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भगवान, हमलावरों को कभी माफ नहीं करेगा
ब्यूरो, अमर उजाला वृंदावन
Updated Sat, 07 Nov 2015 11:27 PM IST
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पांच अक्तूबर की रात भजनकुटी पर कब्जे के प्रयास को लेकर हुए हमले की दहशत पीड़ित वृद्ध महिलाओं और साधुओं की आंखों में एक दिन बाद भी देखी जा सकती है। कोई भी आरोपियों के खिलाफ कड़ी और शीघ्र कार्रवाई को लेकर आश्वस्त नहीं है।
मूलरूप से नेपाल की रहने वाली 85 वर्षीय गीतादासी वृंदावन के भजन कुटी में पिछले 45 वर्ष से रहकर भजन कर रही हैं। रोती हुई अपना बचा हुआ सामान बटोर रहीं गीता बोलीं कि भगवान हमलावरों को कभी माफ नहीं करेगा। ऐसा मंजर पहली बार देखा।
80 वर्षीय रामशरण ने बताया कि वे भजन करने के लिए ही नेपाल से वृंदावन धाम आए थे। नेपाली समाज की यह भजनकुटी ही उनका आशियाना रही।
हमलावरों ने इसे तहस-नहस कर डाला। उन्होंने बताया कि हम लोगों ने डरकर खुले आसमान के नीचे रात गुजारी। सुबह कुछ लोगाें ने एक टेंट लगाया। प्रशासन की ओर से किसी भी प्रकार की कोई मदद नहीं की। लेकिन संत और वृंदावनवासी मदद को आगे आ रहे हैं।
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भजनकुटी प्रकरण
पांच अक्तूबर की रात 50-60 लोगों ने गांव राजपुर स्थित नेपाली समाज के डेढ़ सौ वर्ष पुरानी भजनकुटी सेवा संस्थान पर कब्जे का प्रयास किया। दो जेसीबी मशीनों से निर्माण ढहा दिए, विरोध करने पर साधुओं, विधवा महिलाओं और विद्यार्थियों को पीटा। फायरिंग कर दहशत फैलाई। कुछ लोगों को जबरन कार में उठा ले जाने की बात भी कही जा रही है। मामले में संस्थान के सचिव बालकृष्ण देवाचार्य की ओर से आठ लोगों को नामजद किया गया है।
नेपाली मित्र परिषद ने की निंदा
भजनकुटी पर कब्जे के प्रयास की नेपाली मित्र परिषद ने भी निंदा की है। परिषद के सचिव पुष्पाराज ने इसे भारत-नेपाल के बीच संबंधों को बिगाड़ने वाली घटना करार दिया। उनका कहना है कि भजनकुटी नेपाली समाज की प्राचीन स्थली है।
यहां दर्जनों वृद्ध संत और वृद्ध महिलाएं, जिनमें अधिकांश विधवाएं है, रहती हैं। भजनकुटी पर पहले भी कब्जे का प्रयास हुआ लेकिन पुलिस ने सही कार्रवाई नहीं की। अगर पूर्व की शिकायतों पर समय से कार्रवाई होती तो इतनी बड़ी घटना नहीं होती।
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मूलरूप से नेपाल की रहने वाली 85 वर्षीय गीतादासी वृंदावन के भजन कुटी में पिछले 45 वर्ष से रहकर भजन कर रही हैं। रोती हुई अपना बचा हुआ सामान बटोर रहीं गीता बोलीं कि भगवान हमलावरों को कभी माफ नहीं करेगा। ऐसा मंजर पहली बार देखा।
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80 वर्षीय रामशरण ने बताया कि वे भजन करने के लिए ही नेपाल से वृंदावन धाम आए थे। नेपाली समाज की यह भजनकुटी ही उनका आशियाना रही।
हमलावरों ने इसे तहस-नहस कर डाला। उन्होंने बताया कि हम लोगों ने डरकर खुले आसमान के नीचे रात गुजारी। सुबह कुछ लोगाें ने एक टेंट लगाया। प्रशासन की ओर से किसी भी प्रकार की कोई मदद नहीं की। लेकिन संत और वृंदावनवासी मदद को आगे आ रहे हैं।
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भजनकुटी प्रकरण
पांच अक्तूबर की रात 50-60 लोगों ने गांव राजपुर स्थित नेपाली समाज के डेढ़ सौ वर्ष पुरानी भजनकुटी सेवा संस्थान पर कब्जे का प्रयास किया। दो जेसीबी मशीनों से निर्माण ढहा दिए, विरोध करने पर साधुओं, विधवा महिलाओं और विद्यार्थियों को पीटा। फायरिंग कर दहशत फैलाई। कुछ लोगों को जबरन कार में उठा ले जाने की बात भी कही जा रही है। मामले में संस्थान के सचिव बालकृष्ण देवाचार्य की ओर से आठ लोगों को नामजद किया गया है।
नेपाली मित्र परिषद ने की निंदा
भजनकुटी पर कब्जे के प्रयास की नेपाली मित्र परिषद ने भी निंदा की है। परिषद के सचिव पुष्पाराज ने इसे भारत-नेपाल के बीच संबंधों को बिगाड़ने वाली घटना करार दिया। उनका कहना है कि भजनकुटी नेपाली समाज की प्राचीन स्थली है।
यहां दर्जनों वृद्ध संत और वृद्ध महिलाएं, जिनमें अधिकांश विधवाएं है, रहती हैं। भजनकुटी पर पहले भी कब्जे का प्रयास हुआ लेकिन पुलिस ने सही कार्रवाई नहीं की। अगर पूर्व की शिकायतों पर समय से कार्रवाई होती तो इतनी बड़ी घटना नहीं होती।