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UP: कागजों के खेल में ऐसी फंसी 98 वर्षीय विद्या देवी, 26 साल में भी खुद को जिंदा साबित न कर सकीं...हो गई मौत
Fri, 04 Apr 2025 03:22 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 04 Apr 2025 03:22 PM IST
सार
19 करोड़ रुपये की जमीन हथियाने के लिए वृद्धा को जीते जी मार दिया गया। कागजों के खेल में वृद्धा ऐसी फंसी कि 26 साल में खुद को जिंदा साबित नहीं कर सकीं। वृद्धा की मौत के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं।
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मथुरा। विद्या देवी का फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
19 करोड़ की जमीन हथियाने के लिए वृद्धा को मायके पक्ष ने मृत दर्शा दिया। 26 साल तक महिला खुद को कागजों में जिंदा करने के लिए जद्दोजहद करती रही, लेकिन ऐसा नहीं कर पाई और 18 मार्च को महिला की मौत हो गई। कुछ यही हुआ सुरीर थाने के सुरीर कलां बांगर निवासी 98 वर्षीय वृद्धा विद्या देवी के साथ।
अलीगढ़ के थाना लोधा स्थित गांव बढौन निवासी वृद्धा के पुत्र सुनील कुमार ने बताया कि उनकी मां अपने माता-पिता की इकलौती संतान थीं। उनके नाना निद्धा सिंह ने 18 मार्च 1975 को 6.42 एकड़ जमीन की वसीयत उनकी मां के नाम की। 1995 में उनके नाना की मौत हो गई। इसके बाद ननिहाल पक्ष के रिश्तेदार सुरीर कला निवासी दिनेश, सुरेश, ओमप्रकाश ने फर्जी दस्तावेज तैयार उनकी मां को मृत दर्शाया।
उनके मरे हुए नाना को जिंदा दिखाते हुए 19 करोड़ रुपये की जमीन का बैनामा करा लिया। उनकी मां 26 साल तक अपनी जमीन को वापस लेने के लिए पुलिस, प्रशासन और कोर्ट के चक्कर लगाती रहीं। अंत में 18 मार्च 2025 को उनकी मां का देहांत हो गया।
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आगरा कमिश्नर एवं तत्कालीन डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह के निर्देश पर एसडीएम ने मामले की जांच की। जांच के बाद 18 फरवरी 2025 को सुनील की तहरीर के आधार पर सुरीर पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की। 29 मार्च को दिनेश और सुरेश को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जबकि तीसरा आरोपी ओमप्रकाश अभी तक पुलिस की पकड़ से दूर है। सीओ मांट गुंजन सिंह ने बताया कि नए थानाध्यक्ष अभय शर्मा को वांछित की गिरफ्तारी के निर्देश दिए हैं।
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अलीगढ़ के थाना लोधा स्थित गांव बढौन निवासी वृद्धा के पुत्र सुनील कुमार ने बताया कि उनकी मां अपने माता-पिता की इकलौती संतान थीं। उनके नाना निद्धा सिंह ने 18 मार्च 1975 को 6.42 एकड़ जमीन की वसीयत उनकी मां के नाम की। 1995 में उनके नाना की मौत हो गई। इसके बाद ननिहाल पक्ष के रिश्तेदार सुरीर कला निवासी दिनेश, सुरेश, ओमप्रकाश ने फर्जी दस्तावेज तैयार उनकी मां को मृत दर्शाया।
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उनके मरे हुए नाना को जिंदा दिखाते हुए 19 करोड़ रुपये की जमीन का बैनामा करा लिया। उनकी मां 26 साल तक अपनी जमीन को वापस लेने के लिए पुलिस, प्रशासन और कोर्ट के चक्कर लगाती रहीं। अंत में 18 मार्च 2025 को उनकी मां का देहांत हो गया।
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आगरा कमिश्नर एवं तत्कालीन डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह के निर्देश पर एसडीएम ने मामले की जांच की। जांच के बाद 18 फरवरी 2025 को सुनील की तहरीर के आधार पर सुरीर पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की। 29 मार्च को दिनेश और सुरेश को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जबकि तीसरा आरोपी ओमप्रकाश अभी तक पुलिस की पकड़ से दूर है। सीओ मांट गुंजन सिंह ने बताया कि नए थानाध्यक्ष अभय शर्मा को वांछित की गिरफ्तारी के निर्देश दिए हैं।