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Mathura News: 30 फीट गहरे बोरवेल में गिरे दो कस्तूरी बिलाव को बचाया
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मथुरा। बोरवेल से निकालने के बाद कस्तूरी बिलाव को छोड़ते एसओएस वाइल्डलाइफ टीम के सदस्य। स्वयं
- फोटो : mathura
मथुरा। फरह के पास स्थित घड़ी रोसू गांव के खेते में 30 फुट गहरे बोरवेल से दो कस्तूरी बिलाव दिखे। ग्रामीणों की सूचना पर वाइल्डलाइफ एसओएस की टीम पहुंची और उन्हें बचाया।
एसओएस के मीडिया प्रभारी श्रेष्ठ पचौरी ने बताया कि ग्रामीणों ने फोन पर दो छोटे जानवरों बोरवेल में फंसे होने की जानकारी दी। दो सदस्यीय टीम ने स्थिति का आकलन किया और जानवरों की पहचान स्मॉल इंडियन सिवेट कैट यानी कस्तूरी बिलाव के रूप में की। बचाव दल ने सावधानी से बोरवेल में पिंजरा उतारा। जानवरों के तनाव को ध्यान में रखते हुए उन्हें सुरक्षित रूप से बाहर निकाला।
इसके बाद उन्हें वाइल्डलाइफ एसओएस ट्रांजिट फैसिलिटी में लाया गया। उन्हें को कोई चोट नहीं आई, लेकिन एनजीओ ने एहतियात के तौर पर उन्हें निगरानी में रखा। कुछ घंटों के बाद दोनों को वापस उनके उपयुक्त प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।
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वाइल्डलाइफ एसओएस के निदेशक कंजरवेशन प्रोजेक्ट्स, बैजूराज एमवी ने कहा कि खुशी है कि लोग संकट में फंसे जानवरों की मदद करने के लिए जागरूक हैं। सह संस्थापक और सीईओ, कार्तिक सत्यनारायण ने कहा कि इस तरह के गहरे बोरवेल कभी-कभी जंगली जानवरों के लिए जानलेवा बन सकते हैं। इस मामले में बचाव टीम को यह सुनिश्चित करने के लिए अत्यधिक सावधानी बरतनी पड़ी कि सिवेट को सुरक्षित रूप से बाहर निकाला जाए। संवाद
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एसओएस के मीडिया प्रभारी श्रेष्ठ पचौरी ने बताया कि ग्रामीणों ने फोन पर दो छोटे जानवरों बोरवेल में फंसे होने की जानकारी दी। दो सदस्यीय टीम ने स्थिति का आकलन किया और जानवरों की पहचान स्मॉल इंडियन सिवेट कैट यानी कस्तूरी बिलाव के रूप में की। बचाव दल ने सावधानी से बोरवेल में पिंजरा उतारा। जानवरों के तनाव को ध्यान में रखते हुए उन्हें सुरक्षित रूप से बाहर निकाला।
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इसके बाद उन्हें वाइल्डलाइफ एसओएस ट्रांजिट फैसिलिटी में लाया गया। उन्हें को कोई चोट नहीं आई, लेकिन एनजीओ ने एहतियात के तौर पर उन्हें निगरानी में रखा। कुछ घंटों के बाद दोनों को वापस उनके उपयुक्त प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।
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वाइल्डलाइफ एसओएस के निदेशक कंजरवेशन प्रोजेक्ट्स, बैजूराज एमवी ने कहा कि खुशी है कि लोग संकट में फंसे जानवरों की मदद करने के लिए जागरूक हैं। सह संस्थापक और सीईओ, कार्तिक सत्यनारायण ने कहा कि इस तरह के गहरे बोरवेल कभी-कभी जंगली जानवरों के लिए जानलेवा बन सकते हैं। इस मामले में बचाव टीम को यह सुनिश्चित करने के लिए अत्यधिक सावधानी बरतनी पड़ी कि सिवेट को सुरक्षित रूप से बाहर निकाला जाए। संवाद