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बैठक में नहीं बनी बात, दोनों पक्ष अड़े
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मथुरा। प्रतिमा प्रकरण को लेकर वृंदावन परिक्रमा मार्ग में धर्मरक्षक संघ की ओर से आयोजित बैठक में ?
- फोटो : VRINDAVAN
वृंदावन (मथुरा)। डेंपियर नगर स्थित गोल पार्क में प्रतिमा स्थापित करने के मामले को सुलझाने के लिए बुधवार को धर्म रक्षक संघ की ओर से बैठक हुई। इसमें दोनों समाज एक बार फिर आमने-सामने आ गए। तालमेल के बजाए बैठक में विवाद होते देख प्रबुद्ध लोग यहां से चले गए। इस दौरान भी मामला नहीं सुलझ सका।
बैठक में ब्राह्मण और जाट समाज के अनेक प्रतिष्ठित लोग शामिल हुए। बैठक की शुरुआत दोनों समाज के प्रबुद्धजन वक्ताओं ने महापुरुषों की महिमा से की। महाराजा सूरजमल के हिंदू धर्म के लिए किए गए योगदान पर भी विचार रखे गए। इसी बीच ब्राह्मण समाज के पदाधिकारी राजेश पाठक ने यह तथ्य रखा कि 2016 में पार्क का नामकरण भगवान परशुराम कराया जा चुका है।
इस पर जाट समाज ने आपत्ति व्यक्त की। आरबी चौधरी ने नगर आयुक्त की ओर से जारी किए पत्र को बैठक में पढ़कर सुनाया। इसमें संबंधित पार्क को नारायण सर्किल बताया गया है। यह भी बताया है कि इसके सौंदर्यीकरण और इसका नामकरण भगवान परशुराम के नाम पर करने का प्रस्ताव दिया गया था। इस पर सौंदर्यीकरण के दिशानिर्देश जारी किए गए। इससे बैठक में विवाद पैदा होते देख दोनों ही समाज के प्रबुद्ध लोग चले गए, उन्हें फिर मनाकर लाया गया। इस स्थिति के बाद सिर्फ अध्यक्षीय संबोधन पूर्व मंत्री चौधरी सरदार सिंह ने किया। उन्होंने दोनों ही समाज से शांति की अपील की।
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बैठक में ब्राह्मण और जाट समाज के अनेक प्रतिष्ठित लोग शामिल हुए। बैठक की शुरुआत दोनों समाज के प्रबुद्धजन वक्ताओं ने महापुरुषों की महिमा से की। महाराजा सूरजमल के हिंदू धर्म के लिए किए गए योगदान पर भी विचार रखे गए। इसी बीच ब्राह्मण समाज के पदाधिकारी राजेश पाठक ने यह तथ्य रखा कि 2016 में पार्क का नामकरण भगवान परशुराम कराया जा चुका है।
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इस पर जाट समाज ने आपत्ति व्यक्त की। आरबी चौधरी ने नगर आयुक्त की ओर से जारी किए पत्र को बैठक में पढ़कर सुनाया। इसमें संबंधित पार्क को नारायण सर्किल बताया गया है। यह भी बताया है कि इसके सौंदर्यीकरण और इसका नामकरण भगवान परशुराम के नाम पर करने का प्रस्ताव दिया गया था। इस पर सौंदर्यीकरण के दिशानिर्देश जारी किए गए। इससे बैठक में विवाद पैदा होते देख दोनों ही समाज के प्रबुद्ध लोग चले गए, उन्हें फिर मनाकर लाया गया। इस स्थिति के बाद सिर्फ अध्यक्षीय संबोधन पूर्व मंत्री चौधरी सरदार सिंह ने किया। उन्होंने दोनों ही समाज से शांति की अपील की।
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