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भक्ति के गुलाल ने भरे विधवाओं के जीवन में रंग
अमर उजाला ब्यूरो मथ्ाुरा
Updated Mon, 21 Mar 2016 11:58 PM IST
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वृंदावन और वाराणसी की विधवाओं ने पहली बार मंदिर प्रांगण में खेली होली
- फोटो : अमर उजाला
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सफेद लिबास ओढ़कर बेरंग जीवन जीने को मजबूर विधवाओं के लिए होली इस बार कुछ खास लेकर आई। धर्मनगरी में यह पहला मौका था जब वृंदावन और वाराणसी की विधवाओं ने अपने आराध्य के सामने होली खेली और उनकी भक्ति के रंग में खुद को रंग लिया। संस्था सुलभ इंटरनेशनल की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में वेदपाठी ब्राह्मणों ने मंत्रोच्चारण कर पूर्णता प्रदान की।
धर्मनगरी के सप्तदेवालयों में से एक गोपीनाथ मंदिर सोमवार को इस ऐतिहासिक रंगोत्सव का साक्षी बना। गुलाल और फूलों की होली विधवा और बेसहारा महिलाओं को उनके एकरंग वाले जीवन से बाहर निकाल लाई थी। वृंदावन के आश्रय सदन में रह रहीं कोलकाता की गीतादासी, सबिता, मधुमितादासी और दुर्गादासी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ही उनके आश्रयदाता हैं। ऐसे में इस उनके साथ होली खेलना आध्यात्मिक अनुभव रहा। यूं तो हम पहले भी होली खेलते थे लेकिन इस बार की होली ठाकुरजी के साथ मनाने से खास हो गई। पहली बार ही यह आयोजन एक मंदिर के प्रांगण में किया गया।
संस्था सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक डाक्टर विंदेश्वर पाठक ने कहा कि मंदिरों की नगरी वृंदावन में यह पहला मौका है जब विधवाओं के कार्यक्रम में वेदपाठी ब्राह्मण भी शामिल हुए। यह विधवाओं की जिंदगी में नई उम्मीद लेकर आया है, जो विधवाओं के होली खेलने और रंगीन वस्त्र पहनने जैसे रूढ़िवादी विचारों के खिलाफ नई पहल का प्रतीक है। आयोजन के जरिए संस्था विधवाओं को समाज की मुख्यधारा में शामिल कराना चाहती है। ब्रज में होली जैसे कार्यक्रम इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
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संस्था के पीआरओ मदन झा ने बताया कि सुलभ इंटरनेशनल विधवाओं के लिए तीन साल से होली और दीपावली त्योहार का आयोजन कर रहा है। तीन साल से विधवाओं के आश्रम में भी होली का त्योहार मनाया जा रहा है। गोपीनाथ मंदिर में आयोजित होली में विभिन्न रंगों के करीब डेढ़ क्विंटल गुलाल और डेढ़ क्विंटल गुलाब व गेंदे के फूल की पंखुड़ियों का इंतजाम किया गया था।
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धर्मनगरी के सप्तदेवालयों में से एक गोपीनाथ मंदिर सोमवार को इस ऐतिहासिक रंगोत्सव का साक्षी बना। गुलाल और फूलों की होली विधवा और बेसहारा महिलाओं को उनके एकरंग वाले जीवन से बाहर निकाल लाई थी। वृंदावन के आश्रय सदन में रह रहीं कोलकाता की गीतादासी, सबिता, मधुमितादासी और दुर्गादासी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ही उनके आश्रयदाता हैं। ऐसे में इस उनके साथ होली खेलना आध्यात्मिक अनुभव रहा। यूं तो हम पहले भी होली खेलते थे लेकिन इस बार की होली ठाकुरजी के साथ मनाने से खास हो गई। पहली बार ही यह आयोजन एक मंदिर के प्रांगण में किया गया।
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संस्था सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक डाक्टर विंदेश्वर पाठक ने कहा कि मंदिरों की नगरी वृंदावन में यह पहला मौका है जब विधवाओं के कार्यक्रम में वेदपाठी ब्राह्मण भी शामिल हुए। यह विधवाओं की जिंदगी में नई उम्मीद लेकर आया है, जो विधवाओं के होली खेलने और रंगीन वस्त्र पहनने जैसे रूढ़िवादी विचारों के खिलाफ नई पहल का प्रतीक है। आयोजन के जरिए संस्था विधवाओं को समाज की मुख्यधारा में शामिल कराना चाहती है। ब्रज में होली जैसे कार्यक्रम इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
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संस्था के पीआरओ मदन झा ने बताया कि सुलभ इंटरनेशनल विधवाओं के लिए तीन साल से होली और दीपावली त्योहार का आयोजन कर रहा है। तीन साल से विधवाओं के आश्रम में भी होली का त्योहार मनाया जा रहा है। गोपीनाथ मंदिर में आयोजित होली में विभिन्न रंगों के करीब डेढ़ क्विंटल गुलाल और डेढ़ क्विंटल गुलाब व गेंदे के फूल की पंखुड़ियों का इंतजाम किया गया था।