{"_id":"6567809e0c702e243c06a976","slug":"there-is-a-need-to-improve-intellectual-level-for-a-happy-life-premanand-mathura-news-c-369-1-mt11004-4577-2023-11-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुखी जीवन के लिए बौद्धिक स्तर में सुधार की जरूरत: प्रेमानंद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सुखी जीवन के लिए बौद्धिक स्तर में सुधार की जरूरत: प्रेमानंद
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वृंदावन। संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत बुधवार सुबह स्वामी प्रेमानंद महाराज से मिलने उनके रमणरेती क्षेत्र स्थित आश्रम पहुंचे। भागवत ने कहा कि आपका वीडियो देखा और अहसास हुआ कि आपसे मिलना चााहिए।
संत प्रेमानंद ने संघ प्रमुख से कहा कि सेवा के लिए पूरा जगत दिया है। सेवा भी दो तरह की है एक व्यावहारिक और दूसरी आध्यात्मिक सेवा। उन्होंने कहा कि देशवासियों को सिर्फ सुख सुविधाएं देकर सुखी नहीं किया जा सकता। उन्हें सुखी करने के लिए बौद्धिक स्तर में सुधार लाने की आवश्यकता है। वर्तमान में युवाओं का बौद्धिक स्तर गिरता चला जा रहा है, जो कि चिंता का विषय है। हमारे देश में धर्म की प्रधानता है।
देशवासी तभी सुखी हो सकते हैं जब उनके मन से हिंसात्मकता, मलीनता दूर हो। जिस तरह भगवान राम और कृष्ण पूजनीय है, उतना ही भारत देश पूजनीय है। राष्ट्र की सेवा ही धर्म का परिचायक है। वर्तमान में जो मानसिकता बन रही है वह धर्म और देश के लिए हितकर नहीं है। व्यसन, व्याभिचार और हिंसा बढ़ रही है। संघ प्रमुख मोहन भागवत और प्रेमानंद महाराज के बीच करीब 15 मिनट तक बातचीत हुई। इसके बाद संघ प्रमुख मथुरा के लिए रवाना हो गए।
विज्ञापन
विज्ञापन
संत प्रेमानंद ने संघ प्रमुख से कहा कि सेवा के लिए पूरा जगत दिया है। सेवा भी दो तरह की है एक व्यावहारिक और दूसरी आध्यात्मिक सेवा। उन्होंने कहा कि देशवासियों को सिर्फ सुख सुविधाएं देकर सुखी नहीं किया जा सकता। उन्हें सुखी करने के लिए बौद्धिक स्तर में सुधार लाने की आवश्यकता है। वर्तमान में युवाओं का बौद्धिक स्तर गिरता चला जा रहा है, जो कि चिंता का विषय है। हमारे देश में धर्म की प्रधानता है।
विज्ञापन
देशवासी तभी सुखी हो सकते हैं जब उनके मन से हिंसात्मकता, मलीनता दूर हो। जिस तरह भगवान राम और कृष्ण पूजनीय है, उतना ही भारत देश पूजनीय है। राष्ट्र की सेवा ही धर्म का परिचायक है। वर्तमान में जो मानसिकता बन रही है वह धर्म और देश के लिए हितकर नहीं है। व्यसन, व्याभिचार और हिंसा बढ़ रही है। संघ प्रमुख मोहन भागवत और प्रेमानंद महाराज के बीच करीब 15 मिनट तक बातचीत हुई। इसके बाद संघ प्रमुख मथुरा के लिए रवाना हो गए।
विज्ञापन