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पूर्व के वर्षो में अधिकांश गांवों में हुआ मनरेगा में खेल
Updated Fri, 19 Jan 2018 12:20 AM IST
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मऊ। लाख प्रयास के बाद भी मनरेगा के कार्य में मानव दिवस के स्थान पर मशीन से काम कराया जा रहा है, शिकायत पर जिले में कई मामले प्रकाश में पाए गए है। जिले के गांवों में पूर्व के वर्षो में मनरेगा के तहत कराए गए कार्यो में अधिकारियों के निरीक्षण में तमाम गड़बडी मिली हैं। जाबकार्डधारकों के बजाय जेसीबी से कार्य कराकर धन को हजम कर लिया गया। धन की वसूूली करने के लिए नोटिस जारी की गई है। अब शासन की तरफ से बने निगरानी तंत्र से ग्राम पंचायतों में हो रहे कार्यो पर नजर रखी जा रही है। मनरेगा से तीन वर्षो में 519 आंगनबाड़ी केंद्र बनाए गए हैं। आंकड़ों में वर्तमान वित्तीय वर्ष में 30.80 लाख मानव दिवस सृजित किए गए हैं।
जिले में 673 ग्राम पंचायतें हैं। जिले के जाबकार्डधारकों को भरपूर काम देकर उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए मनरेगा योजना शुरू की गई है। इसके तहत 60 प्रतिशत कच्चा तथा 40 प्रतिशत पक्का कार्य कराया जाना है। ग्राम पंचायतों में मनरेगा से बनने वाले आंगनबाड़ी केंद्रों पर नजर डाला जाए तो वर्ष 2015-16 में 119, 2016-17 में 200, 2017-18 में 200 बने हैं। पूर्व के वर्षो मेें अधिकांश ग्राम पंचायतों में मनरेगा से कराए गए कार्यो में तमाम कमियां पाई गई हैं। अधिकारियों तथा कर्मचारियों की मिलीभगत से मनरेगा से कराए जाने वाले कार्यो को जाबकार्डधारकों से काम कराए जाने की जगह मशीनों से काम कराकर धन का आहरण करा लिया गया। विभागीय अधिकारियों द्वारा कराई गई जांच पर नजर डाला जाए तो तीन जुलाई 2017 को परदहां ब्लाक क्षेत्र के संजय सिंह पुत्र राजेंद्र प्रताप सिंह की व्यक्तिगत पोखरी की खुदाई मनरेगा से कराया गया था। इसी तरह 12 जून 2017 को रतनपुरा ब्लाक क्षेत्र के साहूपुर गांव में पोखरी की खुदाई जेसीबी से कराया जाना पाया गया था। इसी तरह 14 अप्रैल 2017 को रानीपुर ब्लाक क्षेत्र के चैनपुर गांव में रात के अंधेरे में पोखरी की खुदाई जेसीबी से कराई गई मिली थी। इसी तरह 12जून 2017 को फतहपुर मंडाव ब्लाक के कांठतरांव गांव में व्यक्तिगत पोखरी की जेसीबी से खुुदाई कराया जाना पाया था। इसी तरह परदहां ब्लाक क्षेत्र के परसपुरा गांव में पोखरी की खुदाई जेसीबी से कराया गया मिला था।
धन की रिकवरी करने के लिए नोटिस जारी की गई है। यह तो एक बानगी है।
वर्तमान वित्तीय वर्ष में 30.80 लाख मानव दिवस सृजित किए गए हैं। शासन की तरफ से निगरानी तंत्र विकसित कर दिए जाने से कच्चा तथा पक्का कार्यो के अनुपात की मानीटरिंग होने से इस वर्ष मामले उजागर नहीं हो पाए हैं। इस बाबत उपायुक्त श्रम एवं रोजगार तेजभान सिंह का कहना था कि गांवों में मनरेगा के तहत कराए जा रहे कार्यो पर निगरानी तंत्र से नजर रखी जाती है। पूर्व के वर्षो में आई शिकायतों की जांच कराई गई। जांच में गड़बड़ी मिलने पर श्रमदान घोषित कर दिया गया है।
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जिले में 673 ग्राम पंचायतें हैं। जिले के जाबकार्डधारकों को भरपूर काम देकर उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए मनरेगा योजना शुरू की गई है। इसके तहत 60 प्रतिशत कच्चा तथा 40 प्रतिशत पक्का कार्य कराया जाना है। ग्राम पंचायतों में मनरेगा से बनने वाले आंगनबाड़ी केंद्रों पर नजर डाला जाए तो वर्ष 2015-16 में 119, 2016-17 में 200, 2017-18 में 200 बने हैं। पूर्व के वर्षो मेें अधिकांश ग्राम पंचायतों में मनरेगा से कराए गए कार्यो में तमाम कमियां पाई गई हैं। अधिकारियों तथा कर्मचारियों की मिलीभगत से मनरेगा से कराए जाने वाले कार्यो को जाबकार्डधारकों से काम कराए जाने की जगह मशीनों से काम कराकर धन का आहरण करा लिया गया। विभागीय अधिकारियों द्वारा कराई गई जांच पर नजर डाला जाए तो तीन जुलाई 2017 को परदहां ब्लाक क्षेत्र के संजय सिंह पुत्र राजेंद्र प्रताप सिंह की व्यक्तिगत पोखरी की खुदाई मनरेगा से कराया गया था। इसी तरह 12 जून 2017 को रतनपुरा ब्लाक क्षेत्र के साहूपुर गांव में पोखरी की खुदाई जेसीबी से कराया जाना पाया गया था। इसी तरह 14 अप्रैल 2017 को रानीपुर ब्लाक क्षेत्र के चैनपुर गांव में रात के अंधेरे में पोखरी की खुदाई जेसीबी से कराई गई मिली थी। इसी तरह 12जून 2017 को फतहपुर मंडाव ब्लाक के कांठतरांव गांव में व्यक्तिगत पोखरी की जेसीबी से खुुदाई कराया जाना पाया था। इसी तरह परदहां ब्लाक क्षेत्र के परसपुरा गांव में पोखरी की खुदाई जेसीबी से कराया गया मिला था।
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धन की रिकवरी करने के लिए नोटिस जारी की गई है। यह तो एक बानगी है।
वर्तमान वित्तीय वर्ष में 30.80 लाख मानव दिवस सृजित किए गए हैं। शासन की तरफ से निगरानी तंत्र विकसित कर दिए जाने से कच्चा तथा पक्का कार्यो के अनुपात की मानीटरिंग होने से इस वर्ष मामले उजागर नहीं हो पाए हैं। इस बाबत उपायुक्त श्रम एवं रोजगार तेजभान सिंह का कहना था कि गांवों में मनरेगा के तहत कराए जा रहे कार्यो पर निगरानी तंत्र से नजर रखी जाती है। पूर्व के वर्षो में आई शिकायतों की जांच कराई गई। जांच में गड़बड़ी मिलने पर श्रमदान घोषित कर दिया गया है।
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