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Mathura News: मिलावटी दूध से बनीं मिठाईयां कर सकती हैं बीमार
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मथुरा। रक्षाबंधन पर यदि आप अपनों के लिए बाजार से मिठाई खरीद रहे हैं तो सावधान हो जाएं। जिले में बड़ी संख्या में मिलावटी दूध के सौदागर सक्रिय हो गए हैं। ये नकली दूध बाजार में सप्लाई कर रहे हैं, जिनसे बनने वाली मिठाईयां व पनीर लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग की हालिया कार्रवाइयों में 50 क्विंटल पनीर व 7 हजार लीटर दूध पकड़ा जा चुका है।
रक्षाबंधन पर मिठाईयों के लिए दूध की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में मिलावटखोर दूध के स्थान पर या उसमें सस्ते मिल्क पाउडर, वनस्पति वसा और अन्य गैर-मानक सामग्री का इस्तेमाल करते हैं। इनसे पनीर जैसी बनावट भी तैयार हो जाती है। कई बार इसमें पानी की मात्रा अधिक रखी जाती है। देखने में यह असली पनीर जैसा लगता है।
अगस्त माह में कोसीकलां, छाता, शेरगढ़ और नौहझील में पकड़े गए मिलावटी दूध और पनीर को स्किम्ड मिल्क पाउडर, रिफाइंड सोयाबीन ऑयल, रानीपाल केमिकल समेत अन्य उत्पादों से तैयार किया गया था। विभाग ने मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई की बावजूद इसके उनकी गतिविधियां बंद नहीं हुई हैं। सहायक आयुक्त (खाद्य) डॉ. जतिन कुमार सिंह ने बताया कि मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।
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ये होता है शरीर को नुकसान
चिकित्सक डॉ. नीरज अग्रवाल ने बताया है कि मिलावटी या दूषित पनीर खाने से उल्टी, दस्त, पेट दर्द और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यदि उत्पाद में असुरक्षित कच्चे माल या हानिकारक पदार्थों का इस्तेमाल हुआ है तो स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। मिलावटी उत्पाद में प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व अपेक्षित मात्रा में नहीं मिलते हैं। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों के लिए दूषित खाद्य पदार्थ अधिक जोखिम पैदा कर सकते हैं।
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केस-1
03 अगस्त- वृंदावन में मिलावटी दूध से तैयार 4 हजार किग्रा पेड़ा नष्ट कराया गया, नमूने लेकर जांच के लिए भेजे थे।
केस-2
12 अगस्त- कोसीकलां में 1500 किग्रा पनीर व तीन हजार लीटर दूध पकड़ा गया। टीम ने नौ नमूने जांच के लिए भेजे।
केस-3
13 अगस्त- कोसीकलां में 1800 किग्रा पनीर नष्ट कराया गया था। साथ ही अपमिश्रित सामग्री भी पकड़ी गई थी।
केस-4
17 अगस्त-गांव हुसैनी में 500 किग्रा पनीर व दो हजार लीटर दूध पकड़ा। पनीर निर्माण सामग्री को नष्ट कराया गया।
केस-5
21 अगस्त- राया में टीम ने दूध से भरा टैंकर पकड़ा था। टीम ने प्रारंभिक जांच के आधार पर दूध को नष्ट करा दिया।
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रक्षाबंधन पर मिठाईयों के लिए दूध की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में मिलावटखोर दूध के स्थान पर या उसमें सस्ते मिल्क पाउडर, वनस्पति वसा और अन्य गैर-मानक सामग्री का इस्तेमाल करते हैं। इनसे पनीर जैसी बनावट भी तैयार हो जाती है। कई बार इसमें पानी की मात्रा अधिक रखी जाती है। देखने में यह असली पनीर जैसा लगता है।
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अगस्त माह में कोसीकलां, छाता, शेरगढ़ और नौहझील में पकड़े गए मिलावटी दूध और पनीर को स्किम्ड मिल्क पाउडर, रिफाइंड सोयाबीन ऑयल, रानीपाल केमिकल समेत अन्य उत्पादों से तैयार किया गया था। विभाग ने मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई की बावजूद इसके उनकी गतिविधियां बंद नहीं हुई हैं। सहायक आयुक्त (खाद्य) डॉ. जतिन कुमार सिंह ने बताया कि मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।
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ये होता है शरीर को नुकसान
चिकित्सक डॉ. नीरज अग्रवाल ने बताया है कि मिलावटी या दूषित पनीर खाने से उल्टी, दस्त, पेट दर्द और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यदि उत्पाद में असुरक्षित कच्चे माल या हानिकारक पदार्थों का इस्तेमाल हुआ है तो स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। मिलावटी उत्पाद में प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व अपेक्षित मात्रा में नहीं मिलते हैं। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों के लिए दूषित खाद्य पदार्थ अधिक जोखिम पैदा कर सकते हैं।
केस-1
03 अगस्त- वृंदावन में मिलावटी दूध से तैयार 4 हजार किग्रा पेड़ा नष्ट कराया गया, नमूने लेकर जांच के लिए भेजे थे।
केस-2
12 अगस्त- कोसीकलां में 1500 किग्रा पनीर व तीन हजार लीटर दूध पकड़ा गया। टीम ने नौ नमूने जांच के लिए भेजे।
केस-3
13 अगस्त- कोसीकलां में 1800 किग्रा पनीर नष्ट कराया गया था। साथ ही अपमिश्रित सामग्री भी पकड़ी गई थी।
केस-4
17 अगस्त-गांव हुसैनी में 500 किग्रा पनीर व दो हजार लीटर दूध पकड़ा। पनीर निर्माण सामग्री को नष्ट कराया गया।
केस-5
21 अगस्त- राया में टीम ने दूध से भरा टैंकर पकड़ा था। टीम ने प्रारंभिक जांच के आधार पर दूध को नष्ट करा दिया।