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यमुना एक्सप्रेसवे हादसा: बस का शीशा तोड़कर दोनों बच्चों को बाहर निकाला, खुद नहीं निकल पाई पार्वती

Tue, 16 Dec 2025 12:43 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Tue, 16 Dec 2025 12:43 PM IST
सार

यमुना एक्सप्रेसवे पर मथुरा में घने कोहरे के कारण दर्दनाक हादसा हो गया। एक के बाद एक सात बसें और तीन कारें आपस में टकरा गईं। टक्कर लगने के बाद इन वाहनों में भयंकर आग लग गई।  इस हादसे में अब तक 13 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, वहीं 100 लोगों के घायल होने की सूचना है। 

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Yamuna Expressway Tragedy: Mother Saves Children Trapped in Burning Bus
मथुरा यमुना एक्सप्रेसवे हादसा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

कोहरे की चादर में लिपटे यमुना एक्सप्रेसवे पर मंगलवार तड़के हुआ भीषण सड़क हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं बल्कि मां की ममता और साहस की ऐसी कहानी बन गया, जिसने हर आंख नम कर दीं। जिला हमीरपुर के राठ की रहने वाली 42 वर्षीय पार्वती अपने दो बच्चों प्राची (12) और सनी (8) के साथ डबल डेकर बस से नोएडा अपने पति गोविंद के पास जा रही थीं। पार्वती ने इस हादसे में अपने दोनों बच्चों को तो बचा लिया पर वह खुद आग की लपटों में घिर गई।

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बलदेव थाना क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेसवे के माइलस्टोन 127 किमी पर तड़के करीब 4 बजे अचानक बस की जोरदार टक्कर हुई। पलभर में धमाके की आवाज गूंजी, बस से धुआं उठने लगा और देखते ही देखते आग भड़क उठी। मौत सामने खड़ी थी लेकिन एक मां की ममता उससे भी बड़ी निकली। 


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खतरे को भांपते ही पार्वती ने बिना पल गंवाए अपने सिर से बस की खिड़की का कांच तोड़ दिया। कांच के टुकड़े उनकी गर्दन में धंस गए, खून बहने लगा, लेकिन उसने दर्द की परवाह नहीं की। पहले अपनी बेटी प्राची को बाहर निकाला फिर बेटे सनी को। बच्चों की जान बच गई, मगर खुद पार्वती जलती हुई बस में फंस गईं। इसके बाद आग ने ऐसा विकराल रूप लिया कि बस में जो जहां था, जिंदा जल गया। यमुना एक्सप्रेसवे का यह हादसा सिर्फ आंकड़ों की खबर नहीं बल्कि एक मां की ममता और त्याग की भी कहानी है।




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पार्वती की तलाश में भटक रहे परिजन
इस दर्दनाक हादसे ने धर्म नगरी मथुरा को गहरे शोक में डुबो दिया है। सैकड़ों लोग इस हादसे से प्रभावित हुए, कई परिवार उजड़ गए। पार्वती की सूचना मिलते ही उनके पति गोविंद अपने बेटे आकाश और अन्य परिजन के साथ मथुरा पहुंचे। जिला अस्पताल, वृंदावन, पोस्टमार्टम हाउस हर जगह भटक रहे हैं। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से पत्नी की खोज-खबर ले रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी है।

बिलखती आंखों में उठ रहे सवाल
गोविंद की आंखों में सवाल है पार्वती जिंदा है तो किस हालत में है? और अगर नहीं रही तो उसका शव कहां है? यह सवाल उनके साथ हर मिलने वाले के दिल को चीर रहा है। आशंकाएं उठ रही है। बस में कई ऐसे शव थे जो नरकंकाल बने थे। कोयला सरीखे। कहीं पार्वती भी उन्हीं में तो नहीं। नोएडा के सेक्टर-87 में किराए के मकान में रहने वाले गोविंद राजमिस्त्री का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि सोमवार शाम छह बजे उनकी पत्नी दोनों बच्चों के साथ स्लीपर बस में सवार होकर उनके पास लौट रही थीं। हादसे के बाद बच्चे किसी दूसरी बस से किसी तरह घर पहुंच गए। बेटी प्राची की कमर में गंभीर चोट है, बेटे सनी के सिर में चोट आई है। पार्वती का मोबाइल फोन लगातार बंद आ रहा है।


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