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फटे पुराने कपड़े से जूते-चप्पल तैयार कर रहे विश्वनाथ
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वृंदावन। हुनर हाट में पश्चिम बंगाल से आए विश्वनाथ दास का हुनर देखने लायक है। वह फटे-पुराने कपड़े से नए जूते-चप्पल तैयार कर रहे हैं। इनके बनाए जूते बेहद खूबसूरत हैं और पहनने में आरामदायक भी हैं। पसीना सोख लेते हैं और एड़ी के दर्द में राहत पहुंचाते हैं।
विश्वनाथ पिछले लगभग 18 वर्ष से जूट से जूते बनाते आ रहे हैं, लेकिन पिछले साल से कपड़े से जूते तैयार कर रहे हैं। इस काम में इनका पूरा परिवार लगा है। रोज ढाई सौ जोड़ी जूता बनाते हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना महामारी के चलते सरकार ने देशभर में लॉकडाउन लगाया तो जूट मिलना बंद हो गई। इससे उनका काम बंद हो गया। इसी दौरान उनके दिमाग में फटे-पुराने कपड़ों से जूते तैयार करने का आइडिया आया।
उन्होंने इसे अमलीजामा पहनाने के लिए कपड़े से जूते बनाने शुरू कर दिए। पहले तो कुछ दिक्कत आई, लेकिन अब वह बेहद खूबसूरत जूते बनाते हैं और मात्र दो सौ रुपये में बेचते हैं। इनके बनाए जूते खरीदने के लिए स्टाल पर भीड़ लगी रहती है। कहा कि इससे पर्यावरण संरक्षण भी होता है। लोग फटा पुुराना कपड़ा जहां-तहां फेंक देते हैं, जिससे गंदगी बढ़ती है, जो पर्यावरण के लिए खतरा है। वह इन कपड़ों का सही इस्तेमाल करते हैं। हुनर हाट से उनके हुनर को और पहचान मिली है।
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लजीज पकवानों का लोग उठा रहे लुत्फ
वृंदावन (मथुरा)। हुनर हाट में आने वाले लोग देश के पारंपरिक लजीज पकवानों का लुत्फ भी उठा रहे हैं। वहीं देश के जाने-माने कलाकारों द्वारा हर दिन पेश किए जाने वाले अलग-अलग सांस्कृतिक कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र बने हैं। हुनर हाट में हर दिन शाम को आत्मनिर्भर भारत थीम पर गीत संगीत के कार्यक्रम हो रहे हैं। इन कार्यक्रमों में कैलाश खेर, सुरेश वाडेकर और पुनीत इस्सर जैसे कलाकार अपनी प्रस्तुति से लोगों का मनोरंजन भी करेंगे। संवाद
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विश्वनाथ पिछले लगभग 18 वर्ष से जूट से जूते बनाते आ रहे हैं, लेकिन पिछले साल से कपड़े से जूते तैयार कर रहे हैं। इस काम में इनका पूरा परिवार लगा है। रोज ढाई सौ जोड़ी जूता बनाते हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना महामारी के चलते सरकार ने देशभर में लॉकडाउन लगाया तो जूट मिलना बंद हो गई। इससे उनका काम बंद हो गया। इसी दौरान उनके दिमाग में फटे-पुराने कपड़ों से जूते तैयार करने का आइडिया आया।
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उन्होंने इसे अमलीजामा पहनाने के लिए कपड़े से जूते बनाने शुरू कर दिए। पहले तो कुछ दिक्कत आई, लेकिन अब वह बेहद खूबसूरत जूते बनाते हैं और मात्र दो सौ रुपये में बेचते हैं। इनके बनाए जूते खरीदने के लिए स्टाल पर भीड़ लगी रहती है। कहा कि इससे पर्यावरण संरक्षण भी होता है। लोग फटा पुुराना कपड़ा जहां-तहां फेंक देते हैं, जिससे गंदगी बढ़ती है, जो पर्यावरण के लिए खतरा है। वह इन कपड़ों का सही इस्तेमाल करते हैं। हुनर हाट से उनके हुनर को और पहचान मिली है।
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लजीज पकवानों का लोग उठा रहे लुत्फ
वृंदावन (मथुरा)। हुनर हाट में आने वाले लोग देश के पारंपरिक लजीज पकवानों का लुत्फ भी उठा रहे हैं। वहीं देश के जाने-माने कलाकारों द्वारा हर दिन पेश किए जाने वाले अलग-अलग सांस्कृतिक कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र बने हैं। हुनर हाट में हर दिन शाम को आत्मनिर्भर भारत थीम पर गीत संगीत के कार्यक्रम हो रहे हैं। इन कार्यक्रमों में कैलाश खेर, सुरेश वाडेकर और पुनीत इस्सर जैसे कलाकार अपनी प्रस्तुति से लोगों का मनोरंजन भी करेंगे। संवाद