमाल किया गया। इसका खुलासा होने पर हुई जांच में प्रथम दृष्टया संविदा पर जिला सलाहकार पद पर तैनात अजय शर्मा और छविलाल यादव को दोषी पाया गया। इस दौरान तत्कालीन डीएम प्रकाश बिंदु ने दोनों को हटाने और जांच कराकर दोषियों के विरुद्घ कर्रवाई करने का आदेश जारी किया था। इस दौरान मामला दब गया था। लेकिन वर्तमान डीएम ने इस मामले को पकड़ा। साथ ही उन्होंने दोनों को तत्काल हटाने का आदेश डीपीआरओ को तीस मई को दिया। इस दौरान डीपीआरओ दोनों को हटाने की बजाय खुद अवकाश पर चले गए। इसबीच अजय शर्मा और छविलाल यादव कार्यालय में बतौर कर्मचारी आकर बैठने लगें। इसकी सूचना मिलने पर डीएम ने पांच जून को डीपीआरओ कार्यालय सीज करा दिया। साथ ही दोनों को गिरफ्तार करने का आदेश दिया। हालांकि टीम के पहुंचने से पूर्व दोनों संविदा कर्मचारी फरार हो गए। इसके चलते पुलिस के हत्थे नहीं चढे। डीएम को जब पता चला कि दोनों संविदा कर्मचारियों को हटाए जाने की चिट़्टी डीपीआरओ ने नहीं रिसीब कराया। तो डीएम ने पूरे मामले की जांच कराने का आदेश दिया।
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बताते चले केंद्र और प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण में लगे स्वच्छता ग्राहियों के मानदेय भुगतान में कुछ गोलमाल किया गया। इसका खुलासा होने पर हुई जांच में प्रथम दृष्टया संविदा पर जिला सलाहकार पद पर तैनात अजय शर्मा और छविलाल यादव को दोषी पाया गया। इस दौरान तत्कालीन डीएम प्रकाश बिंदु ने दोनों को हटाने और जांच कराकर दोषियों के विरुद्घ कर्रवाई करने का आदेश जारी किया था। इस दौरान मामला दब गया था। लेकिन वर्तमान डीएम ने इस मामले को पकड़ा। साथ ही उन्होंने दोनों को तत्काल हटाने का आदेश डीपीआरओ को तीस मई को दिया। इस दौरान डीपीआरओ दोनों को हटाने की बजाय खुद अवकाश पर चले गए। इसबीच अजय शर्मा और छविलाल यादव कार्यालय में बतौर कर्मचारी आकर बैठने लगें। इसकी सूचना मिलने पर डीएम ने पांच जून को डीपीआरओ कार्यालय सीज करा दिया। साथ ही दोनों को गिरफ्तार करने का आदेश दिया। हालांकि टीम के पहुंचने से पूर्व दोनों संविदा कर्मचारी फरार हो गए। इसके चलते पुलिस के हत्थे नहीं चढे। डीएम को जब पता चला कि दोनों संविदा कर्मचारियों को हटाए जाने की चिट़्टी डीपीआरओ ने नहीं रिसीब कराया। तो डीएम ने पूरे मामले की जांच कराने का आदेश दिया।
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