{"_id":"6ad285a68d1eed0fa105221f","slug":"the-insurance-company-will-pay-rs-1530-lakh-to-the-deceased-drivers-wife-mathura-news-c-369-1-mt11002-154349-2026-10-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mathura News: बीमा कंपनी देगी मृत चालक की पत्नी को 15.30 लाख रुपये","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mathura News: बीमा कंपनी देगी मृत चालक की पत्नी को 15.30 लाख रुपये
विज्ञापन
मथुरा। हादसे में ट्रैक्टर चालक की मौत के बाद कंपनी ने बीमा दावा खारिज कर दिया था। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा कंपनी को 15.30 लाख रुपये देने का निर्णय सुनाया है।
नौहझील थाना क्षेत्र के गांव तिलकागढ़ी निवासी विमला ने एक अक्तूबर 2021 को आयोग में वाद दायर किया। उन्होंने बताया कि उनके पति बलवीर उर्फ बलजीत 26 जून 2019 की सुबह ट्रैक्टर लेकर घर से निकले और रास्ते में हादसे का शिकार हो गए। दो दिन बाद अस्पताल में उनकी मौत हो गई। बलवीर ने ट्रैक्टर का (व्यक्तिगत दुर्घटना कवर) चालक सहित बीमा 24 अप्रैल 2019 से 25 अप्रैल 2020 तक के लिए कराया था। पुलिस प्राथमिकी दर्ज होने के बाद उन्होंने बीमा दावे के लिए एचडीएफसी जनरल इंश्योरेंस कंपनी आगरा को कागजात भेजे। आरोप है कि कंपनी ने वैध एवं प्रभावी ड्राइविंग लाइसेंस के अभाव में दावा खारिज कर दिया। आयोग के अध्यक्ष नवनीत कुमार और सदस्य छवि सिंघल ने दस्तावेज देखे और अधिवक्ताओं की दलील सुनीं। उन्होंने इसे सेवा में कमी माना और बीमा कंपनी को 15 लाख रुपये दावा, 20 हजार रुपये मानसिक कष्ट पहुंचाने तथा 10 हजार रुपये वाद व्यय के रूप में देने का निर्णय सुनाया है।
विज्ञापन
नौहझील थाना क्षेत्र के गांव तिलकागढ़ी निवासी विमला ने एक अक्तूबर 2021 को आयोग में वाद दायर किया। उन्होंने बताया कि उनके पति बलवीर उर्फ बलजीत 26 जून 2019 की सुबह ट्रैक्टर लेकर घर से निकले और रास्ते में हादसे का शिकार हो गए। दो दिन बाद अस्पताल में उनकी मौत हो गई। बलवीर ने ट्रैक्टर का (व्यक्तिगत दुर्घटना कवर) चालक सहित बीमा 24 अप्रैल 2019 से 25 अप्रैल 2020 तक के लिए कराया था। पुलिस प्राथमिकी दर्ज होने के बाद उन्होंने बीमा दावे के लिए एचडीएफसी जनरल इंश्योरेंस कंपनी आगरा को कागजात भेजे। आरोप है कि कंपनी ने वैध एवं प्रभावी ड्राइविंग लाइसेंस के अभाव में दावा खारिज कर दिया। आयोग के अध्यक्ष नवनीत कुमार और सदस्य छवि सिंघल ने दस्तावेज देखे और अधिवक्ताओं की दलील सुनीं। उन्होंने इसे सेवा में कमी माना और बीमा कंपनी को 15 लाख रुपये दावा, 20 हजार रुपये मानसिक कष्ट पहुंचाने तथा 10 हजार रुपये वाद व्यय के रूप में देने का निर्णय सुनाया है।
विज्ञापन