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Mathura News: 19 वर्ष बाद भी हाजिर नहीं हो सके गवाह
Sun, 28 May 2023 11:58 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Updated Sun, 28 May 2023 11:58 PM IST
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मथुरा। पुलिस की कार्यप्रणाली के चलते 19 वर्ष पूर्व हुए खून के अवैध कारोबार का खुलासा कमजोर साबित हो रहा है। वर्ष 2004 में शहर कोतवाली क्षेत्र के जुबली पार्क में खून के अवैध कारोबार के आरोप मेें पुलिस ने पैथोलाॅजी संचालक सहित 13 को नामजद किया था। मामले में पुलिस के अलावा 22 गवाह बनाए गए। देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले यह गवाह न तो कोर्ट आए और न ही पुलिस के संपर्क में हैं। नतीजा अदालत में आरोपियों को मिल रही हैं तो सिर्फ तारीख पर तारीख।
01 अक्तूबर 2004 को सुबह करीब दस बजे कोतवाली पुलिस ने जुबली पार्क (पार्किंग कॉम्पलेक्स) में पड़े टैंट और तंबुओं में छापा मारी की। इसमें शहर के नामचीन चिकित्सकों और अस्पतालों से जुड़े पैथालॉजी संचालकों पर आरोप लगे। आरोप था कि नशीली दवाओं को प्रयोग कर लोगों का खून निकालकर मरीजों के तीमारदारों को बेचा जाता है। पुलिस को खून के इस अवैध कारोबार की जानकारी मथुरा में काम की तलाश में आए सुनील कुमार पुत्र यशवंत राव जगताप निवासी ग्राम जोता, थाना तिल्दा, जिला रायपुर छत्तीसगढ़ ने दी। उसने पुलिस को दिए बयानों में बताया कि जब वह काम की तलाश में मथुरा आया तो उसकी मुलाकात खून के कारोबारियों से हो गई। वह उसे जुबली पार्क में बने टैंट में ले गए। वहां पर नशीली दवाओं का प्रयोग कर उसका खून निकाला गया। यहां पर दो दर्जन लोग और भी मौजूद थे।
जांच अधिकारी उपनिरीक्षक राजेश दीक्षित ने पैथोलाॅजी संचालक पीकेएस चौहान, प्रवीण कुमार सहित 13 लोगों को नामजद किया था। वादी सुनील कुमार सहित पीटर डिडोसर निवासी चैंपियन जिम, ब्लॉक कोलार, कर्नाटका, रामदेव निवासी बढ़गंज, रायबरेली, श्रीनिवास महाराष्ट्र, रमेश अलीगढ़, राजेंद्र कन्नौज, अशोक सोनी ग्वालियर, बिहारी लाल बरना मध्यप्रदेश, रामेश्वर बुलंदशहर, कैलाश सिकंदराराऊ सहित 22 पीड़ितों को बतौर गवाह बनाया गया। इनमें से कुछ गवाहों को छोड़कर कोई भी अदालत में नहीं आ सका। इसके चलते आरोपी पीड़ित बन अदालत में हाजिरी लगा रहे हैं।
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तीन आरोपियों की हो चुकी है मौत
पुलिस द्वारा बनाए गए 13 आरोपियोें में से तीन की मौत हो चुकी है। मुख्य आरोपी एसपीएस चौहान, विजय वर्मा तथा गणेश की मृत्यु हो गई है। दस आरोपी अभी अदालत में हाजिरी दे रहे हैं। एक आरोपी ने बताया कि एसीजेएम प्रथम की अदालत में 7 जुलाई की तारीख लगी है। कोतवाली प्रभारी संजय कुमार पांडेय ने बताया कि पुलिस द्वारा गवाहों को लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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01 अक्तूबर 2004 को सुबह करीब दस बजे कोतवाली पुलिस ने जुबली पार्क (पार्किंग कॉम्पलेक्स) में पड़े टैंट और तंबुओं में छापा मारी की। इसमें शहर के नामचीन चिकित्सकों और अस्पतालों से जुड़े पैथालॉजी संचालकों पर आरोप लगे। आरोप था कि नशीली दवाओं को प्रयोग कर लोगों का खून निकालकर मरीजों के तीमारदारों को बेचा जाता है। पुलिस को खून के इस अवैध कारोबार की जानकारी मथुरा में काम की तलाश में आए सुनील कुमार पुत्र यशवंत राव जगताप निवासी ग्राम जोता, थाना तिल्दा, जिला रायपुर छत्तीसगढ़ ने दी। उसने पुलिस को दिए बयानों में बताया कि जब वह काम की तलाश में मथुरा आया तो उसकी मुलाकात खून के कारोबारियों से हो गई। वह उसे जुबली पार्क में बने टैंट में ले गए। वहां पर नशीली दवाओं का प्रयोग कर उसका खून निकाला गया। यहां पर दो दर्जन लोग और भी मौजूद थे।
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जांच अधिकारी उपनिरीक्षक राजेश दीक्षित ने पैथोलाॅजी संचालक पीकेएस चौहान, प्रवीण कुमार सहित 13 लोगों को नामजद किया था। वादी सुनील कुमार सहित पीटर डिडोसर निवासी चैंपियन जिम, ब्लॉक कोलार, कर्नाटका, रामदेव निवासी बढ़गंज, रायबरेली, श्रीनिवास महाराष्ट्र, रमेश अलीगढ़, राजेंद्र कन्नौज, अशोक सोनी ग्वालियर, बिहारी लाल बरना मध्यप्रदेश, रामेश्वर बुलंदशहर, कैलाश सिकंदराराऊ सहित 22 पीड़ितों को बतौर गवाह बनाया गया। इनमें से कुछ गवाहों को छोड़कर कोई भी अदालत में नहीं आ सका। इसके चलते आरोपी पीड़ित बन अदालत में हाजिरी लगा रहे हैं।
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तीन आरोपियों की हो चुकी है मौत
पुलिस द्वारा बनाए गए 13 आरोपियोें में से तीन की मौत हो चुकी है। मुख्य आरोपी एसपीएस चौहान, विजय वर्मा तथा गणेश की मृत्यु हो गई है। दस आरोपी अभी अदालत में हाजिरी दे रहे हैं। एक आरोपी ने बताया कि एसीजेएम प्रथम की अदालत में 7 जुलाई की तारीख लगी है। कोतवाली प्रभारी संजय कुमार पांडेय ने बताया कि पुलिस द्वारा गवाहों को लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।