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Mathura News: गढ़ गयौ है डांढो, प्रिया रहत तू ठाड़ौ
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बरसाना। कटि-लहंगा, गल-माल कंचुकी, वाह रे रसिया वाह। कटि-लहंगा, गल-माल कंचुकी, चुनरी शीश उढ़ाओ री रसिया को, रसिया को नार बनाओ री...,बांह बरा बाजू बंद सोहे, वाह रे रसिया वाह। नक बेसर पहनाओ री रसिया को...के पदों के साथ वसंत पंचमी पर ब्रज की प्रेम रस की भरी होली का शुभारंभ हुआ। वृषभानु नंदनी के चरणों में गुलाल अर्पित किया गया।
लाडली मंदिर के सेवायत रामभरोसी गोस्वामी, रासबिहारी गोस्वामी, संजय गोस्वामी, उमा शंकर गोस्वामी ने होली के प्रतीक के रूप में डांढा गाढ़ा। वसंती फूलों के सजे बगले में श्यामा प्यारी ने श्यामसुंदर के साथ वसंती वस्त्र धारण कर भक्तों पर कृपा का सागर बरसाया। प्रिया प्रियतम को छप्पन भोग लगाया गया। गोस्वामी समाज द्वारा संयुक्त रूप से होली के पदों का गायन कर एक-दूसरे को गुलाल लगाया।
किशोरीजी के निज गांव बरसाना वसंती रंग में रंगा नजर आया। सुबह से ही श्रद्वालुओं का हुजूम उमड़े लगा था। शाम पांच बजे सेवायत गोस्वामियों द्वारा राधाजी के मुकुट व चुदंरी से सजे ध्वज रूपी (डांढा) को गर्भ ग्रह में पूजल कर रोपा गया। जगमोहन में बने वसंती फूल बंगले में राधाकृष्ण के श्रीविग्रह को वसंती वस्त्र धारण करा कर श्रीचरणों में गुलाल अर्पित किया। इस दौरान सखी भाव में गोस्वामीजन गाते हैं अब गढ़ गयौ है डांढो, प्रिया रहत तू ठाड़ौ।
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लाडली मंदिर के सेवायत रामभरोसी गोस्वामी, रासबिहारी गोस्वामी, संजय गोस्वामी, उमा शंकर गोस्वामी ने होली के प्रतीक के रूप में डांढा गाढ़ा। वसंती फूलों के सजे बगले में श्यामा प्यारी ने श्यामसुंदर के साथ वसंती वस्त्र धारण कर भक्तों पर कृपा का सागर बरसाया। प्रिया प्रियतम को छप्पन भोग लगाया गया। गोस्वामी समाज द्वारा संयुक्त रूप से होली के पदों का गायन कर एक-दूसरे को गुलाल लगाया।
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किशोरीजी के निज गांव बरसाना वसंती रंग में रंगा नजर आया। सुबह से ही श्रद्वालुओं का हुजूम उमड़े लगा था। शाम पांच बजे सेवायत गोस्वामियों द्वारा राधाजी के मुकुट व चुदंरी से सजे ध्वज रूपी (डांढा) को गर्भ ग्रह में पूजल कर रोपा गया। जगमोहन में बने वसंती फूल बंगले में राधाकृष्ण के श्रीविग्रह को वसंती वस्त्र धारण करा कर श्रीचरणों में गुलाल अर्पित किया। इस दौरान सखी भाव में गोस्वामीजन गाते हैं अब गढ़ गयौ है डांढो, प्रिया रहत तू ठाड़ौ।
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