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चित्रकूट की धरती हुआ था भरत और राम का दिव्य मिलन
Updated Mon, 18 Dec 2017 11:49 PM IST
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अमर शहीद कुंवर मुन्नी सिंह तथा स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की स्मृति में क्षेत्र के तिघरा गांव में स्थित मां भगवती मां भागेश्वरी मंदिर के प्रागंण में चल रही श्रीराम कथा के छठवें दिन भक्त गाते लगाते रहे।
इस अवसर पर कथावाचक रमेश भाई शुक्ल ने राम वनवास की कथा सुनाते हुए कहा कि अयोध्या में तीन बीमारी आ गई थी इसीलिए राम वनवास हुआ। दशरथ में काम, मंथरा में लोभ, कैकेयी में क्रोध,म काम आया तो राम गए, लोभ आया तो वैराग्य रुपी लखन गए और क्रोध आया तो शांति रुपी सीता चली गईं। फिर रामजी केवट की नौका से गंगा पार हुए और चित्रकूट में निवास किए। कूट माने पहाड़, पहाड़ की भांति स्थिर चित्त ही चित्रकूट है। ऐसे में चित्त में रामजी निवास करते हैं। चित्रकूट की धरती भरत और राम का दिव्य मिलन हुआ। भरत चरित्र सुनकर श्रोता भाव विभोर ह उठे। इस अवसर पर कार्यक्रम के संयोजक प्रधान कुंवर श्याम नारायण सिंह, परमा सिंह, राम नारायन सिंह, संत विजय सिंह, विजय शंकर सिंह, सुरेश सिंह, रविंद्र सिंह, जनार्दन शुक्ल, जगदीश शुक्ल, चंद्रभूषण, दुर्गविजय, राममूरत सिंह आदि शामिल रहे।
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इस अवसर पर कथावाचक रमेश भाई शुक्ल ने राम वनवास की कथा सुनाते हुए कहा कि अयोध्या में तीन बीमारी आ गई थी इसीलिए राम वनवास हुआ। दशरथ में काम, मंथरा में लोभ, कैकेयी में क्रोध,म काम आया तो राम गए, लोभ आया तो वैराग्य रुपी लखन गए और क्रोध आया तो शांति रुपी सीता चली गईं। फिर रामजी केवट की नौका से गंगा पार हुए और चित्रकूट में निवास किए। कूट माने पहाड़, पहाड़ की भांति स्थिर चित्त ही चित्रकूट है। ऐसे में चित्त में रामजी निवास करते हैं। चित्रकूट की धरती भरत और राम का दिव्य मिलन हुआ। भरत चरित्र सुनकर श्रोता भाव विभोर ह उठे। इस अवसर पर कार्यक्रम के संयोजक प्रधान कुंवर श्याम नारायण सिंह, परमा सिंह, राम नारायन सिंह, संत विजय सिंह, विजय शंकर सिंह, सुरेश सिंह, रविंद्र सिंह, जनार्दन शुक्ल, जगदीश शुक्ल, चंद्रभूषण, दुर्गविजय, राममूरत सिंह आदि शामिल रहे।
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