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दो माह में 338 किसान आगलगी के शिकार

Sun, 05 May 2019 11:43 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 05 May 2019 11:43 PM IST
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दो माह में 338 किसान आगलगी के शिकार
जिले में मार्च और अप्रैल महीने में शार्ट सर्किट से आग लगने की घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि हुई है। इसके किसानों की लाखों की कमाई कुछ ही घंटों में बरबाद हो गई। किसानों को फसल बीमा का लाभ भी नहीं मिला और न ही बिजली विभाग के अफसरों की जिम्मेदारी तय हो पाई। पिछले दो महीनों में 338 किसानों की गृहस्थी शार्ट सर्किट से होने वाली आगलगी के चलते उजड़ गई।
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गांवों में खेतों के ऊपर से गुजरने वाली विद्युत लाइनों के तार जर्जर हो गए हैं। अधिक दूरी वाले स्थानों तक लाइन पहुंचाने के लिए मानक की विपरीत अधिक दूरी पर विद्युत पोल गाड़ने के चलते तार काफी ढीले होकर नीचे लटक गए हैं। तेज हवाएं चलने पर तारों की स्पार्किंग से शार्ट सर्किट की घटनाएं होती हैं। मार्च और अप्रैल में आगलगी की 113 घटनाओं में 338 किसानों की लाखों की फसल नष्ट हो गई। हद यह है कि क्षति का आंकलन करने के लिए राजस्वकर्मी मौके पर पहुंचते ही नहीं। पहुंचते भी हैं तो सौदेबाजी होने लगती है। फसल बीमा का लाभ किसानों को नहीं मिलता है। किसान नेता देव प्रकाश राय कहते हैं कि शार्ट सर्किट से होने वाली आगलगी की घटनाओं के लिए बिजली विभाग को जिम्मेदार नहीं माना जाता। किसान नेता देवेंद्र सिंह कहते हैं शार्ट सर्किट से होने वाली आगलगी की घटनाओं के लिए बिजली विभाग से क्षति मिलनी चाहिए। किसान नेता राकेश सिंह ने मांग की कि इस योजना को और पारदर्शी बनाया जाना चाहिए।
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उधर जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार कहते हैं कि राजस्व कर्मियों की रिपोर्ट के आधार आगलगी की घटनाओं में गाइड लाइन के मुताबिक भुगतान किया जाता है। फसल बीमा का भी लाभ पंजीकृत पीड़ित किसानों को दिया जाता है।
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