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जांच के लिए आई टीम को यमुना के जल में मिले कीड़े और शैवाल
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मथुरा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक अधिकारी मसानी नाला का नमूना लेते हुए।
- फोटो : MATHURA
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मथुरा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तकनीशियनों की टीम ने शुक्रवार को मसानी से विश्राम घाट तक यमुना का हाल जाना। उन्हें मसानी से लेकर विश्राम घाट तक यमुना सबसे अधिक प्रदूषित मिली। पानी की जांच की गई तो उसमें कीड़े और खतरनाक शैवाल भी पाए गए हैं।
यमुना नियंत्रण प्रदूषण बोर्ड के तकनीशियनों ने डीएम के आदेश पर कांतानाथ चतुर्वेदी और रामदास चतुर्वेदी की शिकायत पर यमुना जल की जांच की। टीम ने मसानी नाले से लेकर बंगाली घाट इलाके में यमुना जल की जांच की। जांच में पाया गया कि बंगाली घाट व आसपास के इलाके मे यमुना जल में प्रदूषण बढ़ रहा है। वहीं, दिल्ली की ओर से आ रहे जल में शैवाल (एल्गी) भी पाई जा रही है।
इसका प्रमुख कारण यमुना के पानी को साफ न करना भी है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग द्वारा रिपोर्ट में नाविकों के हवाले से यमुना जल की सफाई करने को लेकर लंबे समय से मटीरियल क्लीनिंग मशीन का न चलना बताया गया है। साथ ही यमुना जल की सफाई के लिए हरनोल स्केप से गंगाजल छोड़े जाने को लेकर मांट ब्रांच सिंचाई विभाग को भी अवगत कराया है।
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यमुना नियंत्रण प्रदूषण बोर्ड के तकनीशियनों ने डीएम के आदेश पर कांतानाथ चतुर्वेदी और रामदास चतुर्वेदी की शिकायत पर यमुना जल की जांच की। टीम ने मसानी नाले से लेकर बंगाली घाट इलाके में यमुना जल की जांच की। जांच में पाया गया कि बंगाली घाट व आसपास के इलाके मे यमुना जल में प्रदूषण बढ़ रहा है। वहीं, दिल्ली की ओर से आ रहे जल में शैवाल (एल्गी) भी पाई जा रही है।
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इसका प्रमुख कारण यमुना के पानी को साफ न करना भी है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग द्वारा रिपोर्ट में नाविकों के हवाले से यमुना जल की सफाई करने को लेकर लंबे समय से मटीरियल क्लीनिंग मशीन का न चलना बताया गया है। साथ ही यमुना जल की सफाई के लिए हरनोल स्केप से गंगाजल छोड़े जाने को लेकर मांट ब्रांच सिंचाई विभाग को भी अवगत कराया है।
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