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नाबालिग के साथ दुष्कर्म के मामले में एक को 10 वर्ष का सश्रम कारावास
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मऊ। विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट शहिब जेहरा ने 15 वर्षीय नाबालिग लड़की को शादी के आशय से बहला फुसलाकर भगाने और उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में नामजद आरोपी को सुनवाई के बाद बृहस्पतिवार को दोषी पाया। दोष पाए जाने के बाद उसे 10 वर्ष की सश्रम कारावास की सजा के साथ ही 18 हजार रुपया अर्थदंड भी निर्धारित किया। अर्थदंड न देने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं अर्थदंड जमा होने के बाद बतौर प्रतिकर तीन हजार रुपया पीड़िता को देने का आदेश दिया।
मामला दोहरीघाट थाना क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार वादी मुकदमा की 15 वर्षीय नाबालिग लड़की को आरोपी 17 जुलाई 2013 को शादी का लालच देकर बहला फुसलाकर भगा ले गया। इस दौरान आरोपी ने पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया। पुलिस ने वादी की तहरीर के आधार पर दोहरीघाट थाना क्षेत्र के चंद्राबारी गांव निवासी सुग्गन के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कर किया। इसके बाद विवेचना आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए विशेष लोक अभियोजक विमल कुमार श्रीवास्तव और प्रवीण कुमार मिश्र ने कुल छह गवाहों को पेशकर अपना पक्ष रखा। इस दौरान कोर्ट में साक्षी के रूप में एक गवाह तथा बचाव पक्ष से दो गवाहों को पेशकर तर्क दिया गया कि उसे झूठा फंसाया गया है। विशेष न्यायाधीश ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपी सुग्गन को नाबालिग को शादी के आशय से बहला फुुसलाकर भगाने तथा उसके साथ दुष्कर्म करने का दोषी पाया। दोषी पाए जाने के बाद दुष्कर्म के मामले में 10 वर्ष का सश्रम कारावास के साथ ही दस हजार का अर्थदंड, शादी के आशय से भगाने के मामले में 5 वर्ष का सश्रम कारावास के साथ ही पांच हजार का अर्थदंड तथा बहला फुसलाकर भगाने में तीन वर्ष का सश्रम कारावास की सजा के साथ ही तीन हजार रुपया अर्थदंड निर्धारित किया। अर्थदंड ने देने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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मामला दोहरीघाट थाना क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार वादी मुकदमा की 15 वर्षीय नाबालिग लड़की को आरोपी 17 जुलाई 2013 को शादी का लालच देकर बहला फुसलाकर भगा ले गया। इस दौरान आरोपी ने पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया। पुलिस ने वादी की तहरीर के आधार पर दोहरीघाट थाना क्षेत्र के चंद्राबारी गांव निवासी सुग्गन के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कर किया। इसके बाद विवेचना आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए विशेष लोक अभियोजक विमल कुमार श्रीवास्तव और प्रवीण कुमार मिश्र ने कुल छह गवाहों को पेशकर अपना पक्ष रखा। इस दौरान कोर्ट में साक्षी के रूप में एक गवाह तथा बचाव पक्ष से दो गवाहों को पेशकर तर्क दिया गया कि उसे झूठा फंसाया गया है। विशेष न्यायाधीश ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपी सुग्गन को नाबालिग को शादी के आशय से बहला फुुसलाकर भगाने तथा उसके साथ दुष्कर्म करने का दोषी पाया। दोषी पाए जाने के बाद दुष्कर्म के मामले में 10 वर्ष का सश्रम कारावास के साथ ही दस हजार का अर्थदंड, शादी के आशय से भगाने के मामले में 5 वर्ष का सश्रम कारावास के साथ ही पांच हजार का अर्थदंड तथा बहला फुसलाकर भगाने में तीन वर्ष का सश्रम कारावास की सजा के साथ ही तीन हजार रुपया अर्थदंड निर्धारित किया। अर्थदंड ने देने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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