{"_id":"5c436d1fbdec2259c0068e57","slug":"101547922719-mau-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिले में फिर से शुरू होगी टीबी मरीज खोजों अभियान का शुभारंभ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिले में फिर से शुरू होगी टीबी मरीज खोजों अभियान का शुभारंभ
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
मऊ। बाल निकेतन स्थित टीबी क्लीनिक पर शनिवार को मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एससी सिंह ने प्रेसवार्ता का आयोजन कर बताया कि जिले में एक बार फिर से टीबी मरीजों को खोजने के अभियान का शुभारंभ किया जा रहा है, चौथे चरण के इस अभियान का शुभारंभ 21 जनवरी से होगा।
मुख्य चिकित्साधिकारी एससी सिंह ने बताया कि अब तक चले तीन चरणों के अभियान में जिले भर से 4772 मरीजों को चिह्नित किया गया है। इसमें 3787 मरीजों को सरकारी तंत्र के जरिए चिह्नित किया गया। जबकि 1142 मरीजों को प्राइवेट सेक्टरों से चिह्नित किया गया। बोले इस अभियान को चलाने का उद्देश्य समाज को टीबी मुक्त करना है। इसके चलते यह अभियान पीएम और सीएम की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है।
मुख्य चिकित्साधिकारी ने बताया कि टीबी के चिह्नित किए जाने वाले मरीजों को कौन सी दवा चलेगी, इसके लिए सीबी नॉट मशीन की व्यवस्था की गई है। जो सिर्फ सरकारी सुविधा में निशुल्क जांच के लिए उपलब्ध है। प्राइवेट स्तर पर इस तरह की जांच करने के लिए कोई मशीन नहीं है। जांच के बाद यह मशीन तय करेगी कि चिह्नित टीबी के मरीज के शरीर में किस तरह के किटाणु हैं, उनको मारने के लिए किस पावर की दवा चलाने की आवश्यकता है। सीएमओ ने बताया कि चिह्नित किए गए 4772 मरीजों में 144 एमडीआर (मरीज मल्टी ड्रग रजिस्ट्रेंट) की श्रेणी में है, इसी क्रम में 38 मरीजों को एसडीआर (एक्सेटिव ड्रग रजिस्ट्रेट) की श्रेणी में रखकर उन्हें दवा दी जा रही। बोले टीबी वो बीमारी है, जिससे ग्रसित मरीज को काफी देर से बीमार होने का पता चलता है। इस दौरान घनी आबादी में रहने वाले ये मरीज रोग की जानकारी होने तक कुछ लोगों में इस बीमारी को बांट चुकें होते हैं। क्योंकि इनके किटाणु हवा में घुलकर स्वास के जरिए संक्रमण फैलाने का काम करते हैं। 21 जनवरी से शुरू हो रहे इस अभियान का समापन एक फरवरी तक चलेगा। इस अभियान को सफल बनाने के लिए 89 टीमों को लगाया गया है। इसमें बीस सुुपरवाइजर और दस मेडिकल अफसर अभियान के पर्यवेक्षण के लिए लगाए गए हैं।
मुख्य चिकित्साधिकारी एससी सिंह ने बताया कि अब तक चले तीन चरणों के अभियान में जिले भर से 4772 मरीजों को चिह्नित किया गया है। इसमें 3787 मरीजों को सरकारी तंत्र के जरिए चिह्नित किया गया। जबकि 1142 मरीजों को प्राइवेट सेक्टरों से चिह्नित किया गया। बोले इस अभियान को चलाने का उद्देश्य समाज को टीबी मुक्त करना है। इसके चलते यह अभियान पीएम और सीएम की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है।
विज्ञापन
मुख्य चिकित्साधिकारी ने बताया कि टीबी के चिह्नित किए जाने वाले मरीजों को कौन सी दवा चलेगी, इसके लिए सीबी नॉट मशीन की व्यवस्था की गई है। जो सिर्फ सरकारी सुविधा में निशुल्क जांच के लिए उपलब्ध है। प्राइवेट स्तर पर इस तरह की जांच करने के लिए कोई मशीन नहीं है। जांच के बाद यह मशीन तय करेगी कि चिह्नित टीबी के मरीज के शरीर में किस तरह के किटाणु हैं, उनको मारने के लिए किस पावर की दवा चलाने की आवश्यकता है। सीएमओ ने बताया कि चिह्नित किए गए 4772 मरीजों में 144 एमडीआर (मरीज मल्टी ड्रग रजिस्ट्रेंट) की श्रेणी में है, इसी क्रम में 38 मरीजों को एसडीआर (एक्सेटिव ड्रग रजिस्ट्रेट) की श्रेणी में रखकर उन्हें दवा दी जा रही। बोले टीबी वो बीमारी है, जिससे ग्रसित मरीज को काफी देर से बीमार होने का पता चलता है। इस दौरान घनी आबादी में रहने वाले ये मरीज रोग की जानकारी होने तक कुछ लोगों में इस बीमारी को बांट चुकें होते हैं। क्योंकि इनके किटाणु हवा में घुलकर स्वास के जरिए संक्रमण फैलाने का काम करते हैं। 21 जनवरी से शुरू हो रहे इस अभियान का समापन एक फरवरी तक चलेगा। इस अभियान को सफल बनाने के लिए 89 टीमों को लगाया गया है। इसमें बीस सुुपरवाइजर और दस मेडिकल अफसर अभियान के पर्यवेक्षण के लिए लगाए गए हैं।
विज्ञापन