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दिल्ली की ओर बढ़े हजारों यमुना भक्तों के कदम
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Mon, 16 Mar 2015 12:30 AM IST
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यमुना की अविरल धारा के लिए ब्रजभूमि से शुरू हुआ यमुना मुक्ति पदयात्रा का रविवार को कोसी से आगाज हो गया। कभी रिमझिम तो कभी मूसलाधार बारिश में गजब जोश के साथ हजारों कदम दिल्ली की ओर चल पड़े। ‘अबकी बार, यमुना की धार’ के बुलंद नारे के साथ अनाज मंडी से ब्रज के विरक्त संत रमेश बाबा के सानिध्य व राधाकांत शास्त्री के नेतृत्व में शुरू हुई यात्रा शाम को हरियाणा की सीमा में प्रवेश कर गई।
सारी रात बारिश के बाद रविवार की सुबह कुछ पल के लिए मौसम सुहाना हुआ तो बड़ी तेजी के साथ अनाजमंडी से निकलकर रथ, घोड़ी, वाहन आदि हाइवे पर खड़े होने लगे। दोपहर के 12:30 बजे संत रमेश बाबा के पहुंचने के साथ ही पदयात्रियों ने दिल्ली कूच किया। ‘श्री राधे श्री राधे बरसाने वाली श्री राधे’ और ‘दिल्ली में हम जाएंगे, यमुना मइया लाएंगे’ गीत गाती टोली चल रही थी। बच्चों का उल्लास देखने लायक था।
‘बच्चा-बच्चा करे पुकार, अबकी बार यमुना की धार’ की गूंज पर बच्चे और युवा संग संग नृत्य कर रहे थे। कुछ ही दूर यात्रा चली थी कि बारिश शुरू हो गई लेकिन कोई भी यमुना भक्तों डिग नहीं, हर पग आगे बढ़ते रहे। संत, साधु, किसान, राजनेता अपने-अपने दल बल के साथ मंडी प्रांगण में पहुंचने लगे। मानमंदिर गुरुकुल के बच्चों का शंखनाद रह रहकर जोश भर रहा था।
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उधर किसानों का उत्साह पूरे रंग में था। पदयात्रा में कतारबद्ध संत, साधु, पुष्टिमार्गीय आचार्य, वैष्णवजन, किसान, राजनेता राष्ट्रीय राजमार्ग पर आ गए। यमुना मुक्तिकरण अभियान का रथ इन ब्रजवासियों की अगुवाई कर रहा था। ढोल, मजीरा, भजनों पर थिरकते ये मतवाले ब्रजवासी दिल्ली की ओर बढ़े। अब हाइवे की एक पट्टी पर यमुना भक्तों का सैलाब था। वन-वे ट्रैफिक के चलते हाइवे पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई।
यात्रियों की भीड़ को देख एक बार तो प्रशासन के भी हाथ-पांव फूल गये। इस बीच कई बार अफसरों को स्थिति संभालनी पड़ी। कुछ देर रुककर फिर बरसात शुरू हुई तो मानमंदिर गुरुकुल के विद्यार्थियों, बालाओं ने उसे नजरअंदाज कर नृत्य शुरू कर दिया। यही यात्रा के संकल्प का शिखर था।बच्चों का जोश देख बड़े भी भीगते हुए यात्रा का आनंद लेते रहे। अपराह्न ढाई बजे पदयात्रा ने कोटवन सीमा पार करके हरियाणा में प्रवेश किया।
यात्रा में संत रमेश बाबा, अभियान के राष्ट्रीय संयोजक राधाकांत शास्त्री, सहसंयोजक सुनील सिंह, भारतीय किसान यूनियन (भानु गुट) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह, अवधेश, सूरत से पुष्टिमार्गीय आचार्य बल्लभराय, गोस्वामी पंकज बाबा गोकुल, भागवत वक्ता श्रीकृष्ण सलिल, देवकीनंदन ठाकुर, गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी, भूषण बाबा, अनुभव तैलंग, चतुर्वेदी समाज के डा. यदुनंदन बाबा, हरेश ठेनुआं, राधाप्रिय, महंत फूलडोलदास बिहारी, देवकीनंदन, मृदुल कांत शास्त्री, पूर्व मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण चौधरी, धर्मवीर अग्रवाल, रामदास चतुर्वेदी आदि लोग मौजूद थे।
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सारी रात बारिश के बाद रविवार की सुबह कुछ पल के लिए मौसम सुहाना हुआ तो बड़ी तेजी के साथ अनाजमंडी से निकलकर रथ, घोड़ी, वाहन आदि हाइवे पर खड़े होने लगे। दोपहर के 12:30 बजे संत रमेश बाबा के पहुंचने के साथ ही पदयात्रियों ने दिल्ली कूच किया। ‘श्री राधे श्री राधे बरसाने वाली श्री राधे’ और ‘दिल्ली में हम जाएंगे, यमुना मइया लाएंगे’ गीत गाती टोली चल रही थी। बच्चों का उल्लास देखने लायक था।
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‘बच्चा-बच्चा करे पुकार, अबकी बार यमुना की धार’ की गूंज पर बच्चे और युवा संग संग नृत्य कर रहे थे। कुछ ही दूर यात्रा चली थी कि बारिश शुरू हो गई लेकिन कोई भी यमुना भक्तों डिग नहीं, हर पग आगे बढ़ते रहे। संत, साधु, किसान, राजनेता अपने-अपने दल बल के साथ मंडी प्रांगण में पहुंचने लगे। मानमंदिर गुरुकुल के बच्चों का शंखनाद रह रहकर जोश भर रहा था।
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उधर किसानों का उत्साह पूरे रंग में था। पदयात्रा में कतारबद्ध संत, साधु, पुष्टिमार्गीय आचार्य, वैष्णवजन, किसान, राजनेता राष्ट्रीय राजमार्ग पर आ गए। यमुना मुक्तिकरण अभियान का रथ इन ब्रजवासियों की अगुवाई कर रहा था। ढोल, मजीरा, भजनों पर थिरकते ये मतवाले ब्रजवासी दिल्ली की ओर बढ़े। अब हाइवे की एक पट्टी पर यमुना भक्तों का सैलाब था। वन-वे ट्रैफिक के चलते हाइवे पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई।
यात्रियों की भीड़ को देख एक बार तो प्रशासन के भी हाथ-पांव फूल गये। इस बीच कई बार अफसरों को स्थिति संभालनी पड़ी। कुछ देर रुककर फिर बरसात शुरू हुई तो मानमंदिर गुरुकुल के विद्यार्थियों, बालाओं ने उसे नजरअंदाज कर नृत्य शुरू कर दिया। यही यात्रा के संकल्प का शिखर था।बच्चों का जोश देख बड़े भी भीगते हुए यात्रा का आनंद लेते रहे। अपराह्न ढाई बजे पदयात्रा ने कोटवन सीमा पार करके हरियाणा में प्रवेश किया।
यात्रा में संत रमेश बाबा, अभियान के राष्ट्रीय संयोजक राधाकांत शास्त्री, सहसंयोजक सुनील सिंह, भारतीय किसान यूनियन (भानु गुट) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह, अवधेश, सूरत से पुष्टिमार्गीय आचार्य बल्लभराय, गोस्वामी पंकज बाबा गोकुल, भागवत वक्ता श्रीकृष्ण सलिल, देवकीनंदन ठाकुर, गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी, भूषण बाबा, अनुभव तैलंग, चतुर्वेदी समाज के डा. यदुनंदन बाबा, हरेश ठेनुआं, राधाप्रिय, महंत फूलडोलदास बिहारी, देवकीनंदन, मृदुल कांत शास्त्री, पूर्व मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण चौधरी, धर्मवीर अग्रवाल, रामदास चतुर्वेदी आदि लोग मौजूद थे।