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ब्रजयात्रियों ने किए गुह्य गिरि गुफाओं के दर्शन
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Sun, 29 Nov 2015 12:03 AM IST
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बरसाना से शुरू हुई राधारानी ब्रज यात्रा शनिवार को अपने 35वें पड़ाव पर पहुंची। इसमें श्रीमद्भागवत में उल्लिखित गुह्य गिरि गुफाओं के दर्शन भी किए। यहां राधामाधव की अंतरंग लीलाएं हुईं। इसमें गुहान गो दृष्टि वन, बूढे़ बद्री, जड़खोर, पहलवाड़ा शामिल रहे।
इस दौरान भागवताचार्य बाल साध्वी श्रीजी शर्मा ने कहा कि भगवान की अंतरंग लीलाओं के साक्षी इन स्थलों का दर्शन समस्त यात्रियों को निश्चय ही प्रभु की अविचल भक्ति प्रदान करने वाला है।
गो दृष्टि वन में स्थित हो श्रीकृष्ण गायों पर दृष्टि रखते थे। बूढ़े बद्री में नंद बाबा को बद्रीनाथ के दर्शन कराए थे। इसके पश्चात दो बड़ी गोशालाओं का यात्रियों ने दर्शन किया।
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यहां यात्रियों का स्वागत किया गया। जड़खोर की गुफाओं के दर्शन कर यात्रियों ने सौगंधनी सिला को प्रणाम किया। कहते हैं कि यहां कृष्ण ने सौगंध खाई थी कि मैं कभी ब्रज छोड़ कर नहीं जाऊंगा।
रविवार को यात्रा आदि बद्री जाएगी। यहां श्रीकृष्ण द्वारा स्थापित बहुत से स्थलों का दर्शन करेंगे। अंत में यमुना मुक्तिकरण के संयोजक राधाकांत शास्त्री ने यमुना के लिए होने वाले आंदोलन में सभी की सहभागिता का आह्वान किया। खोह में कलशयात्रा के साथ यात्रियों का स्वागत हुआ।
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इस दौरान भागवताचार्य बाल साध्वी श्रीजी शर्मा ने कहा कि भगवान की अंतरंग लीलाओं के साक्षी इन स्थलों का दर्शन समस्त यात्रियों को निश्चय ही प्रभु की अविचल भक्ति प्रदान करने वाला है।
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गो दृष्टि वन में स्थित हो श्रीकृष्ण गायों पर दृष्टि रखते थे। बूढ़े बद्री में नंद बाबा को बद्रीनाथ के दर्शन कराए थे। इसके पश्चात दो बड़ी गोशालाओं का यात्रियों ने दर्शन किया।
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यहां यात्रियों का स्वागत किया गया। जड़खोर की गुफाओं के दर्शन कर यात्रियों ने सौगंधनी सिला को प्रणाम किया। कहते हैं कि यहां कृष्ण ने सौगंध खाई थी कि मैं कभी ब्रज छोड़ कर नहीं जाऊंगा।
रविवार को यात्रा आदि बद्री जाएगी। यहां श्रीकृष्ण द्वारा स्थापित बहुत से स्थलों का दर्शन करेंगे। अंत में यमुना मुक्तिकरण के संयोजक राधाकांत शास्त्री ने यमुना के लिए होने वाले आंदोलन में सभी की सहभागिता का आह्वान किया। खोह में कलशयात्रा के साथ यात्रियों का स्वागत हुआ।