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नेपाल- भारत के बीच अटूट संबंध जग जाहिर: थकाली
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वृंदावन। नेपाल-भारत मैत्री संगठन द्वारा शनिवार को रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम के स्वामी विवेकानंद ऑडिटोरियम में नेपाल-भारत अंतरराष्ट्रीय मैत्री संगम कार्यक्रम का शुभारंभ किया। नेपाल के सांसद योगेश गौचन थकाली, राजेंद्र प्रजापति, महापौर विनोद अग्रवाल ने दीप जलाकर किया। कार्यक्रम में दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संगम द्वारा संबंधों को और प्रगाढ़ करने पर जोर दिया गया।
मैत्री संगम में नेपाली सांसद योगश गौचन थकाली ने कहा कि भारत और नेपाल के संबंध आदिकाल से ही चले आ रहे हैं। देश भले ही अलग हों, लेकिन दोनों देशों की सांस्कृतिक विरासत एक ही है और दोनों देशों के बीच अटूट संबंध किसी से छिपे नहीं हैं। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संगम नेपाल-भारत मैत्री संगम के उद्देश्य को और भी मजबूत करेगा।
संगठन के विदेश विभाग प्रमुख सम थापा ने कहा कि वृंदावन संगम नेपाल और भारत के लोगों के बीच के संबंधों को और अधिक सौहार्दपूर्ण बनाने में मदद करेगा। देश एक भाषा अनेक, फिर भी संस्कृति एक के मुख्य नारे के साथ दोनों देशों के संबंधों पर विशेषज्ञों के बीच वार्ता शुरू हुई है जो कि तीन दिन तक लगातार चलेगी। सम्मेलन में नेपाल के शिक्षाविद्, चिकित्सक, विश्लेषकों के अलावा समाज के विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाले लोग मौजूद रहे।
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सम्मेलन में महामंडलेश्वर शैलेशानंद गिरि, स्वामी पुरुषोत्तम दास, आचार्य मोहन लाल, साध्वी ऋचा रेनुका, डाॅ. राकेशचंद्र चतुर्वेदी, पार्षद शशांक शर्मा, डाॅ. कौशल कुमार मिश्रा, काठमांडु महानगर के पूर्व मेयर राजाराम श्रेष्ठ समेत दोनों देशों के लगभग 300 प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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मैत्री संगम में नेपाली सांसद योगश गौचन थकाली ने कहा कि भारत और नेपाल के संबंध आदिकाल से ही चले आ रहे हैं। देश भले ही अलग हों, लेकिन दोनों देशों की सांस्कृतिक विरासत एक ही है और दोनों देशों के बीच अटूट संबंध किसी से छिपे नहीं हैं। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संगम नेपाल-भारत मैत्री संगम के उद्देश्य को और भी मजबूत करेगा।
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संगठन के विदेश विभाग प्रमुख सम थापा ने कहा कि वृंदावन संगम नेपाल और भारत के लोगों के बीच के संबंधों को और अधिक सौहार्दपूर्ण बनाने में मदद करेगा। देश एक भाषा अनेक, फिर भी संस्कृति एक के मुख्य नारे के साथ दोनों देशों के संबंधों पर विशेषज्ञों के बीच वार्ता शुरू हुई है जो कि तीन दिन तक लगातार चलेगी। सम्मेलन में नेपाल के शिक्षाविद्, चिकित्सक, विश्लेषकों के अलावा समाज के विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाले लोग मौजूद रहे।
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सम्मेलन में महामंडलेश्वर शैलेशानंद गिरि, स्वामी पुरुषोत्तम दास, आचार्य मोहन लाल, साध्वी ऋचा रेनुका, डाॅ. राकेशचंद्र चतुर्वेदी, पार्षद शशांक शर्मा, डाॅ. कौशल कुमार मिश्रा, काठमांडु महानगर के पूर्व मेयर राजाराम श्रेष्ठ समेत दोनों देशों के लगभग 300 प्रतिनिधि मौजूद रहे।