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Mathura News: आधी आबादी ने दिखाया दम... खाकी ने पीछे हटाए कदम
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मथुरा। छाता शुगर मिल को चालू कराने के लिए पिछले 41 दिनों से चल रहे आंदोलन को आधी आबादी यानी महिलाओं ने धार दे दी है। सोमवार तड़के पुलिस-प्रशासन के धरनारत किसानों और भूतपूर्व सैनिकों को हटाए जाने के बाद किसानों के साथ महिलाओं ने मोर्चा संभाल लिया। रात को भी महिलाएं खुले आसमान के नीचे रात भर डटी रहीं। इसके बाद पुलिस-प्रशासन को बैकफुट पर आना पड़ा।
पुलिस की कार्रवाई से पहले तक जहां रात के समय धरना स्थल पर 50 से 70 लोग होते थे, वहीं महिलाओं की मौजूदगी ने इस संख्या को 250 के पार पहुंचा दिया। मंगलवार दोपहर को भी सैकड़ों किसानों के साथ महिलाओं का जमावड़ा लगा रहा। महिलाओं के पहुंचने से यह सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि हर घर की साझा लड़ाई बन चुका है। दिन के समय जब हजारों की भीड़ जुटती है, तो आसपास के गांवों से ग्रामीण भंडारे तैयार कराकर भोजन की व्यवस्था करते हैं। वहीं, रात में संकीर्तन के लिए जुटने वाली महिलाएं अपने-अपने घरों से रोटियां सेककर लाती हैं, ताकि आंदोलन की आंच धीमी न पड़े। तड़के दलिया और खिचड़ी का नाश्ता तैयार कर धरना स्थल पर माैजूद लोगों को दिया जाता है।
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चुनावी बिसात पर मिठास का हिसाब
सरकार की शुगर मिल को मल्टीयूनिट बनाने की घोषणा भी किसानों का गुस्सा शांत नहीं कर सकी। आंदोलनकारियों की शर्त है कि पहले चीनी मिल हो, उसके बाद ही एथेनाॅल प्लांट चलेगा। चुनावी मौसम में आधी आबादी के इस आक्रामक रुख ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। महिलाओं और किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि मिल की चिमनियों से धुआं नहीं निकला, तो इस बार चुनावी मैदान में जवाब दिया जाएगा।
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पुलिस की कार्रवाई से पहले तक जहां रात के समय धरना स्थल पर 50 से 70 लोग होते थे, वहीं महिलाओं की मौजूदगी ने इस संख्या को 250 के पार पहुंचा दिया। मंगलवार दोपहर को भी सैकड़ों किसानों के साथ महिलाओं का जमावड़ा लगा रहा। महिलाओं के पहुंचने से यह सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि हर घर की साझा लड़ाई बन चुका है। दिन के समय जब हजारों की भीड़ जुटती है, तो आसपास के गांवों से ग्रामीण भंडारे तैयार कराकर भोजन की व्यवस्था करते हैं। वहीं, रात में संकीर्तन के लिए जुटने वाली महिलाएं अपने-अपने घरों से रोटियां सेककर लाती हैं, ताकि आंदोलन की आंच धीमी न पड़े। तड़के दलिया और खिचड़ी का नाश्ता तैयार कर धरना स्थल पर माैजूद लोगों को दिया जाता है।
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चुनावी बिसात पर मिठास का हिसाब
सरकार की शुगर मिल को मल्टीयूनिट बनाने की घोषणा भी किसानों का गुस्सा शांत नहीं कर सकी। आंदोलनकारियों की शर्त है कि पहले चीनी मिल हो, उसके बाद ही एथेनाॅल प्लांट चलेगा। चुनावी मौसम में आधी आबादी के इस आक्रामक रुख ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। महिलाओं और किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि मिल की चिमनियों से धुआं नहीं निकला, तो इस बार चुनावी मैदान में जवाब दिया जाएगा।
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