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पीने लायक नहीं रहा जिले का पानी, 4500 तक पहुंचा टीडीएस
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फोटो 27 आन्यौर गांव में कीचड़ से भरी नाली में लगा वाटर सप्लाई के लिए नल।
- फोटो : MATHURA
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मथुरा। जिले के कई गांवों में पानी पीने लायक नहीं रह गया है। जल में पूर्णत: घुले ठोस पदार्थ (टीडीएस: टोटल डिसॉल्व्ड सॉलिड्स) का स्तर 4500 तक पहुंच गया है। यह लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। इससे लोगों को पेट, हड्डी और त्वचा के रोग हो रहे हैं।
जिले में लगातार भूगर्भ जलस्तर भी गिरता जा रहा है। फरह, बलदेव, नौहझील, राया ब्लाक डार्क जोन मेें हैं। जैसे-जैसे जलस्तर गिर रहा है, पानी और खराब हो रहा है। चिकित्सकों के अनुसार सामान्य पानी का स्तर 300 से 500 तक टीडीएस का होना चाहिए। इससे अधिक टीडीएस वाला पानी पीने से पीलिया, पेट के रोग व हड्डियों में दर्द व त्वचा के रोग पनपने लगते हैं और बाल पकने लगते हैं।
जिले के प्रमुख गांवों का अधिकतम टीडीएस स्तर---
नंदगांव ब्लाक के गांव मानकी में टीडीएस 3500
नंदगांव के सिरथला में 3500
नंदगांव के गांव गिडोह में 3500
फरह ब्लाक के गांव हथौली मेें 4000
फरह के गांव पींगरी में 4000
फरह के गांव गढ़ी रामबल में 4200
चौमुहां ब्लाक के गांव सहार में टीडीएस का स्तर 3500
चौमुहां के गांव परखम में 3500
चौमुहां के गांव अकबरपुर में 3200
मथुरा ब्लाक के गांव लाढ़पुर में टीडीएस का स्तर 3200
मथुरा के टीडीएस का स्तर 3300
मथुरा के गांव राजपुर खादर में 3000
छाता के गांव गुहेता दसबिसा में 3600
छाता ब्लाक के गांव गोहारी में टीडीएस 3500
बलदेव के गांव अवैरनी में 3200
बलदेव के गांव दघेंटा में 3500
बलदेव के गांव किशनपुर में 3400
राया ब्लाक के गांव ब्यौही में 3000
राया के गांव खेडिय़ा में टीडीएस 3300
राया के गांव सिहोरा में 3500
राया के गांव तेहरा महावन में 3800
नौहझील ब्लाक के गांव बड़ौत में 3100
नौहझील के गांव दीनू पट्टी में 3200
नौहझील के गांव मोइद्दीनपुर में 3300
गोवर्धन के गांव बछगांव में 4500
गोवर्धन के गांव मगोर्रा में 3800
गोवर्धन के गांव सौंसा में 4000
मांट ब्लाक के गंाव डडीसरा में 3300
मांट के गांव विवावली में 3000
मांट के गांव जाबरा में 3500
गोवर्धन, राधाकुंड और सुरीर में दूषित पानी से फैलती है बीमारी
गोवर्धन/राधाकुंड। गोवर्धन राधाकुंड व सुरीर क्षेत्र में दूषित हो चुके पानी से हर साल लोगों में बीमारी फैलती रहती है। सुरीर के गांव नगला जगरूपा, सिकंदरपुर, मोदीपुर, खायरा, बेरा, जरारा, मेहमूदगढ़ी, भालई, लोहई, डडीसरा, कराहरी, हरनौल में बरसात के दिनों में बुखार व जून जुलाई माह में डायरिया फैलता रहता है।
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वहीं गोवर्धन के गांव आन्यौर में टंकी दूषित पानी की आपूर्ति होने से 27 जून को बीमारी फैली थी। इससे गांव के 400 लोग बीमार हो गए थे। इस प्रकरण में गांव की टंकियों में क्लोरीनेशन न कराने पर पंचायत सेक्रेटरी को निलंबित किया गया था। राधाकुंड में दूषित पानी से 22 अक्तूबर को बीमारी फैली थी। इसमें 100 से अधिक लोग बीमार हो गए थे। जिला प्रशासन को कई दिनों तक चिकित्सकों की टीम भेजनी पड़ी थी।
लोगों से बातचीत
फोटो
राधाकुंड के वार्ड आठ में दूषित पानी की आपूर्ति हो रही है। पानी से बदबू आती है। उसे केवल कपड़े धोने व अन्य कार्यों में ही प्रयोग किया जाता है।
- लतेश, ग्रामीण राधाकुंड
फोटो-
नगर में गंदे पानी की आपूर्ति की जा रही है। बार-बार इसकी शिकायत की गई है, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।
- विष्णु गोस्वामी, ग्रामीण राधाकुंड
फोटो-
राधाकुंड में पानी इतना गंदा हो गया है कि लोग आचमन करने पर बीमार हो जाते हैं। वहीं, प्रशासन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
- लक्ष्मीकांत मिश्रा, स्थानीय नागरिक
फोटो-
राधाकुंड के आसपास सीवर टैंक बने हैं। उनसे गंदे पानी का रिसाव हो रहा है। वहां से पेयजल की लाइन जा रही हैं, जो आए दिन लीक होती रहती हैं और गंदे पानी की आपूर्ति होती रहती है।
- पप्पन शुक्ला, ग्रामीण राधाकुंड
वर्जन
गांवों में पानी के टीडीएस और दूषिता की जांच कराई जाती है। इसके अलावा समय-समय पर पंचायतों को क्लोरीनेशन के आदेश दिए जाते हैं। जल संचयन नीति के तहत खोदे गए तालाबों के भरने और गड्ढा सोख्ता बन जाने से आगामी वर्षों में सुधार होने की उम्मीद है।
- रवि किशोर त्रिवेदी, डीडीओ मथुरा
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जिले में लगातार भूगर्भ जलस्तर भी गिरता जा रहा है। फरह, बलदेव, नौहझील, राया ब्लाक डार्क जोन मेें हैं। जैसे-जैसे जलस्तर गिर रहा है, पानी और खराब हो रहा है। चिकित्सकों के अनुसार सामान्य पानी का स्तर 300 से 500 तक टीडीएस का होना चाहिए। इससे अधिक टीडीएस वाला पानी पीने से पीलिया, पेट के रोग व हड्डियों में दर्द व त्वचा के रोग पनपने लगते हैं और बाल पकने लगते हैं।
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जिले के प्रमुख गांवों का अधिकतम टीडीएस स्तर---
नंदगांव ब्लाक के गांव मानकी में टीडीएस 3500
नंदगांव के सिरथला में 3500
नंदगांव के गांव गिडोह में 3500
फरह ब्लाक के गांव हथौली मेें 4000
फरह के गांव पींगरी में 4000
फरह के गांव गढ़ी रामबल में 4200
चौमुहां ब्लाक के गांव सहार में टीडीएस का स्तर 3500
चौमुहां के गांव परखम में 3500
चौमुहां के गांव अकबरपुर में 3200
मथुरा ब्लाक के गांव लाढ़पुर में टीडीएस का स्तर 3200
मथुरा के टीडीएस का स्तर 3300
मथुरा के गांव राजपुर खादर में 3000
छाता के गांव गुहेता दसबिसा में 3600
छाता ब्लाक के गांव गोहारी में टीडीएस 3500
बलदेव के गांव अवैरनी में 3200
बलदेव के गांव दघेंटा में 3500
बलदेव के गांव किशनपुर में 3400
राया ब्लाक के गांव ब्यौही में 3000
राया के गांव खेडिय़ा में टीडीएस 3300
राया के गांव सिहोरा में 3500
राया के गांव तेहरा महावन में 3800
नौहझील ब्लाक के गांव बड़ौत में 3100
नौहझील के गांव दीनू पट्टी में 3200
नौहझील के गांव मोइद्दीनपुर में 3300
गोवर्धन के गांव बछगांव में 4500
गोवर्धन के गांव मगोर्रा में 3800
गोवर्धन के गांव सौंसा में 4000
मांट ब्लाक के गंाव डडीसरा में 3300
मांट के गांव विवावली में 3000
मांट के गांव जाबरा में 3500
गोवर्धन, राधाकुंड और सुरीर में दूषित पानी से फैलती है बीमारी
गोवर्धन/राधाकुंड। गोवर्धन राधाकुंड व सुरीर क्षेत्र में दूषित हो चुके पानी से हर साल लोगों में बीमारी फैलती रहती है। सुरीर के गांव नगला जगरूपा, सिकंदरपुर, मोदीपुर, खायरा, बेरा, जरारा, मेहमूदगढ़ी, भालई, लोहई, डडीसरा, कराहरी, हरनौल में बरसात के दिनों में बुखार व जून जुलाई माह में डायरिया फैलता रहता है।
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वहीं गोवर्धन के गांव आन्यौर में टंकी दूषित पानी की आपूर्ति होने से 27 जून को बीमारी फैली थी। इससे गांव के 400 लोग बीमार हो गए थे। इस प्रकरण में गांव की टंकियों में क्लोरीनेशन न कराने पर पंचायत सेक्रेटरी को निलंबित किया गया था। राधाकुंड में दूषित पानी से 22 अक्तूबर को बीमारी फैली थी। इसमें 100 से अधिक लोग बीमार हो गए थे। जिला प्रशासन को कई दिनों तक चिकित्सकों की टीम भेजनी पड़ी थी।
लोगों से बातचीत
फोटो
राधाकुंड के वार्ड आठ में दूषित पानी की आपूर्ति हो रही है। पानी से बदबू आती है। उसे केवल कपड़े धोने व अन्य कार्यों में ही प्रयोग किया जाता है।
- लतेश, ग्रामीण राधाकुंड
फोटो-
नगर में गंदे पानी की आपूर्ति की जा रही है। बार-बार इसकी शिकायत की गई है, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।
- विष्णु गोस्वामी, ग्रामीण राधाकुंड
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राधाकुंड में पानी इतना गंदा हो गया है कि लोग आचमन करने पर बीमार हो जाते हैं। वहीं, प्रशासन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
- लक्ष्मीकांत मिश्रा, स्थानीय नागरिक
फोटो-
राधाकुंड के आसपास सीवर टैंक बने हैं। उनसे गंदे पानी का रिसाव हो रहा है। वहां से पेयजल की लाइन जा रही हैं, जो आए दिन लीक होती रहती हैं और गंदे पानी की आपूर्ति होती रहती है।
- पप्पन शुक्ला, ग्रामीण राधाकुंड
वर्जन
गांवों में पानी के टीडीएस और दूषिता की जांच कराई जाती है। इसके अलावा समय-समय पर पंचायतों को क्लोरीनेशन के आदेश दिए जाते हैं। जल संचयन नीति के तहत खोदे गए तालाबों के भरने और गड्ढा सोख्ता बन जाने से आगामी वर्षों में सुधार होने की उम्मीद है।
- रवि किशोर त्रिवेदी, डीडीओ मथुरा