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UP: जिस कल्पतरु ग्रुप पर ईडी ने मारा छापा, उसके मालिक जीते थे शाही जिंदगी; कोरोना से हुई थी मौत

Thu, 19 Dec 2024 09:51 AM IST
धीरेन्द्र सिंह संंवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संंवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Thu, 19 Dec 2024 09:51 AM IST
सार

लुभावनी स्कीम के जरिये भूखंड और फ्लैट देने का लालच देकर निवेशकों का करोड़ों रुपये हड़पने वाले कल्पतरु ग्रुप पर ईडी ने छापा मारा। ये कंपनी जयकृष्ण सिंह राणा की है, जिनकी कोरोना काल में मृत्यु हो चुकी है। 
 

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The owner of Kalpataru Group which was raided by ED lived a royal life died of corona
जयकृष्ण राणा का फाइल फोटो और ईडी का छापा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

मथुरा के फरह के गांव चुरमुरा के रहने वाले जयकृष्ण सिंह राणा ने चुरमुरा से ही कल्पतरू कंपनी की शुरुआत की थी। हालांकि वह बाद में मोतीकुंज मथुरा में रहने लगा था। इस कंपनी पर आरोप लगा है कि इसने कई तरीकों से लोगों को करोड़ों रुपये का चूना लगाया। फरह पुलिस और प्रशासन ने चुरमुरा में इस समूह की 66.32 करोड़ की सपंत्ति भी कुर्क की है।
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इस कंपनी पर फ्लैट की एवज में खरीदारों से लिए गए 150 करोड़ रुपये हड़पने का आरोप है। इसी की बदले कल्पतरू कंपनी की बेशकीमती जमीन को कुर्क किया गया। इसके बाद पौरा और बधाया में भी संपत्ति कुर्की की कार्रवाई की जा चुकी है। पुलिस के मुताबिक यह कंपनी जयकृष्ण सिंह राणा की थी। कंपनी ने यहां फ्लैट बनाने का काम शुरू किया था न तो लोगों को फ्लैट दिए और न ही खरीदारों को उनकी रकम वापस की। इस निवेशक ने तो पैसा वापस न मिलने पर अधबने फ्लैट में ही आत्महत्या कर ली थी। इस मामले में साल 2017 से 2020 तक ही करीब 46 मुकदमे दर्ज कराए गए थे। तभी से ईडी इसकी जांच कर रही है। बलदेव विधायक पूरन प्रकाश से भी इस बाबत एक बार ईडी पूछताछ कर चुकी है।

 
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चिटफंड कंपनी से से खेला सारा खेल
जयकृष्ण ने चिटफंड कंपनी बनाकर पूरा खेल खेला। इस कंपनी में अपने साथियों को निदेशक बनाकर जालसाजी शुरू की गई। चिटफंड कंपनी में पैसा दोगुना करने का लालच देकर लोगों को झांसे में लिया। इसके बाद चुरमुरा सहित अन्य जगहों पर फ्लैट बनाने शुरू किए। इन फ्लैटों की बुकिंग की एवज में सोनीपत, पानीपत, आगरा, अलीगढ़, मथुरा और अन्य जनपदों के लोगों से मोटी रकम वसूली, लेकिन आज तक फ्लैट तैयार नहीं हुए हैं। मध्यप्रदेश समेत अन्य कई राज्यों के लोगों को भी ठगा गया।

 
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कोरोना में हो गई थी मौत
बताया यह जाता है कि कोरोना काल में नयति हॉस्पिटल में उसकी मौत हो गई थी। उसके बेटे जयकरण ने शव को अपनी सुपुर्दगी में लिया था। जयकृष्ण की मौत वास्तव में हुई या नहीं यह भी जांच का विषय रहा और पुलिस ने उसकी मौत की जांच भी की, जो आज तक चल रही है।

 

ऐश की जिंदगी जीता था...
जयकृष्ण शाही जिंदगी जीता था। उसके चुरमुरा फार्म हाउस में हाथी, घोड़े, हिरण, भालू आदि जानवर थे। आसपास के ग्रामीण जानवरों को देखने के लिए उसके फार्म हाउस में जाते थे। इसके अलावा उसके कई मॉल थे। गांव चुरमुरा में ही उसने बड़ी संख्या में जमीन खरीदकर फ्लैट बनाने का काम शुरू किया।
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