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अंजुमनों ने धार्मिक रीति रिवाज से निकाला बीसवां का जुलूस
Updated Sat, 21 Oct 2017 11:18 PM IST
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घोसी (मऊ)। नगर के बड़ागांव शिया समुदाय की तरफ बीसवां का जुलूस शुक्रवार की रात बड़ा गांव बाजार में इमाम चौक से ताजिया का जुलूस निकाला गया। जुलूस परंपरागत रास्तों से होता हुआ राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित इमामबाड़ा पर जाकर समाप्त हो गया। मौलाना शफ़क़त तक़ी ने कहा कि इस्लाम इंसानियत का पैग़ाम देता है। इस्लाम हमें अमन का पैग़ाम देता है। आज इस बाजार में इमाम चौक पर ताजिया रखा हुआ है और मंदिर के सामने पंडाल में सजाई गई मूर्ति एक ही जगह है। हम अपना ताजिया का जुलूस निकाल कर इमामें हुसैन का ग़म मना रहे हैं। वहीं इसी जगह हिंदू भाई अपना त्यौहार दीपावली की ख़ुशी मना रहे हैं । यह अमन ही तो है, कि हम एक ही जगह अपना प्रोग्राम मिल जुल कर करते हैं।मौलाना ने यह भी बताया कि भगवान राम ने रावण का सर काट कर जीत हासिल किया था। मौला हुसैन ने कर्बला में अपना सिर कटा कर जीत हासिल की। कर्बला में रसूलअल्लाह के नवासे मौला हुसैन को तीन दिन तक भूखा प्यासा रख कर यजीदी आतंकवादियों ने मार डाला। उन्हीं की याद में यह बीसवां का जुलूस निकाला गया ।जिसमे बड़ा गांव की अंजुमने, अंजुमन सज्जादिया,अंजुमन मसुमिया कदीम ,अंजुमन दस्तए मसुमिया,अंजुमन मसुमिया, अंजुमन इमामिया,अंजुमन मसुमिया, अंजुमन तंजीमुल हुसैनी,अंजुमन हुसैनी मिशन ने असगर का गहवारा झुलाती रह गई,कहती थी यह दुखया मैं सो नही पाई, नम आंखों से रसूल की बेटी फातिमा को उन के लाल का पुरसा दिया आदि नौहा पढ़ा। नौहा सुन लोगों की आंखें नम हो गई। जुलुस अपने परंपरागत रास्ते बाजार इमाम चौक से पूरब मोहल्ला व सोनार टोली व छोटा फाटक व नीमतले और बड़ा फाटक से होता हुवा सदर इमाम बारगाह पर देर रात समाप्त हुआ। इस अवसर पर मौलाना रहबर रजा, असगर नासरी, लुकमान, मोख्तार, जरगम नेता,फ़िरोज,नसीम,फिरोज हैदर, शहादत, अलमदार, मोहब्बतअली,रागिब, दुरुल हसन,नूर मोहम्मद आदि उपस्थित रहे।
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