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10 हजार किया जाए प्रधानों का मानदेय
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Tue, 23 Aug 2016 12:01 AM IST
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मानदेय के लिए धरने पर बैठे प्रधान
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धरने को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष विवेकानंद यादव ने कहा कि पंचायत चुनाव हुए आठ माह बीत जाने के बाद भी 14वां वित्त आयोग की धनराशि को खर्च करने की स्पष्ट गाइडलाइन नहीं मिल सकी है। इससे गांवों का विकास कार्य ठप है। पूरा अधिकार पंचायत को देते हुए आदेश स्पष्ट किया जाए।
ग्राम प्रधानों का मानदेय नाम मात्र मिल रहा है। कम से कम 10 हजार रुपया प्रतिमाह किया जाए। इसी क्रम में महामंत्री रामभवन ने कहा कि ग्राम प्रधानों को जोखिम उठाकर तमाम सरकारी कार्य करना पड़ता है। लेकिन सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है। शस्त्र लाइसेंस में ग्राम प्रधानों को वरीयता दिया जाए।
ग्राम प्रधान की सड़क दुर्घटना या हत्या होने पर परिवार को 10 लाख रुपया व अपंग या साधारण बीमारी से मौत होने पर पांच लाख रुपया प्रदान किया जाए। कहा कि ग्राम पंचायत स्तर पर गठित शिक्षा समिति को प्रभावी बनाते हुए स्कूल प्रबंध समिति को निरस्त किया जाए। पांच लाख तक का वित्तीय स्वीकृति का अधिकार ग्राम प्रधानों को दिया जाए। मांगों को अविलंब विचार नहीं किया गया तो हम लोग आंदोलन तेज करने को बाध्य हो जाएंगे।
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इसी तरह संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रविंद्र राय ने कहा कि ग्राम पंचायतों के खुली बैठक के अनुमोदन के बगैर की गई पात्र गृहस्थी की डाटा फीडिंग को तत्काल प्रभाव से हटाते हुए ग्राम पंचायतों से अनुमोदित सूची ही प्रत्येक ग्राम पंचायत की आबादी के 79 प्रतिशत लोगों को लाभांवित किया जाए।
अंत में मुख्यमंत्री को संबोधित नवसृजित नगर पंचायत चिरैयाकोट व मधुबन में आने वाली ग्राम पंचायतों के प्रधानों को नगर पंचायत के निर्वाचन कार्य तक कार्य करने देने सहित सहित 16सूत्री ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।धरने को आजमगढ मंडल उपाध्यक्ष श्रीधर राय, अभिमन्यु दुबे, संजय यादव, जमानत अब्बास आदि ने संबोधित किया। धरने में सुशीला मिश्रा, संतोष श्रीवास्तव, प्रद्युम्न राय, रामजन्म गुप्ता, अभय राय, सुरेंद्र सिंह आदि शामिल थे।
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ग्राम प्रधानों का मानदेय नाम मात्र मिल रहा है। कम से कम 10 हजार रुपया प्रतिमाह किया जाए। इसी क्रम में महामंत्री रामभवन ने कहा कि ग्राम प्रधानों को जोखिम उठाकर तमाम सरकारी कार्य करना पड़ता है। लेकिन सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है। शस्त्र लाइसेंस में ग्राम प्रधानों को वरीयता दिया जाए।
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ग्राम प्रधान की सड़क दुर्घटना या हत्या होने पर परिवार को 10 लाख रुपया व अपंग या साधारण बीमारी से मौत होने पर पांच लाख रुपया प्रदान किया जाए। कहा कि ग्राम पंचायत स्तर पर गठित शिक्षा समिति को प्रभावी बनाते हुए स्कूल प्रबंध समिति को निरस्त किया जाए। पांच लाख तक का वित्तीय स्वीकृति का अधिकार ग्राम प्रधानों को दिया जाए। मांगों को अविलंब विचार नहीं किया गया तो हम लोग आंदोलन तेज करने को बाध्य हो जाएंगे।
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इसी तरह संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रविंद्र राय ने कहा कि ग्राम पंचायतों के खुली बैठक के अनुमोदन के बगैर की गई पात्र गृहस्थी की डाटा फीडिंग को तत्काल प्रभाव से हटाते हुए ग्राम पंचायतों से अनुमोदित सूची ही प्रत्येक ग्राम पंचायत की आबादी के 79 प्रतिशत लोगों को लाभांवित किया जाए।
अंत में मुख्यमंत्री को संबोधित नवसृजित नगर पंचायत चिरैयाकोट व मधुबन में आने वाली ग्राम पंचायतों के प्रधानों को नगर पंचायत के निर्वाचन कार्य तक कार्य करने देने सहित सहित 16सूत्री ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।धरने को आजमगढ मंडल उपाध्यक्ष श्रीधर राय, अभिमन्यु दुबे, संजय यादव, जमानत अब्बास आदि ने संबोधित किया। धरने में सुशीला मिश्रा, संतोष श्रीवास्तव, प्रद्युम्न राय, रामजन्म गुप्ता, अभय राय, सुरेंद्र सिंह आदि शामिल थे।