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Mathura News: प्रबंधन के आरोपों पर प्राचार्य हुए मुखर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 05 Dec 2025 12:54 AM IST
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The Principal spoke out against the management's allegations.
मथुरा। अग्रवाल शिक्षा मंडल द्वारा संचालित 70 साल पुराने बाबू शिवनाथ अग्रवाल महाविद्यालय (बीएसए) में प्रबंधतंत्र और प्राचार्य के मध्य चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रबंधतंत्र के आरोपों के बाद कॉलेज के प्राचार्य ने पदाधिकारियों पर वित्तीय अनियमितता समेत कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय से मिले अनुमोदन पर भी सवाल खड़े किए हैं।
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प्राचार्य डॉ. ललित मोहन शर्मा ने बृहस्पतिवार को कॉलेज में आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा कि बीएसए कॉलेज की 14.5 एकड़ भूमि को फर्जी पत्र के माध्यम से हड़प कर बीएसए के नाम से ही पृथक इंजीनियरिंग कॉलेज बना दिया गया है। इसका खुलासा आरटीआई से मिले जवाब से हुआ है। वहीं शिक्षकों की फर्जी तैनाती दिखाकर सरकारी धन का बंदरबांट किया है। जिन सात शिक्षकों को इंजीनियरिंग कॉलेज में दर्शाया गया है, वे दूसरी संस्था में काम कर रहे हैं। उनके नाम पर हर माह 2.80 लाख वेतन निकाला जा रहा है। बताया कि जिन दस्तावेज पर प्रबंध समिति ने अनुमोदन लिया है, वह अधिकतर फर्जी हैं। प्रबंधतंत्र ने सुनवाई के 20 दिन बाद अपना शपथ पत्र दिया है जोकि गलत है। एसटीएफ और शासन की जांच इस पूरे प्रकरण में अभी तक लंबित है। प्रेसवार्ता में प्रो. एसके राय, प्रो. एसके कटारिया, डॉ. वीपी राय, डॉ. वीके गोस्वामी, डॉ. यूके त्रिपाठी, डॉ. आरएस गौतम, रवीश शर्मा, डॉ. रेखा राय, बीबी यादव आदि मौजूद रहे।
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कॉलेज के शिक्षक को इंजीनियरिंग में बनाया प्रोफेसर
प्राचार्य ने बताया कि ब्रजभूषण यादव बीएसए डिग्री कॉलेज में शिक्षक हैं। उन्हें इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रोफेसर दिखाया है। अमित वर्मा, अजय गुप्ता, गिरीश त्रिपाठी, भगवान सिंह समेत कई अन्य शिक्षक पहले से दूसरी संस्था में काम कर रहे हैं। उन्हें इंजीनियरिंग कॉलेज का अनुमोदन लेने के लिए एआईसीटीई में तैनात दिखाया है। वर्ष 2011 से 2019 तक कॉलेज के 67 लाख रुपये लीगल एडवाइजरी में खर्च किए गए हैं।
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एकल संचालन का दावा
प्राचार्य ने बताया कि बीएसए कॉलेज में एकल संचालन है। अनुमोदन के लिए विश्वविद्यालय को गुमराह किया गया है। एसटीएफ जांच कर रही है। शासन की ओर से धारा 40 में जांच लंबित है। ऐसे में अनुमोदन कैसे संभव है। इस मामले में प्रबंधतंत्र के कई पदाधिकारियों को जेल की हवा खानी पड़ सकती है।
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