Bihariji Corridor In Mathura: कॉरिडोर की जद में आ रहे 325 भवनों में टीम ने लगाया लाल निशान, लोगों की उड़ी नींद
वृंदावन स्थित ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर क्षेत्र में कॉरिडोर बनाने का काम प्रस्तावित है। इसके लिए डीएम द्वारा गठित टीम आसपास के क्षेत्र का सर्वे कर रही है। इस दौरान टीम ने 325 भवनों को चिन्हाकित करके लाल निशान लगाए हैं।
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वृंदावन में ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर क्षेत्र में प्रस्तावित कॉरिडोर को लेकर विभिन्न विभागों की संयुक्त टीम ने शुक्रवार को भी सर्वे की प्रक्रिया को जारी रखा। चार दिन से चल रही इस प्रक्रिया में 325 भवनों पर लाल निशान लगाए गए हैं। इस तरह भवनों के चिन्हांकन का कार्य पूरा होने के बाद अब मूल्यांकन की प्रक्रिया को अंजाम दिया जाएगा।
डीएम पुलकित खरे ने नगर आयुक्त अनुनय झा के नेतृत्व में 8 सदस्यीय टीम का गठन किया है। टीम ने सर्वे की कार्रवाई को आगे बढ़ाया। टीम ने प्रस्तावित कॉरिडोर के दायरे में आने वाले भवनों को चिन्हित किया है। उन पर मार्किंग की। इस दौरान लोक निर्माण विभाग, राजस्व, विकास प्राधिकरण, स्टांप और नगर निगम के कर्मचारी अधिकारी शामिल रहे।
टीम द्वारा बांकेबिहारी मंदिर की मुख्य गली के साथ वीआईपी रोड, बिहारीपुरा, सनेह बिहारी मंदिर, जंगलकट्टी क्षेत्र का सर्वे किया। प्रस्तावित कॉरिडोर को लेकर शुरू हुई सर्वे की कार्रवाई से स्थानीय लोगों की नींद उड़ गई है। कई पीढ़ियों से यहां रह रहे लोग इस कॉरिडोर को लेकर विचलित हैं। वे इस कॉरिडोर की आवश्यकता ही नहीं बता रहे है।
अब होगा प्रस्तावित कॉरिडोर क्षेत्र में संपत्ति मूल्यांकन
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर में हुए हादसे के बाद कॉरिडोर बनाने का मामला तेजी पकड़ने लगा। इसी क्रम में एक जनहित याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल की गई थी। जिस पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस सुधीर नारायण अग्रवाल को नामित करते हुए मंदिर की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने वाली कार्ययोजना की रिपोर्ट मांगी थी। अब उसी दिशा में आगे बढ़ते हुए मंदिर के आसपास प्रस्तावित कॉरिडोर क्षेत्र की संपत्तियों के आकलन जिला प्रशासन द्वारा कराया जा रहा है।
इसके लिए पीडब्ल्यूडी, एमवीडीए और नगर निगम की संयुक्त टीम के साथ राजस्व विभाग अब चिन्हांकन के बाद भूसंपत्तियों का आंकलन किया जाना है। प्रस्तावित कॉरिडोर के पांच एकड़ भूमि में स्थापित संपत्तियों के मूल्यांकन का काम एक दो दिन में पूरा किया जाना है। इसके लिए सर्वे दौरान भवनों को श्रेणीकृत कर लिया गया है। उच्च न्यायालय में इस मामले की रिपोर्ट 17 जनवरी है तक सौंपनी है।