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जिले में शासनादेश का उल्लंघन, पुराने पटल पर जमे है लिपिक

Mon, 07 Jan 2019 10:05 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 07 Jan 2019 10:05 PM IST
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जिले में शासनादेश का उल्लंघन, पुराने पटल पर जमे है लिपिक
मऊ। वर्ष 2016 में अखिलेश सरकार तथा बाद में आई योगी सरकार ने एक पटल पर लंबे समय से जमे कर्मचारियों और लिपिकों को स्थानांतरित करने का आदेश जारी किया। इस आदेश का पालन भी किया गया, लेकिन जिले में लचर व्यवस्था के चलते कर्मचारी पुन: कुछ समय बाद उसी पुराने पटल पर आसीन हो गए। शासनादेश के बाद विभागों में सालों से कुंडली मारकर बैठे कई लिपिकों के खिलाफ तो शिकायती प्रार्थना पत्र भी पड़े हैं। जिसे विभागाध्यक्ष मैनेज कर उनकी तैनाती को बरकरार रखे हैं। जो शासनादेश का खुला उलंघन है।
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11 मई 2016 को अखिलेश सरकार की कैबिनेट ने निर्णय लिया कि जिले में छह वर्षों तथा मंडल में 10 वर्षों तक जमे कर्मचारियों को हटाया जाए। इसके बाद आई योगी सरकार ने इस फैसले को लागू किया। इस दौरान तत्कालीन जिलाधिकारी ऋषिरेंद्र ने कर्मचारियों के पटल बदलने का फरमान जारी किया। इस दौरान राजस्व विभाग के कर्मचारियों के पटल बदले गए। लेकिन स्वास्थ्य विभाग, आपूर्ति विभाग, शिक्षा विभाग, नगर पालिका, संभागीय परिवहन विभाग सहित उन विभागों के कर्मचारियों के पटल नहीं बदले जा सकेे।
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जहां पटल बदले गए, वहां के कर्मचारी एक से छह माह के अंदर वापस लौट आए। योगी सरकार आने के बाद इस नियम में और संशोधन कर लागू कि या। ऐसा हुआ भी तत्कालीन जिलाधिकारी ऋषिरेंद्र कुमार ने शासनादेश का पालन कराने का आदेश जारी किया। इस दौरान डीएम ने कलेक्ट्रेट के कर्मचारियों के साथ लेखपालों का स्थानांतरण किया। साथ ही अन्य विभागों में भी फेरबदल कर अवगत कराने को कहा। इसबीच उनका स्थानांतरण हो गया। परिणामस्वरुप शासनादेश का पालन पूरी तरह से सभी विभागों ने नही किया। स्वास्थ्य विभाग में तो 20 वर्षों से जमे एक लिपिक का स्थानांतरण सिर्फ कागजों में हुआ।
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पटलों पर कर्मचारियों की भारी कमी चल रही है, इसके चलते चाह कर भी कर्मचारियों के पटल बदलने का कार्य नहीं हो पा रहा। कर्मचारियों की कमी के चलते किसी तरह से कामों को पूरा किया जा रहा है।- प्रकाश बिंदु, जिलाधिकारी मऊ।
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