{"_id":"5ccf27acbdec22077654dabd","slug":"151557079980-mau-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दो माह में 338 किसान आगलगी के शिकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दो माह में 338 किसान आगलगी के शिकार
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिले में मार्च और अप्रैल महीने में शार्ट सर्किट से आग लगने की घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि हुई है। इसके किसानों की लाखों की कमाई कुछ ही घंटों में बरबाद हो गई। किसानों को फसल बीमा का लाभ भी नहीं मिला और न ही बिजली विभाग के अफसरों की जिम्मेदारी तय हो पाई। पिछले दो महीनों में 338 किसानों की गृहस्थी शार्ट सर्किट से होने वाली आगलगी के चलते उजड़ गई।
गांवों में खेतों के ऊपर से गुजरने वाली विद्युत लाइनों के तार जर्जर हो गए हैं। अधिक दूरी वाले स्थानों तक लाइन पहुंचाने के लिए मानक की विपरीत अधिक दूरी पर विद्युत पोल गाड़ने के चलते तार काफी ढीले होकर नीचे लटक गए हैं। तेज हवाएं चलने पर तारों की स्पार्किंग से शार्ट सर्किट की घटनाएं होती हैं। मार्च और अप्रैल में आगलगी की 113 घटनाओं में 338 किसानों की लाखों की फसल नष्ट हो गई। हद यह है कि क्षति का आंकलन करने के लिए राजस्वकर्मी मौके पर पहुंचते ही नहीं। पहुंचते भी हैं तो सौदेबाजी होने लगती है। फसल बीमा का लाभ किसानों को नहीं मिलता है। किसान नेता देव प्रकाश राय कहते हैं कि शार्ट सर्किट से होने वाली आगलगी की घटनाओं के लिए बिजली विभाग को जिम्मेदार नहीं माना जाता। किसान नेता देवेंद्र सिंह कहते हैं शार्ट सर्किट से होने वाली आगलगी की घटनाओं के लिए बिजली विभाग से क्षति मिलनी चाहिए। किसान नेता राकेश सिंह ने मांग की कि इस योजना को और पारदर्शी बनाया जाना चाहिए।
उधर जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार कहते हैं कि राजस्व कर्मियों की रिपोर्ट के आधार आगलगी की घटनाओं में गाइड लाइन के मुताबिक भुगतान किया जाता है। फसल बीमा का भी लाभ पंजीकृत पीड़ित किसानों को दिया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
गांवों में खेतों के ऊपर से गुजरने वाली विद्युत लाइनों के तार जर्जर हो गए हैं। अधिक दूरी वाले स्थानों तक लाइन पहुंचाने के लिए मानक की विपरीत अधिक दूरी पर विद्युत पोल गाड़ने के चलते तार काफी ढीले होकर नीचे लटक गए हैं। तेज हवाएं चलने पर तारों की स्पार्किंग से शार्ट सर्किट की घटनाएं होती हैं। मार्च और अप्रैल में आगलगी की 113 घटनाओं में 338 किसानों की लाखों की फसल नष्ट हो गई। हद यह है कि क्षति का आंकलन करने के लिए राजस्वकर्मी मौके पर पहुंचते ही नहीं। पहुंचते भी हैं तो सौदेबाजी होने लगती है। फसल बीमा का लाभ किसानों को नहीं मिलता है। किसान नेता देव प्रकाश राय कहते हैं कि शार्ट सर्किट से होने वाली आगलगी की घटनाओं के लिए बिजली विभाग को जिम्मेदार नहीं माना जाता। किसान नेता देवेंद्र सिंह कहते हैं शार्ट सर्किट से होने वाली आगलगी की घटनाओं के लिए बिजली विभाग से क्षति मिलनी चाहिए। किसान नेता राकेश सिंह ने मांग की कि इस योजना को और पारदर्शी बनाया जाना चाहिए।
विज्ञापन
उधर जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार कहते हैं कि राजस्व कर्मियों की रिपोर्ट के आधार आगलगी की घटनाओं में गाइड लाइन के मुताबिक भुगतान किया जाता है। फसल बीमा का भी लाभ पंजीकृत पीड़ित किसानों को दिया जाता है।
विज्ञापन