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बरसाना: राधारानी मंदिर में अष्टसखियों को लेकर छिड़ा विवाद, एक करोड़ की मूर्तियां... एक दिन बाद हटा दी गईं

Mon, 16 Dec 2024 01:38 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संंवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संंवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 16 Dec 2024 01:38 PM IST
सार

बरसाना में राधारानी मंदिर में विराजमान कराई गईं स्वर्ण रजत निर्मित अष्टसखियों की मूर्तियों को एक दिन बाद ही हटा दिया गया। ये मूर्तियां चेन्नई के एक ट्रस्ट द्वारा विराजमान कराई गईं थीं। 

 

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The eight sakhis were installed in Radharani temple a day before but were removed the next day
राधारानी मंदिर, बरसाना - फोटो : instagram

विस्तार

मथुरा के बरसाना स्थित राधारानी मंदिर में चेन्नई के एक ट्रस्ट द्वारा शनिवार को एक करोड़ की कीमत से स्वर्ण रजत निर्मित अष्टसखियों को राधारानी के संग विराजमान कराया। सेवायतों ने मंदिर में छप्पन भोग लगाकर शृंगार कर दर्शन शुरू कराए। इधर, रविवार को गोस्वामी समाज के कुछ लोगों ने विरोध किया तो अष्टसखियों को हटा दिया गया।
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ट्रस्ट जय हनुमान के अध्यक्ष मुरलीधर स्वामी ने सुबह अपने सहयोगियों के संग राधारानी मंदिर में सेवायत दाऊ दयाल गोस्वामी को अष्टसखियों को सुपुर्द कर दिया। इसके बाद सेवायत ने गोस्वामी समाज को बुलाकर अष्टसखी समाज को सुपुर्द कर दीं। सेवायतों ने मंदिर के पट्ठा पर दर्ज कर सुबह आरती पर राधारानी के साथ दस सखियों को पीली पोशाक धारण कराकर छप्पन भोग के साथ भक्तों को दर्शन कराए।
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उन्होंने बताया कि आठों सखियों ललिता, विशाखा, चित्रा, रंग देवी, सुदेवी, तुंग विद्या, इंदुलेखा, चम्पकलता सखियों को दक्षिण भारत के सेंगनोर में एक करोड़ की कीमत से तैयार कराया गया। राधारानी के सबसे पुराने मंदिर का भी जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। इधर रविवार को मंदिर में गोस्वामी समाज के रसिक मोहन गोस्वामी के साथ अन्य कुछ लोगों ने विरोध करना शुरू कर दिया।
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रसिक मोहन ने आरोप लगाते हुए कहा कि अष्टसखियों की मूर्ति के विराजमान होने से मंदिर की मर्यादा टूट रही है। इसके बाद सेवायत ने मंदिर में विराजमान की गई अष्टसखियों को हटा दिया। जिसके चलते ट्रस्ट के पदाधिकारी मायूस हो गए। उमाशंकर गोस्वामी ने बताया कि महीनों पहले गोस्वामी समाज से अष्टसखियों को विराजमान करने की स्वीकृति लिखित में ली गई थी। मंदिर के रिसीवर प्रवीन गोस्वामी का कहना है कि यह मंदिर के सेवायत का अधिकार है कि वह इन्हें लगवाए या नहीं।
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